EPW ने सारा दोष प्रणंजय गुहा के सिर मढ़ा, अडानी की खबर हटाने पर साधी चुप्पी

इकोनमिक एंड पॉलिटिकल वीकली( EPW) पत्रिका से प्रंजॉय गुहा ठाकुरता के इस्तीफ़े का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पत्रिका का प्रकाशन करने वाले समीक्षा ट्रस्ट और प्रणंजय गुहा इस मुद्दे पर आमने- सामने हैं।  जहाँ ट्रस्ट पदाधिकारियों ने गुहा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अडानी की खबर के मामले में ट्रस्ट को भरोसे में नहीं लिया वहीं गुहा कुछ और बात कहते हैं।

गुहा कहते हैं कि ट्रस्ट की ओर से मामले की पूरी तस्वीर सामने रखने की जगह अधूरी बात कही जा रही। दरअसल इस्तीफ़े के बाद पत्रिका प्रबंधन की ओर से पहली बार आधिकारिक बयान जारी किया है। जिस पर गुहा ने भी अपनी तरफ़ से पक्ष रखा है।

संपादक गुहा से क्यों नाराज़ हुआ प्रबंधन 

दरअसल जब ख़िलाफ़ खबर छपने पर अडानी ने लीगल नोटिस जारी की तो संपादकीय विभाग ने संबंधित खबर के साथ नोटिस और उसका जवाब भी संलग्न कर प्रकाशित कर दिया। यह वही आर्टिकल था, जिसे अडानी हटवाना चाहते थे। वेबसाइट पर लीगल नोटिस और उसका जवाब प्रकाशित कर दिया गया।

जबकि चेयरमैन व ट्रस्ट प्रबंधन को इसकी जानकारी ही नहीं दी गई। लिहाज़ा ट्रस्टी इस पूरे वाकये से अनजान रहे। समीक्षा ट्रस्ट ने अपने ऑफिशियल स्टेटमेंट में इस बात पर भी नाराज़गी जताई कि अडानी ग्रुप की नोटिस पर जो जवाब दिया गया वह गुहा ने अपने स्तर से तैयार कराया। जबकि उसे समीक्षा ट्रस्ट का जनाब बता दिया गया।

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ऑफिशियल स्टेटमेंट में खबर हटाने पर ख़ामोशी

समीक्षा ट्रस्ट की ओर जो आधिकारिक बयान जारी किया है उसमें गुहा के इस्तीफ़े के कारण पर तो खूब चर्चा है मगर इस बात पर प्रकाश नहीं डाला गया कि अडानी के ख़िलाफ़ छपी संबंधित दो ख़बरों को हटाने के फ़ैसले पर ट्रस्ट की क्या राय रही। इन्हीं दो ख़बरों पर अडानी के वक़ील ने लीगल नोटिस जारी की थी

बैठक में लिया गया इस्तीफ़े का फ़ैसला

दरअसल दिल्ली में 18 जुलाई को समीक्षा ट्रस्ट की बैठक हुई। जिसमें अडानी की लीगल नोटिस और बग़ैर प्रबंधन को सूचना दिए नोटिस का जवाब ट्रस्ट के हवाले से दिए जाने के मसले पर चर्चा हुई। जिसमें इसे गंभीर मामला मानने के साथ ट्रस्ट के भरोसे से खिलवाड़ बताया गया। जिसके बाद जब दबाव डाला गया तो गुहा ने इस्तीफ़ा सौंप दिया। जिसे प्रबंधन ने स्वीकार कर लिया। इस बैठक में चेयरमैन दीपक नैय्यर , इतिहासकार रोमिला थापर, समाजशास्त्री दीपांकर गुप्ता, राजीव और अंबेडकर यूनिवर्सिटी के वीसी श्याम मोहन शामिल रहे।

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