पुण्य प्रसून ने एबीपी न्यूज को औपचारिक तौर पर जॉइन किया

देश के नंबर वन न्यूज चैनल ‘आजतक’ के प्राइम टाइम एंकर पुण्य प्रसून ने समूह के एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद से हाल ही में इस्तीफा देकर खुद को टीवी टुडे समूह से अलग कर लिया था। लेकिन बुधवार यानी आज उन्होंने शाम करीब 4 बजे एबीपी न्यूज को औपचारिक तौर पर जॉइन कर लिया है। बताया जा रहा है कि एबीपी समूह की पॉलिसी के तहत उन्हें एंकर का डेजिग्नेशन दिया गया है।

पुण्य प्रसून बाजपेयी हिंदी पत्रकारिता का एक ऐसा नाम है, जिन्होंने बाजारवादी पत्रकारिता के इस दौर में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वैसे प्रसून की खासियत है कि टेलिविजन पत्रकारिता में खासे लोकप्रिय होने के बाद भी जिस तरह से अभी भी वे पत्र-पत्रिकाओं में लिखते रहते हैं, वह उन्हें अलग श्रेणी में ला खड़ा करता है। ज्यादातर टेलिविजन पत्रकार प्रिंट मीडिया की ही देन हैं। एक बार टीवी में जाने के बाद ज्यादातर लोग टीवी के ही होकर रह गए, लेकिन पुण्य प्रसून बाजपेयी इसके उलट हैं। अभी देश में कुछ पत्रकार ऐसे हैं, जो जन सरोकार वाले मसलों पर खासे सजग रहते हैं और अपनी लेखनी के जरिए उन मसलों को उठाते हैं। प्रसून वैसे ही पत्रकार हैं।

पटना में पले-बढ़े पुण्य प्रसून ने स्नातक तक की पढ़ाई पटना से ही की। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में इंटरनेशनल रिलेशन में एम.ए. करने के लिए उन्होंने दाखिला जरूर लिया, लेकिन उन्होंने बीच में ही इसे छोड़ दिया।

पुण्य प्रसून बाजपेयी के पास प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्हें दो बार पत्रकारिता का प्रतिष्ठित अवॉर्ड ‘रामनाथ गोयनका अवॉर्ड’ से नवाजा जा चुका है। पहली बार 2005-06 में हिन्दी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उनके योगदान के लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया गया, जबकि दूसरी बार वर्ष 2007-08 में हिंदी प्रिंट पत्रकारिता के लिए गोयनका अवॉर्ड से नवाजा गया।

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने भारत के कई बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है। पुण्य प्रसून ने पत्रकारिता की शुरुआत ‘जनसत्ता’ से की थी। प्रभाष जोशी उनसे खूब लिखवाते थे। हालांकि पुण्य प्रसून ने ‘जनसत्ता’ में नौकरी नहीं की। इसके अलावा उन्होंने ‘संडे ऑब्जर्वर’ संडे मेल और ‘लोकमत’ में भी काम किया। ‘लोकमत’ में काम करना पत्रकारिता में पुण्य प्रसून की पहली नौकरी थी। ‘आजतक’ में उन्होंने तब काम करना शुरू किया था, जब एस.पी. सिंह इसके कर्ताधर्ता थे। एस.पी. सिंह के बाद भी लंबे समय तक प्रसून ‘आजतक’ में रहे। ‘आजतक’ में काम करने के दौरान ही प्रसून ऐसे पहले भारतीय टेलिविजन पत्रकार बन गए जिसमें पाक अधिकृत कश्मीर जाकर रिपोर्टिंग की हो। वे लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख मोहम्मद हाफिज सईद का साक्षात्कार लेने में भी कामयाब रहे और ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय पत्रकार बन गए। पुण्य प्रसून ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन का भी दो बार साक्षात्कार लिया।

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‘आजतक’ के बाद पुण्य प्रसून ‘एनडीटीवी इंडिया’ का हिस्सा लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। ‘एनडीटीवी’ में पुण्य प्रसून ने एक टॉक शो ‘कशमकश’ शुरू किया, जो बेहद लोकप्रिय हुआ। ‘एनडीटीवी’ में काम करने के दौरान उन्होंने कई बड़े मामलों का खुलासा किया। ‘एनडीटीवी’ के बाद पुण्य प्रसून एक बार फिर ‘आजतक’ में लौट आए। यहां वे रात दस बजे ‘दस्तक’ नाम के कार्यक्रम के साथ दूसरे कार्यक्रमों की भी एंकरिंग करते थे। ‘दस्तक’ नाम का यह कार्यक्रम भी बेहद लोकप्रिय हुआ। ‘आजतक’ में कुछ समय काम करने के बाद वे 2007-08 में लगभग 8 महीनों के लिए सहारा समय चैनल से जुडे गए। इसके बाद वे ‘जी न्यूज’ में चले गए और वहां 4 साल तक प्राइम टाइम एंकरिंग का जिम्मा संभाला। हालांकि पुण्य प्रसून के जीवन का संघर्ष यहीं नहीं थमा। ‘जी न्यूज’ में काम कुछ समय काम करने के बा वे एक बार फिर ‘आजतक’ में वापस लौट आए।

पुण्य प्रसून लाइव एंकरिंग की अपनी खास स्टाइल के चलते इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रसिद्ध हैं। दिसंबर 2001 में संसद भवन पर हुए आतंकी हमले की लगातार 5 घंटों तक लाइव एंकरिंग करने के लिए भी पुण्य प्रसून को खूब प्रसिद्धि मिली।

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने 6 किताबें भी लिखी हैं जिनमें ‘आदिवासियों पर टाडा’, ‘संसदः लोकतंत्र या नजरों का धोखा’, ‘राजनीति मेरी जान’, ‘डिजास्टरः मीडिया एंड पॉलिटिक्स’, ‘ब्रेकिंग न्यूज’, “एंकर रिपोर्टर” शामिल है।

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