‘देश के प्रतिष्ठित मीडिया घराने कितने गैर-जिम्मेदाराना ढंग से काम कर रहे है, इसकी पोल हाईकोर्ट ने खोल दी’

देश के प्रतिष्ठित मीडिया घराने कितने गैर जिम्मेदाराना ढंग से काम कर रहे हैं इसकी पोल दिल्ली हाई कोर्ट ने खोल दी है। हाई कोर्ट ने 12 मीडिया हाउसों पर 10 -10 लाख का जुर्माना लगाया है। दरअसल इन मीडिया हाउसों ने कठुआ रेप कांड की पीड़िता की पहचान उजागर की थी। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि मीडिया घरानों ने पीड़िता की पहचान को उजागर करके इंडियन पैनल कोड के सेक्शन 228ए का उल्लंघन किया है, जिसके तहत अपराधी को सजा देने की व्यवस्था है।

कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि सेक्शन 23 के अंतर्गत पोस्को कानून में बाल पीड़िता की पहचान उजागर करने में छह महीने की सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसी पीड़ित बच्ची की पहचान उजागर करना जो अब इस दुनिया में नहीं है, किसी भी तरह उचित नहीं कहा जा सकता। यह कानून का उल्लंघन तो है ही, पत्रकारिता की नैतिकता का भी सरासर उल्लंघन है। कोर्ट ने इस बारे में दिशा-निर्देश जारी किए है कि पीड़ित व्यक्ति की निजता के अधिकार का उल्लंघन बड़े पैमाने पर किया गया है। पीड़िता के परिवार की पहचान भी उजागर की गई। यहां तक कि पीड़िता के परिवार की महिलाओं की पहचान भी उजागर की गई। पीड़िता के पिता के नाम के साथ ही उसके गांव और यहां तक कि उसके घर की तस्वीरें भी मीडिया ने उजागर की। इससे कानून का उल्लंघन तो हुआ ही है। एक परिवार का जीना भी मुश्किल हो गया है।मीडिया ने पीड़िता को जहां बंधक बनाकर रखा गया था, उस कथित धार्मिक स्थान की पहचान भी उजागर की। उस धार्मिक स्थान के केयरटेकर के एक बयान को ही आधार बनाकर पीड़िता को बार-बार बेइज्जत किया गया।

हालाँकि मीडिया हाउस के वकील ने सभी मीडिया हाउस की तरफ से न्यायालय में माफी मांगी और कहा कि कानून के प्रति अज्ञानता की वजह से यह गलती हुई। media indiaमीडिया हाउस में काम करने वाले लोगों को यह गलतफहमी हो गई थी, चूंकि पीड़िता की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए उसका नाम उजागर करने में आपत्ति नहीं है। फिर भी सभी मीडिया हाउस अपनी गलती के लिए माफी चाहते है। इसके बावजूद कोर्ट ने जुर्माना लगाया। जुर्माने की राशि पीड़ित परिवार को दी जायेगी।

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जिन पर जुर्माना लगाया गया है उनमें अधिकांश अंग्रेजी के अखबार हैं। इसमें टाइम्स ऑफ़ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, हिन्दू , स्टेट्समैन, हिंदुस्तान टाईम्स, डेक्कन क्रानिकल शामिल है। जुर्माना लगनेवालों में हिंदी का मात्र एक अखबार नवभारत टाइम्स है। अंग्रेजी साप्ताहिक द वीक, न्यूज़ चैनल NDTV, इंडिया टीवी, और रिपब्लिक टीवी के अलावा न्यूज़ वेबसाईट द फर्स्ट पोस्ट का नाम भी शामिल है। जुर्माना भरने के लिए इन्हें 25 अप्रैल तक का समय दिया गया है। इसके बाद फिर इस मामले पर सुनवाई होगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर इस मामले की सुनवाई कर रहे है।
उम्मीद है कि इससे मीडिया सम्हलेगा और ऐसे संवेदनशील मामलों के खबर प्रकाशन में ज्यादा सावधानी बरतेगा।

(वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी के फेसबुक वॉल से साभार, ये लेखक के निजी विचार हैं)
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