पस्त हुआ जागरण प्रबंधन, कर्मचारियों के हौसले बुलंद

jagran2नई दिल्ली/ नोएडा। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने की मांग को लेकर पिछले दो वर्ष से संघर्ष कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों का संघर्ष अब रंग लाने लगा है। जागरण प्रबंधन से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि अखबार मालिकानों के सारे दांव विफल साबित हो गए हैं और उनके साथ साथ प्रबंधन से जुड़े अन्य लोगों में बेहद हताशा का माहौल है। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट में पिछले महीने हुई सुनवाई में माननीय अदालत का रुख स्पष्ट रूप से कर्मचारियों के पक्ष में होने के बाद जागरण के मालिकान पूरी तरह बैकफुट पर हैं। इसके अलावा कर्मचारियों द्वारा संयुक्त रूप से लगभग 100 करोड़ की रिकवरी भी डाली जा चुकी है। कर्मचारियों ने इससे पूर्व में अपने अधिवक्ता के माध्यम से मालिकानों को नोटिस भी भिजवा दिया था। बताया जा रहा है कि कर्मचारियों के बुलंद हौसलों के कारण ही अखबार मालिकान और प्रबंधन अब कर्मचारियों के साथ समझौता करने को विवश हो गए हैं। अब यह पूरी तरह स्पष्ट है कि अखबार मालिकानों के पास कर्मचारियों से समझौते के अलावा कोई रास्ता नहीं है। इस संबंध में जागरण एम्प्लाइज यूनियन के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रदीप कुमार सिंह कहते हैं कि अखबार मालिकानों ने पिछले दो साल में कर्मचारियों पर अत्याचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अखबार मालिकानों के अत्याचार के कारण ही कर्मचारियों को सड़क पर उतरना पड़ा। आंदोलित कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि वे अखबार मालिकानों के झांसे में नहीं आएंगे और मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार वेतन और एरियर से कम पर बिलकुल समझौता नहीं करेंगे।

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