पत्रकारों पर जानलेवा हमला: पत्रकार हितों को लेकर अपनी-अपनी ढफली बजाने वाले पत्रकार नेता इन हादसों पर चुप

लखनऊ के दो वरिष्‍ठ पत्रकारों पर ताबड़तोड़ जानलेवा हमला हो गया। ये दोनों बुरी तरह घायल हैं। लेकिन करीब एक हफ्ता हो जाने के बावजूद किसी भी हादसे के हमलावरों पर कोई भी कार्रवाई नहीं कर पायी है पुलिस। उधर हैरत की बात है कि पत्रकार हितों को लेकर अपनी-अपनी ढफली बजाने वाले पत्रकार नेता इन हादसों पर लगातार चुप्‍पी ही साधे बैठे हैं।

जी-न्‍यूज के नीरज मिश्र इस मामले पर बहुत खफा हैं। उनका कहना है कि लखनऊ के कई तथा कथित पत्रकारों के आँख से ही नही कान और न जाने कहाँ कहाँ से रास्ते बदल बदल कर आंसू निकल रहे है ।लेकिन लखनऊ के एक वीडियो जर्नलिस्ट पर जान लेवा हमला हुआ किसी ने उसकी सुध नही है । लेकिन एक हाई प्रोफाइल केस के लिए दो पन्ना कांख में दबाए फेसबुक और सोशल मीडिया पर आंसू बहते रहे । किसी की हत्या गलत है लेकिन पहले अपने घर मे तो देख लो ।

उधर शेख पंडित पत्रकारों और उनके नेताओं को लानत भेज रहे हैं कि वाह रे उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के संघठन,, पत्रकार मार खा रहे है और ये संघठन के पदाधिकारी मलाई खाने में लगे है, यहाँ प्रदेश में प्रेस क्लब भी हैं जिसके नाजायज़ कब्जेदार 38 साल से पत्रकारों के नाम पर लाखों रूपये महीने कमा रहे हैं, लगे राहों, मलाई भी खाओं, मॉल भी कमाओ, लेकिन जब कोई साथी पत्रकार मार खाये तो साथ तो आओ, मान्यता प्राप्त समिति के चुनाव के लिए तो घर घर जाओगे जब मुसीबत आएगी तो मुँह छिपाओगे, तुम भी मार खाये हों, हमने साथ निभाया था, देर रात हज़रतगंज में अपना पसीना बहाया था, खुद को बड़ा समझते हों बड़प्पन सिर्फ मॉल और मलाई में, कब पत्रकार के दुखों में साथ निभाओगे, सरकारी बंगलो से निकल कर हमारे घाव पर मरहम लगाओगे।

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साथी पत्रकार को कैंसर होता है देखने नही जाओगे, जब जान से जायेगा तो सिर्फ शोकसभा में फ़ोटो खिचवाओगे, यही हाल रहा तो अबकी चुनाव में लंगोट खुल जायेगी, चुनाव न लड़ पाओगे, दशहरा भी आने वाला हैं रावण बच न पायेगा, पत्रकारों के संघठन के नाम से सालों से कलम को बेचा है, पेंटहाउस में कैसे रह पाओगे, जलेगा राव ण का पुतला तुम भी जल जाओगे ।। कब तक इनसे उम्मीद करोगे, खुद को मज़लूम।बेसहारा मानोगे, अपनी ताक़त को पहचानों, खुद अपनी पहचान बनो, संघठित हो इस्तेमाल न हों, तुमको भीड़ दिखाकर इन नेताओं ने अपना मतलब निकाला है, अपनी पहचान खुद ही बना डालों वर्ना बिकते रहोगे और ये बेचते रहेंगे, इनका आशियाना भी होगा और सरकारी बंगला ठिकाना होगा, तुम किराया के फेरे में अपना झोपड़ा बचाते रहना।

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