गौरी लंकेश और शांतनु के बाद अब मुबंई के खोजी पत्रकारों पर ऐसे बरस रही है आफत

मुंबई में दो महीने पुराने एक साइबर क्राइम के मामले ने तब राजनीतिक मोड़ ले लिया, जब मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा महाराष्ट्र के कई पत्रकारों और सोशल एक्टिविस्ट को 20 से अधिक नोटिस भेजे गए। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि पत्रकारों को केवल गवाह के रूप में इसलिए बुलाया गया है, क्योंकि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कुछ फोटो और मैसेज को प्रसारित (शेयर) किया था। लेकिन पुलिस पर पत्रकार और एक्टिविस्ट आरोप लगा रहे हैं कि वह खासतौर से उन पत्रकारों को निशाना बना रही है जो अक्सर सरकार की आलोचना करते हैं।

क्या था मामला ? 

इसी साल जून में एक साइबर क्राइम का एक मामला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओएसडी निधि कामदार ने पुलिस में दर्ज करवाया था। कामदार का आरोप था कि उनके नाम से फेसबुक पर नकली प्रोफाइल बनायी गई। इस मामले में पुलिस ने 19 अगस्त को बारामती के रहने वाले एक व्यक्ति महादेव बालगुडे को गिरफ्तार किया था। निधि कामदार की शिकायत के अनुसार महादेव बालगुडे ने देव गायकवाड़ नाम की आईडी से एक फर्जी फेसबुक अकॉउंट बनाया था। यही नहीं उसने निधि कामदार के नाम से भी एक फेसबुक अकॉउंट बनाया।

बालगुडे ने कथित तौर पर इन दो नकली प्रोफाइल के कुछ बातचीत की, जहां कामदार के फर्जी अकॉउंट से पैसे के सौदों पर बात खुद मुख्यमंत्री के इशारों की जा रही थी। एक न्यूज़ वेबसाइट में छपी खबर के अनुसार निधि कामदार का कहना है कि इन नकली अकॉउंट के बीच हुई बातचीत में दावा किया था कि मैंने बैंक विवरण देने और खाते में पैसे जमा करने के लिए कहा था। गायकवाड़ के नाम पर बनाया गया यह फेसबुक प्रोफाइल ढाई से ज्यादा वर्षों के लिए एक्टिव भी रहा।

फर्जी अकॉउंट से बीजेपी की सरकारों के खिलाफ लिखे गए पोस्ट 

इस फेसबुक अकॉउंट से केंद्र और राज्य दोनों की भाजपा सरकार के खिलाफ लिखे कई पोस्ट शामिल हैं। इस अकॉउंट को 6,000 से अधिक फॉलो कर रहे थे और यह प्रोफाइल लोकप्रिय हो चुका था। लोगों ने इस प्रोफाइल के कई पोस्ट शेयर किये और सैकड़ों की संख्या में इन पोस्ट पर लाइक्स मिलते थे। यह पोस्ट विशेष रूप से राज्य की कृषि नीतियों के खिलाफ लिखे जाते थे।

कामदार इसलिए की फर्जी अकॉउंट के खिलाफ शिकायत दर्ज 

कामदार का कहना है कि वह फेसबुक पर बनी नकली प्रोफाइल से अवगत थी लेकिन कभी भी इसे उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि -राजनीतिक आलोचना आम है लेकिन उनके नाम से बने फर्जी अकॉउंट ने असभ्य संदेश भेजने शुरू कर दिए थे। यही नहीं इस अकॉउंट के कई फेसबुक मित्रों ने उन संदेशों को साझा करना शुरू कर किया। तो मुझे पुलिस को इसकी रिपोर्ट देनी पड़ी। भाजपा की यूथ-विंग की नेता रही कामदार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बेहद सक्रिय हैं और उनके फेसबुक प्रोफाइल में 9,000 से अधिक फॉलोवर भी हैं।

पुलिस ने इस धाराओं पर चलाया मुकदमा 

इस मामले की मूल शिकायत मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में दर्ज थी और बाद में इसे मुंबई पुलिस की अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दिया गया था। बालगुडे पर भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत धोखाधड़ी, प्रतिरूपण और एक महिला की विनम्रता को अपमानित करने के लिए दर्ज किया गया है। 30 अगस्त को अदालत ने जमानत पर बलगुडे को रिहा कर दिया।

क्या है पत्रकारों का आरोप 

इस मामले की जांच करते हुए पुलिस ने कई पत्रकारों को पत्र भेजा। पुलिस के पत्र में कहा गया है: “… साइबर पुलिस स्टेशन, अपराध शाखा, सीआईडी, मुंबई धारा 419, 420, 465, 468, 46 9, 471, 354 डी, 66 सी के साथ आईपीसी के तहत सीआर सं. 109/2017 के द्वारा पंजीकृत अपराध की जांच कर रही है। पत्र में लिखा है कि सूचना प्रौद्योगिकी कानून  66 डी, 67 के तहत इस मामले के संबंध में कुछ तथ्यों को जानने के लिए आपसे पूछताछ करनी है।

फेसबुक पर सरकार के खिलाफ लिखने के कारण बनाया जा रहा निशाना 

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नोटिस पाने वालों का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर इस मामले में निशाना बनाया जा रहा है क्यों की वह सरकारों के आलोचक रहे हैं। 30 साल के ब्रह्मा चट्टे मुंबई में ‘सकाळ’ अखबार के एक राजनीतिक पत्रकार है, जो कई सालों से राज्य में कृषि संकट पर सक्रिय रूप से रिपोर्ट कर रहे है, उन्हें पुलिस ने शुक्रवार को पूछताछ के लिए बुलाया।

पुलिस के समक्ष उपस्थित होने के दो दिन पहले उन्हें नोटिस दिया गया था। चट्टे का कहना है कि ”इस पूछताछ में मेरे काम या फडणवीस सरकार के खिलाफ लिखे मेरे किसी भी पोस्ट की बात नहीं की गई, उन्होंने मुझे पूछा कि क्या मैं इस व्यक्ति देव गायकवाड़ को जानता हूँ। और मुझे चार घंटों के लिए ग्रील्ड किया गया”।

कोल्हापुर जिले के हरवली गांव के 24 वर्षीय किसान श्रेनिक नारदे को भी इसी तरह का नोटिस मिला था। उनका कहना है कि “ई मेल द्वारा भेजे गए एक नोटिस के जरिये मुझे एक सप्ताह के भीतर पुलिस से मिलने के लिए कहा गया है। नोटिस में मुझे किसी भी मामले का उल्लेख नहीं किया था नर्डे एक सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और कृषि के मुद्दों पर भी सक्रिय रहते हैं।

वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के समर्थक है। नर्डे ने कहा कि वह फेसबुक पर देव गायकवाड़ के साथ दोस्त हैं लेकिन वह व्यक्तिगत रूप उसे नहीं जनता है। श्रेनिक नारदे कहते हैं कि “मैं फ्रेंड लिस्ट में लोगों को जोड़ता हूं और मेरे पास कई सौ दोस्त हैं लेकिन मैं यह कैसे बता सकता हूं कि कौन सा प्रोफ़ाइल असली है और वह नकली है? ”

हालांकि पूछताछ के लिए बुलाए गए लोगों में से कोई भी सीधे तौर पर एनसीपी या कांग्रेस से नहीं जुड़ा है। लेकिन उनकी सोशल मीडिया की गतिविधियों से पता चलता है कि उन्होंने यूपीए सरकार का समर्थन किया है। एक और व्यक्ति मानस पगार जो पुणे के एक स्वतंत्र पत्रकार है, ने दावा किया कि वह स्पष्ट रूप से उन्हें राजनीतिक मतभेदों और फेसबुक पर उनके  महत्वपूर्ण पोस्ट के कारण निशाना बनाया गया है।

वह कहते हैं कि ”मैं कई सालों से फेसबुक पर सक्रिय रहा हूं, वर्तमान सरकार के खिलाफ खुले तौर से बात कर रहा हूं। मुझे लगता है कि सरकार का विरोध करने वालों को धमकाने के लिए यह एक स्पष्ट रणनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1500 से अधिक अलग-अलग ऐसे प्रोफाइल हैं को पुलिस की निगरानी में हैं, यह जांचने के लिए कि इनसे सरकार विरोधी सामग्री पोस्ट की गई है या नहीं”।

सीएम के बचाव में आयी कामगार 

वहीँ निधि कामगार का कहना है कि ”इसे जानबूझकर राजनीतिक मोड़ दिया जा रहा। यह तो सीधा एक उत्पीड़न का मामला है। मैंने इसे एक व्यक्ति के खिलाफ दायर किया और पुलिस ने मेरी शिकायत पर काम किया। यदि कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के साथ कुछ संबंध हैं, तो मेरी पार्टी या मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को इसके लिए किस प्रकार दोषी ठहराया जा सकता है? ”

मुंबई पुलिस ने भी शुक्रवार को एक बयान जारी कर दावा किया गया है कि ”हमने कई लोगों को गवाह के रूप में ही बुलाया है। उनपर किसी भी अपराध में भाग लेने का आरोप लगाया गया है और हमने किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया”। इस बीच एक अलग घटना में कंजुरमर्ग के एक स्थानीय भाजपा नेता ने 15 सितंबर को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के एक कार्यकर्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए पुलिस से अपील की थी कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट कर रहा है।

जिसके बाद मनसे कार्यकर्ता महेन्द्र रावले को कांजुरमार्ग पुलिस थाने में बुलाया गया और पोस्ट हटाने का निर्देश दिया गया था। जिसे बाद में उन्होंने हटा दिया था। पुलिस ने पुष्टि की कि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था और उन्हें चेतावनी के साथ छोड़ दिया गया था।

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