नोटबंदी की चोट से मीडिया घायल, ABP समूह दे रहा अपने कर्मचारियों को रिटायरमेंट

mediamediaeffectfromdemonetisationनोटबंदी नोटबंदी ने छोटे-मोटे उद्योग धंधे ही नही बल्कि मीडिया उद्योग को भी हिलाकर रख दिया है। देश के एक बड़े अख़बार समूह द टेलीग्राफ और आनंद बाजार पत्रिका ने पहली बार अपने विभाग प्रमुखों को कर्मचारियों की संख्या घटाने का निर्देश दिया है। वहीँ बंगाली दैनिक आनंद बाजार पत्रिका ने करीब छह पेज घटा दिया है। साथ ही एबीपी ग्रुप ने वेज बोर्ड के तहत काम करने वाले कर्मचारियों से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) की पेशकश भी किया है।

एक रिपोर्ट के अनुसार एबीपी समूह करीब 11 पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन करता है और उसने अपने कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति उम्र को भी 60 वर्ष से घटाकर 58 वर्ष कर दिया है। सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा घटाए जाने से करीब 45 लोगों की नौकरी प्रभावित हो सकती है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया एवं अन्य समाचार पत्र प्रकाशित करने वाली कंपनी बेनेट, कोलमन ऐंड कंपनी के प्रबंध निदेशक विनीत जैन का कहना है कि नोटबंदी का प्रभाव केवल लघु अवधि तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने लिखा है कि अर्थव्यवस्था में नोटबंदी का प्रभाव उपभोक्ता कंपनियों, खुदरा बिक्री, रियल एस्टेट और विज्ञापन समूहों के मुनाफे में कमी और वेतन में कटौती के रूप में दिखने के आसार हैं।

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नोटबंदी के बाद मीडिया के सभी क्षेत्रों- प्रिंट, टेलीविजन, रेडिया और आउटडोर- के विज्ञापन इनवेंटरी स्तर पर 15 से 20 फीसदी की कमी आई है। उनका कहना है कि नोटबंदी की घोषणा के तत्काल बाद के दिनों में मीडिया कंपनियों की आय में करीब 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जानकारों की माने तो राष्ट्रीय मीडिया दोबारा पटरी पर लौट चुका है लेकिन क्षेत्रीय मीडिया- टीवी चैनलों, रेडियो स्टेशनों और समाचार पत्रों- को काफी नुकसान हुआ है।

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