इंडिया टुडे समूह की ‘बेकार’ पत्रकारिता के 5 नमूने जिसे वो ‘महान’ खबरों के नाम से परोस चुके हैं

मीडिया जगत में सबसे तेज और नंबर 1 बने रहने की चाह में इंडिया टुडे समूह ने अपने खोजी पत्रकारों से बीते दिनों फर्जी पड़ताल करवाई। उन्होंने एबीवीपी कार्यकर्ताओं को पूरी हिंसा के लिए दोषी साबित करने के लिए जी-जान लगा दी । लेकिन, झूठ का पर्दाफाश होते ही वे अपने दर्शकों को समझाने लगे कि आलोचना करने वालों पर ध्यान न दिया जाए। ऐसा इसलिए शायद, क्योंकि उनका मानना है कि उन्होंने जो अपने चैनल के माध्यम से दिखाया, वही अंतिम सत्य है।

खैर, ये पहली बार नहीं है, जब आजतक ने फर्जीवाड़ा फैलाकर ऑडियंस का ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयास किया हो। इससे पहले भी कई ऐसे मौके आए, जब इंडिया टुडे की फैक्ट चेक टीम ‘एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम’ ने पत्रकारिता को शर्मसार किया।

इसलिए, आज हम आपके सामने इंडिया टुडे की पत्रकारिता की पोल खोलने के लिए उनकी 5 पुरानी ऐसी खबरें लेकर आए हैं। जब इस समूह ने अपने पाठक और दर्शक को सूचना देने के नाम पर या तो मजाक उड़ाया या फिर फेक न्यूज़ को खबर बताया।।

क्रिस गेल पर बने मीम पर किया फैक्ट चेक

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बीते समय जगहों के नामकरण के कारण चर्चा में रही थी। इस बीच कई सोशल मीडिया यूजर्स उनके ऊपर अलग-अलग मीम बनाकर शेयर कर रहे थे। जिनमें एक ये भी था कि योगी आदित्यनाथ ने क्रिस गेल का नाम कृष्ण गोयल कर दिया है और उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली है। हालाँकि, ये बात सुनकर कोई भी शख्स पहली बार में ही इसे मजाक बता सकता है। लेकिन आजतक की वॉर रूम में बैठी टीम ने इसपर बाकायदा अपना फैक्ट चेक किया और अपना पूरा जोर लगाकर प्रयास किया कि उनका दर्शक इसे एक संजीदा रिपोर्ट मानें।

एक और मीम पर बनाई खबर

क्रिस गेल पर बने मीम के अलावा इंडिया टुडे के वॉर रूम से एक और वायरल मीम को खबर बनाकर तैयार किया गया। ये मीम यूएस के पूर्व प्रेसिडेंट बराक ओबामा के ऊपर था। जिसमें वह नरेंद्र मोदी को दोबारा प्राइम मिनिस्टर बनने पर शपथ लेते हुए देखते दिखाए गए। अब हालाँकि इस मीम को देखकर भी साफ पता चल रहा था कि ये कुछ लोगों ने सिर्फ़ सोशल मीडिया पर मजे लेने के लिए किया है, जिसपर वारटरमार्क करके स्पष्ट भी किया गया है कि वो एक मीम है। लेकिन इंडिया टुडे को इससे क्या? उनके पास जब वॉर रूम है तो वो मीम को भी खबर बनाकर पेश करेंगे।

येदियुरप्पा और एनआरसी के ख़िलाफ़ फैलाई झूठी खबर

सीएए और एनआरसी मुद्दे पर बीते दिनों इंडिया टुडे ने मोदी सरकार के ख़िलाफ़ माहौल बनाने के लिए सीएम येदियुरप्पा के नाम का इस्तेमाल करके झूठ फैलाने की कोशिश की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कर्नाटक सीएम ने राज्य में एनआरसी लागू करने से मना कर दिया है। जबकि बाद में कर्नाटक मुख्यमंत्री ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा था कि वे राज्य में एनआसी और सीएए का स्वागत करते हैं। ऐसे में जब इंडिया टुडे को महसूस हुआ कि उन्होंने फर्जी खबर चला दी है और सीएम ने सामने से आकर इस बात का खंडन कर दिया है तो उन्होंने तुरंत अपनी खबर डिलीट कर दी।

इंडिया टुडे का ‘द लल्लनटॉप’ व्यंग्य का भी करता है फैक्ट चेक

इंडिया टुडे समूह का ‘द ललल्नटॉप’ डिजीटल प्लैटफॉर्म पर सक्रीय वेब पोर्टल है। ये पोर्टल दावा करता है कि ये अन्य संस्थानों से हटकर खबरें दिखाता है। अब ये कैसे करते हैं इसे समझिए, अभी बीते दिनों इन लोगों ने एक सटायर लिखने वाली वेबसाइटस पर लिखे व्यंग्य का फैक्ट चेक किया, फिर उसके प्रमाणिक होने का भी दावा किया। खबर को इस तरह से पेश किया गया कि बाद में यूजर्स उसे इंटरनेट पर तेजी से शेयर करने लगे। देखते ही देखते खबर इतनी फैल गई कि कई अन्य मीडिया संस्थान भी प्राथमिकता देकर उस खबर को कवर करने लगे। लेकिन जब असलियत खुली तो लल्लनटॉप के साथ इंडिया टुडे की काफी फजीहत हुई।

गोरखनाथ मंदिर पर भी फर्जी खबर

मोदी सरकार के कड़े विरोधी और इंडिया टुडे के मशहूर पत्रकार राहुल कंवल ने 26 दिसंबर 2018 को दावा किया था कि वो भारत की भद्दी सच्चाई उजागर करने वाले हैं। लेकिन बाद में सिर्फ़ ये बताया कि दलितों को भारत के कई मंदिरों में प्रवेश करने की इजाजत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इन मंदिरों की सूची में गोरखनाथ मंदिर भी है। जिसके महंत यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ हैं।

योगी आदित्यनाथ की छवि धूमिल करने के लिहाज से चलाए गए इस प्रोपगेंडा की धज्जियाँ तब उड़ी, जब भारी तादाद में दलित समुदाय के लोग खुलकर सामने आए और बताया कि उनका गोरखनाथ मंदिर में हमेशा स्वागत हुआ है। उन्हें कभी इस तरह का भेदभाव मंदिर में प्रवेश के दौरान महसूस नहीं हुआ।

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