सबसे बड़े गालीबाज को तो खुद रवीश कुमार ही शह देकर सोशल मीडिया पर हीरो बना रहे

गौरी लंकेश के मामले में नितिन दधीच के कथित अपमानजनक कमेंट पर प्रधानमंत्री से जवाब मांगने वाले रवीश कुमार खुद एक गालीबाज को हीरो बनाने में घिरते नजर आ रहे हैं। तस्वीर में रवीश कुमार के साथ बैठकर खिलखिलाते शख्स का नाम है मो. अनस। सोशल मीडिया पर गजब की गालियां देते हैं। मंझे हुए खिलाड़ी हैं। पत्रकारिता की पृष्ठिभूमि रखते हैं और पत्रकारों को ही खूब गरियाते हैं। गाली देने में कितनी प्रतिभा है, सुबूत के तौर पर हाजिर हैं स्क्रीनशॉट। जनाब, यह गाली  एक पत्रकार की पोस्ट पर देते नजर आ रहे हैं। यही नहीं एक और स्क्रीनशॉट है। जिसे ज्योति नामक युवती ने कुछ दिन पहले फेसबुक पर पोस्ट किया था। जिसमें अनस ज्योति को कभी मिलने पर चप्पल से मारने की बात कह रहे हैं। यह तो सिर्फ नमूना है। ऐसे कई गालियों से भरे स्क्रीनशॉट खुद फेसबुक पर सर्च करने पर आपको मिल जाएंगे। यूं तो गाली इस तरह शो नहीं करनी चाहिए। यह नैतिकता का तकाजा है। मगर क्या करें। कभी-कभी आइना दिखाने के लिए करना पड़ता है।

रवीश जी, गालीबाज अनस के साथ बैठकर आप इस तस्वीर में हंसते-मुस्कुरा रहे हो। किसी के साथ तस्वीर खिंचाना गुनाह नहीं है। आप बचाव में बहाना बना सकते हैं कि मैं सैलिब्रेटी पत्रकार हूं। जहां भी जाता हूं, फैंस उमड़ पड़ते हैं। तस्वीर तो मेरे साथ बहुत लोग खिंचाते हैं। वैसे ही अनस ने भी खिंचा ली होगी। मैं कायदे से  अनस को जानता-पहचानता नहीं हूं। ठीक है आप जानते-पहचानते नहीं हैं। मगर अनस के साथ तस्वीर फिर उनके समर्थन में लिखी पोस्ट में कोई लिंक नहीं है। यह कैसे मान लिया जाए।

आप यह भी तर्क दे सकते हैं कि भाई किसी के साथ तस्वीर हो जाने से या किसी के समर्थन में पोस्ट लिख देने से मैं उसकी करतूतों का जिम्मेदार कैसे हो सकता है। उसकी गालियों का ठीकरा मुझ पर क्यों फोड़ा जाए। किसी के समर्थन में लिखा पोस्ट कैरेक्टर सर्टिफिकेट थोड़ी हो जाता है। ठीक है मानता हूं। तब तो यही बात पीएम मोदी पर भी लागू होती है। यही बात तो भाजपा की ओर से भी कहा गया था कि किसी को फॉलो करने का मतलब यह नहीं कि उसे कैरेक्टर सर्टिफिकेट मान लिया जाए। रवीश जी, यह कैसे हो सकता है कि प्रधानमंत्री से जिस नैतिकता के मानक की मांग आप कर रहे हैं, वह आप पर लागू न हो। इस नाते पहले खुद गालीबाजों से दूरी बनाइए, फिर प्रधानमंत्री से मांग करें तो ज्यादा अच्छा लगेगा।

बीते दिनों अनस को फेसबुक का विक्टिम बताकर हीरो बनाने की मुहिम चली। बिना पूरे पहलू की तहकीकात किए  वेबसाइट से लेकर अखबार रंग दिए गए। यह देखकर मैं चौंक गया कि आप जैसे पत्रकार भी इसमें हाथ बंटाते नजर आए। 27 सितंबर को बकायदा आपने अनस के समर्थन में पोस्ट लिखी। कमल का फूल…मेरी भूल के एकतरफा एपिसोड के जरिए। आम आदमी लिखता तो कोई बात भी थी। मगर पढ़े-लिखे और सामाजिक सरोकारों की पत्रकारिता के लिए जाने जाने वाले रवीश ने भी मुहर लगा दी कि अनस को तीस दिन के लिए ब्लॉक भाजपा विरोधी पोस्ट के लिए ही किया गया है। सवाल उठता है कि एक गालीबाज से रवीश कुमार की इतनी यारी क्यों। इतनी हमदर्दी क्यों। जब आप प्रधानमंत्री के लिए नैतिकता की लकीर खींच रहे हैं। आप तय करना चाह रहे हैं कि किसे प्रधानमंत्री फॉलो करें किसे नहीं। एक यूजर ने गाली दे दी तो सीधे प्रधानमंत्री को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। तो फिर आप एक गालीबाज को सोशल मीडिया पर विक्टिम की आड़ में हीरो बनाने की जवाबदेही से कैसे बच सकते हैं।

अनस के समर्थन में क्या लिखी रवीश ने

27 सितंबर को रवीश कुमार ने लिखा-

कमल का फूल हमारी भूल लिखी हुई पर्ची तो जाने कितने लोग शेयर कर रहे हैं। फिर भी इसके लिए फेसबुक ने अनस का पेज तीस दिन के लिए ब्लाक कर दिया। सियासत में इस तरह के तंज तो आम बात है। अब इतनी सी बातों के लिए फेसबुक ब्लाक करेगा तो क्या होगा। फेसबुक फेक न्यूज के लिए इतना विज्ञापन दे रहा है, अभियान चला रहा है दूसरी तरफ इस तरह के बैन भी लगाता है। क्या यह सब ऑटो मोड पर होता है ? लगता यही है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का काम है। या फिर यहाँ भी वही डर है जिसकी चर्चा यशवंत सिन्हा कर रहे हैं कि डर इतना भर दिया गया है कि लोग ढहती अर्थव्यवस्था को देखते हुए भी नहीं बोल रहे हैं।

 

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रवीश की पोस्ट पर फेसबुक के किसी और ठिकाने पर चल रहे विमर्श पर एक पत्रकार की टिप्पणी देखिए।

कैसे ब्लॉक होता है कोई अकाउंट

रवीश ने भी बगैर फेसबुक का पक्ष लिये मुहर लगा दी कि यशवंत सिन्हा ने जिस डर का जिक्र किया, वही डर फेसबुक पर भी पसर गया है। इस नाते अकाउंट ब्लॉक हुआ। बगैर  फेसबुक का पक्ष लिए रवीश ने भी  जज  बनकर वही बात लिख दी, जो वाट्सअप यूनिवर्सिटी से लिखा जा रहा था। सवाल है कि आप   कैसे तय कर ले रहे कि भाजपा के खिलाफ लिखने पर ही अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया। अगर ऐसा हो तो आपका और दिलीप सी मंडल का अकाउंट तो फेसबुक पहले ही ब्लॉक कर दे। आपसे ज्यादा और कौन विरोध करता है भाजपा का सोशल मीडिया पर।

अरे भाई। फेसबुक का सीधा सा फंडा है। अब आप जानबूझकर अन्जान बन रहें, यह अलग बात है। अगर किसी पोस्ट के खिलाफ तमाम लोग रिपोर्ट करने लगते हैं तो फेसबुक उसे सेंसटिव पोस्ट मान बैठता है। इसके लिए मैसेज भेजता है। अगर आपने प्रतिवाद करते हुए पोस्ट के समर्थन में संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो फेसबुक एक्शन लेता है।  इसके तहत पोस्ट डिलीट करने से लेकर ब्लॉक करने तक की कार्रवाई शामिल है। फिर वेवजह विक्टिम बनाने का खेल क्यों।

 

रवीश कुमार ने जब अनस के समर्थन में पोस्ट लिखा तो आईं प्रतिक्रियाएँ

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