जी-समूह में फर्राटा भरते जगदीश कातिल के पंख ब्रजेश ने कतरे

फलाने साहब अपने करमों के चलते लम्‍बे समय से बेरोजगार चल रहे थे। अचानक उनके कूड़ादान की किस्‍मत पलटी और नतीजा वे आसमान पर पहुंच गये, और बड़े नवाब बन गये। उसके बाद इस बड़े नवाब ने अपने बेरोजगार प्‍यादों को अमृत छकाया, तो वे चैनल-पियारा बन गये। लेकिन उन्‍हें चैनल-पियारा बनाने के लिए पहले से ही सजे बादशाह के दरबार में बिराजमान नवाबों को नये नवाबों ने उसे ऐसा लतियाया कि वह इस्‍तीफा देकर भाग गया। नतीजा यह कि उसमें से कई प्‍यादे से नवाब बन गये। अचानक राजनीति ने करवट लिया और नवाब बना कर तेज उड़ रहे फाख्‍ता के पंख कतर दिये गये। वह बना, तो वह गया, और जब वह गया तो एक दूसरा आ गया। लेकिन उसके आते ही पहले से गये एक ने दूसरे को लात मारी, तो लात खाये ने गुस्‍से में इस्‍तीफा दे दिया। इसी बीच एक नया हाकिम आया, तो उसने पुराने को ढक्‍कन कर दिया। और उसके बाद फिर उसके बाद फिर उसके बाद।

लगता है कि आप समझ नहीं पाये। लेकिन जरा ध्‍यान से देखिये तो सारी तस्‍वीर समझ में आ जाएगी। जी हां, यह मामला जी-समूह में आजकल तेजी से चल रही उठापटक का है। इसी उठापट के चलते बड़े-बड़े नवाब आजकल नाबदान की तहलटी में लेटने पर मजबूर हैं, तो कई बड़े अरमान से हासिल कर बड़े ओहदे हासिल करने के बावजूद  दो-कौड़ी के बनते दिख रहे हैं। फिलहाल जी-समूह इस समय खबरों के लिए नहीं, बल्कि अपनी खबरों के चलते चर्चाओं में घिरता जा रहा है।

दरअसल जगदीश कातिल ने जी-समूह में अपने पांसे फेंकने की कवायद के तहत जो रणनीति अपनायी, उससे पहले तो वासिंद्र मिश्र का दम घोंटना मजबूरी था। अपनी जागीर समझ चुके वासिंद्र इस रणनीति में मुंह के बल औंधे गिरे और आखिरकार उन्‍हें जी-समूह से इस्‍तीफा ही देना पड़ा। उसके बाद जी-हिन्‍दुस्‍तान के लिए अपने दाहिने हाथ माने जाने वाले अशित कुनाल को कातिल ने इस चैनल का हेड बना दिया। इसके पहले कुनाल इटीवी के नेशनल न्‍यूज कोआर्डिनेटर रहते थे।

इसके अलावा एनडीटीवी से शमेशेर सिंह और जय पुर से गिरिराज को भी कातिल ने जी-हिन्‍दुस्‍तान में बुला लिया। उर्दू ईटीवी दिल्‍ली से खुर्शीद रब्‍बानी बुला लिये गये। इटीवी उर्दू हैदराबाद से खालिद रजा खान बुला कर आउटपुट हेड बना दिये गये। इसी तरह अपने करीबी रहे कई लोगों की ढेर सारी भर्तियों के बल पर जगदीश कातिल ने अपनी टीम को बुनना शुरू कर दिया।

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लेकिन इसी बीच मामला गच्‍चे में आ गया। हुआ यह कि जगदीश कातिल की रणनीति के विपरीत अचानक एक ब्रजेश कुमार सिंह नामक एक शख्‍स जी-हिन्‍दुस्‍तान में शामिल कर लिया गया। इतना भी होता तो कोई दिक्‍कत नहीं थी, लेकिन बज्रपात की तरह यह भर्ती तो कातिल के सपनों पर कुठाराघात की तरह हुई। कारण यह कि जिस जी-हिन्‍दुस्‍तान चैनल का मुखिया कातिल ने आतिश कुनाल को बनाया था, ब्रजेश को उसी कुनाल की कुर्सी पर बिठाना पड़ा। सूत्र बताते हैं कि यह भर्ती कातिल के सपनों के हत्‍या की तरह रही। सूत्र यह भी बताते हैं कि यह भर्ती सीधे मालिकों ने की, और बिना कातिल को बताये हुई।

सूत्र बताते हैं कि दरअसल ब्रजेश कुमार सिंह का यह आगमन सीधे गुजरात-फैक्‍टर के चलते हुआ। बताते हैं कि ब्रजेश की करीबी मोदी-शाह से काफी है। इसीलिए जगदीश कातिल की बिसात में पड़े सारे पांसे एक झटके में ही बिखर गये।

बहरहाल, अब खबर यह है कि एबीपी में लम्‍बे समय तक एंकर रहीं सुबेरा खान अब जी-हिन्‍दुस्‍तान से जुड़ गयी हैं।

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