माँ की संपत्ति और लंकेश पत्रिका के नियंत्रण को लेकर गौरी और भाई इंद्रजीत के बीच था बड़ा विवाद

सिर्फ दक्षिणपंथी नहीं, पारिवारिक कलह भी हो सकती है गौरी लंकेश की हत्या के पीछे का कारण

सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मामले की विशेष जांच दल (एसआईटी) कई कोणों से जाँच कर रही है। एक तरफ जाँच टीम उनकी विचारधारा के कारण बने उनके दुश्मनों की भूमिका की जाँच इस हत्याकांड में कर रही है। दूसरी ओर जाँच दल गौरी लंकेश के निजी पारिवारिक संबंधों की भी जाँच कर रहा है।

एक न्यूज़ वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार एसआईटी इस हत्या के पीछे व्यक्तिगत या वित्तीय कारण पर भी ध्यान केंद्रित का रही है। रिपोर्ट के अनुसार एसआईटी अभी उन सम्पतियों के दस्तावेजों को जुटा रही है जो उनकी 75 वर्षीय मां इंदिरा के नाम पर हैं। जिस बंगले में गौरी रहती थी वह 30/40 फुट भूखंड पर स्थित है, इस बंगले की वैल्यू लगभग 2.5 करोड़ रूपये है।

इसके अलावा, गौरी की छोटी बहन कविता के साथ रहने वाली इंदिरा लंकेश के नाम बेंगलुरु के बाहरी इलाके नेलमंगलला के औद्योगिक जिले में चार एकड़ वाला फार्महाउस भी है। यह संपत्ति लगभग 3 करोड़ रुपये के मूल्य के बराबर है।

 

रिपोर्ट के अनुसार यह बात भी सामने आयी है कि गौरी और उनके भाई इंद्रजीत के सम्बन्ध कुछ ज्यादा अच्छे नहीं थे। भाई-बहन के रिश्ते में यह कड़वाहट पिता की मौत के बाद लंकेश पत्रिका के प्रकाशन के कारण आयी थी। गौरी लंकेश के पिता पी लंकेश का जनवरी 2000 में निधन हो गया था।

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गौरी के परिवार को लम्बे समय से जानने वाले शिवसुंदर ने बताया कि पी लंकेश के निधन के बाद लम्बे समय तक गौरी और इंद्रजीत के बीच लंकेश पत्रिका के नियंत्रण को लेकर विवाद रहा। दोनों भाई-बहनों के बीच झगड़ा भी चला। इस बीच एक बार इंद्रजीत ने गौरी पर बंदूक खींचकर गुस्से में कहा कि वह पत्रिका कार्यालयों का परिसर को छोड़ दें। जिसके बाद  गौरी ने इंद्रजीत के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई थी।

बसवंगुडी की संपत्ति को तीनों  भाइयों के बीच समान रूप से विभाजित किया गया था। इसमें इंदरजीत को ग्राउंड फ्लोर, कविता को दूसरा और गौरी को प्रथम फ़्लोर दिया गया था। गौरी लंकेश पत्रिके के लॉन्च होने के कुछ साल बाद गौरी ने पूरा भूमि तल खरीद लिया।  इस बीच,इंद्रजीत ने सेंट्रल बेंगलुरु के लैंगफोर्ड टाउन में एक मशहूर बिल्डिंग से अपना काम शुरू कर दिया था। जहाँ से उन्होंने  20-पृष्ठ का अखबार प्रकाशित किया। लेकिन गौरी के प्रकाशन ने कोई विज्ञापन नहीं लिया।

 

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