न्यूजक्लिक विवाद पर नेविल सिंघम बोले: मैं जन्म से अमेरिकी नागरिक, चीनी फंडिंग के आरोप गलत

नेविल का खंडन चार पन्नों का है, जिसमें उन्होंने NYT के लेख को “भ्रामक और आक्षेप से भरा हिट लेख” कहा है। नेविल रॉय सिंघम कहते हैं कि उन्होंने थॉटवर्क्स इंक, एक आईटी कंपनी की स्थापना व नेतृत्व 25 वर्षों तक किया और 2017 में उसे बेच दिया। वे जन्म से पूरी तरह से अमेरिकी नागरिक हैं और रहेंगे और वर्तमान में शंघाई (चीन) में रहते हैं।

अमेरिकी करोड़पति नेविल रॉय सिंघम ने एक बयान में न्यूयॉर्क टाइम्स के लेख में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के साथ-साथ दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में उल्लिखित आरोपों का खंडन किया है।

नेविल का खंडन चार पन्नों का है, जिसमें उन्होंने NYT के लेख को “भ्रामक और आक्षेप से भरा हिट लेख” कहा है। नेविल रॉय सिंघम कहते हैं कि उन्होंने थॉटवर्क्स इंक, एक आईटी कंपनी की स्थापना व नेतृत्व 25 वर्षों तक किया और 2017 में उसे बेच दिया। वे जन्म से पूरी तरह से अमेरिकी नागरिक हैं और रहेंगे और वर्तमान में शंघाई (चीन) में रहते हैं।

आगे वे कहते हैं कि 5 अगस्त, 2023 को न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) ने उनपर (और अन्य लोगों पर) एक भ्रामक और आक्षेप-भरा लेख जारी किया, जिसने अन्य बातों के अलावा भारत में आग भड़का दी और भारतीय समाचार पोर्टल न्यूज़क्लिक को लेकर स्थिति को गम्भीर बना दिया। प्रकाशन के बारह दिन बाद 17 अगस्त को, दिल्ली पुलिस स्टेशन स्पेशल सेल ने गुप्त रूप से एक एफआईआर तैयार कर जारी की। मानहानि वाले आरोपों और तथ्यात्मक त्रुटियों से भरी इस एफआईआर के ज़रिये लगभग 100 पत्रकारों से पूछताछ की गई, व अंततः 3 अक्टूबर, 2023 को दो लोगों की गिरफ्तारी हुई।

वो कहते हैं कि गिरफ्तारी के बाद, एफआईआर सार्वजनिक डोमेन आयी, जो उनके और कई अन्य लोगों के लिए हानिकारक है। एफआईआर में इस्तेमाल की गई भाषा दृढ़ता से बताती है कि इसके दावे NYT लेख की गलत सूचना से प्रेरित थे। सिंघम के अनुसार भारत दुनिया के कई सर्वश्रेष्ठ पत्रकारों और लेखकों का घर है। इसमें एक जीवंत प्रेस और मीडिया परिदृश्य है। गिरफ़्तारियों और हिरासत की ख़बरों से उन्हें गहरा सदमा पहुंचा है।

नेविल अपने परिवार के बारे में बताते हैं कि उनके पिता आर्चीबाल्ड डब्ल्यू. सिंघम (1932-1991) गुटनिरपेक्ष आंदोलन के भागीदार और इतिहासकार थे, और श्रीलंका के निवासी थे। वे बताते हैं कि उनको भारत से काफी लगाव है क्योंकि यहां के लोगों के साथ उनका एक लम्बा रिश्ता रहा है, 1964 में पहली मुंबई यात्रा से लेकर भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग में बिताए वर्षों तक। वे बताते हैं कि उन्होंने  बैंगलोर, पुणे, चेन्नई, कोयंबटूर, दिल्ली और हैदराबाद सहित पूरे भारत में थॉटवर्क्स कार्यालय खोले और सहयोगियों की मदद से भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग को आगे बढ़ाया।

पर सवाल है कि न्यूज़क्लिक में निवेश किए गए धन की उत्पत्ति कैसे हुई?

न्यूज़क्लिक में निवेश करने वाले यूएस-बेस्ड संगठन, वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी के प्रबंधक जेसन फ़ेचर का पूरा बयान द हिंदू में प्रकाशित हुआ है। इसमें न्यूज़क्लिक में निवेश का पूरा विवरण शामिल है और भारत को भेजे गए धन के स्रोत के बारे में झूठे आरोपों को स्पष्ट तौर पर खारिज भी किया गया है।

जहां तक सिंघम के धन की उत्पत्ति और झूठे दावे कि उन्हें चीन और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी सहित किसी भी सरकार या राजनीतिक दल से धन प्राप्त हुआ है, वे कहते हैं कि 2017 में, थॉटवर्क्स को एक वैश्विक निजी इक्विटी फर्म एपैक्स पार्टनर्स को बेच दिया गया था और इस बिक्री से पर्याप्त आय प्राप्त हुई थी। इस धन का महत्वपूर्ण हिस्सा अमेरिकी चैरिटी को दान किया गया। बाकी निजी संपत्ति का बड़ा हिस्सा गैर-लाभकारी संस्थाओं और दुनिया के गरीबों के हितों को आगे बढ़ाने के लिए दान करने का फैसला किया गया।

नेविल दावा करते हैं कि व्यक्तिगत बचत, कंपनी की बिक्री से प्राप्त राजस्व और व्यक्तिगत निवेश से होने वाली आय के अलावा उनके पास धन के अन्य स्रोत नहीं हैं, और कभी भी किसी सरकार या राजनीतिक दल से धन नहीं मिला। वे हर साल अमेरिका में इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं और अपने वित्तीय मामलों के सभी पहलुओं की समीक्षा करने के लिए हमेशा दुनिया की शीर्ष लेखांकन व कर फर्मों को नियुक्त भी करते हैं।

वे कहते हैं कि एफआईआर में उन्हें चीनी टेलीकॉम कंपनियों शाओमी और वीवो से जोड़ने की बेतुकी कोशिश देखकर हैरानी हुई, क्योंकि उनका इन कंपनियों से कभी संपर्क नहीं रहा, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से फंडिंग नहीं मिली और न ही इन कंपनियों की ओर से काम किया।

और, किसी सरकार या राजनीतिक दल के लिए काम करने या उससे निर्देश लेने पर- सिंघम कहते हैं “जैसा कि एफआईआर में दावा किया गया और एनवाईटी लेख में बताया गया, मैं प्रचार विभाग या चीनी सरकार या चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के किसी भी प्रभाग के लिए काम नहीं करता, न ही उनसे निर्देश लेता हूं और न ही उनसे धन प्राप्त करता हूं।

दरअसल, मैं दुनिया की किसी भी सरकार या राजनीतिक दल से आदेश नहीं लेता। मैं चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य न हूं और न कभी रहा हूं। वास्तव में, चीनी नागरिक ही सदस्यता के लिए पात्र हैं, जो 1956 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 8वीं राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा अपनाए गए संविधान की एक आवश्यकता है।”

नेविल ने 60 से अधिक देशों का दौरा किया है जहां श्रमिक नेताओं और अन्य लोगों से मिलने का अवसर मिला है; इनमें सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों, विश्वविद्यालयों के नेता, सरकारी अधिकारियों व नेताओं, राजनीतिक नेताओं और सीईओ, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों आदि से मिलने का अवसर मिला। इस अनुभव ने दुनिया के सभी लोगों की देखभाल तथा क्रॉस-कंट्री एकजुटता और सहयोग के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को मजबूत किया।

चौथा, इस आरोप पर कि उन्होंने कोई कानून तोड़ा, नेविल अपने बयान में कहते हैं “मैं इस बात को भी अस्वीकार करता हूं कि मैं प्रतिबंधित संगठनों के साथ काम करके किसी भारतीय या अमेरिकी कानून का उल्लंघन करता हूं। ऐसे आरोपों का कोई सबूत नहीं है क्योंकि वे झूठ हैं।

तब पैसे दान करने के पीछे क्या सोच रही होगी? अपने पैसे दान करने के प्रति उनके विश्वास और दृष्टिकोण पर, उनका मानना है कि समाज का धन सामूहिक रूप से निर्मित होता है। इसलिये वे खुद को इस धन का “ट्रस्टी” मान यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि इससे दुनिया के गरीबों और मेहनतकश लोगों के हितों को फायदा हो।

सिंघम कहते हैं, “मेरी उम्र में और मेरे अत्यधिक विशेषाधिकार के मद्देनज़र, सबसे अच्छी बात जो मैं कर सकता हूं वह है अपने जीवनकाल में अपना अधिकांश पैसा दे दूं। मैंने उन संगठनों और उद्देश्यों को पैसा देने का फैसला किया जिनके काम को मैं आम तौर पर पसंद करता हूं, सम्मान करता हूं और प्रशंसा करता हूं। मेरे परोपकारी लक्ष्य का एक मुख्य तत्व विश्व गरीबी को व्यवस्थित और स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए समर्पित परियोजनाओं की सहायता करना है, जिसमें भूख एक आवश्यक भूमिका निभाती है।

चीन एक बड़ा देश है जो पूर्ण गरीबी को खत्म करने और ग्रामीण पुनरुद्धार पर ध्यान दे रहा है। यह खाद्य उत्पादों का एक बड़ा आयातक भी है। अपने संचित व्यावसायिक ज्ञान के कारण, मैंने यहां अपना समय वैश्विक दक्षिण सहकारी समितियों, विशेष रूप से अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में, बेहतर और उचित मूल्य प्राप्त करने, सहकारी समितियों की तकनीकी क्षमताओं को आगे बढ़ाने और वैज्ञानिक और कृषि आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने में सहायता करने के लिए समर्पित किया।”

इस दावे पर कि एक ओपन-सोर्स मानचित्र परियोजना ने भारत की क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने की कोशिश की, उनका साफ कहना है कि 2020 में उन्हें एक मुफ़्त और ओपन-सोर्स सॉफ़्टवेयर प्रोजेक्ट को प्रायोजित करने का अवसर प्रदान किया गया, जो किसी को भी अपने स्वयं के समान-क्षेत्र प्रक्षेपण मानचित्र (equal-area projection maps) बनाने की अनुमति देगा।

जबकि सैकड़ों अंतर्राष्ट्रीय सीमा विवाद चल रहे हैं, उदाहरण के लिए, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच, लक्ष्य हमेशा प्रत्येक देश के नागरिकों को ऐसे मानचित्र बनाने की अनुमति देना था, जो उसके अपने कानूनों के अनुरूप हों और उनकी संप्रभु काउंटियों (sovereign counties’ ) के राष्ट्रीय हितों को दर्शाते हों।

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