अब ‘ऑनलाइन कंटेंट’ पर भी सरकार रखेगी नजर!

केंद्र सरकार ने अब ‘ऑनलाइन कंटेंट’ (न्यूज और व्यूज) पर नजर रखने की तैयारियां शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि सरकार ऑनलाइन कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए ऐसा कानून लाना चाहती है जिसका पालन करना जरूरी होगा। हाल ही में ‘न्यूज18राइजिंग इंडिया समिट’ कार्यक्रम के दौरान सूचना-प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने कुछ इसी ओर इशारा किया है।

स्मृति ईरानी की मानें तो सरकार एक नया विनियामक ढांचा तैयार करने की कवायद में है, जो ऑनलाइन कंटेंट पर नजर रख सकेगी। फिर चाहे वह सोशल मीडिया पर नजर आने वाले कंटेंट हों या फिर न्यूज वेबसाइट के कंटेंट। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कंटेंट के नियमन को स्पष्ट करने की जरूरत है और इस संबंध में सभी पक्षों से बात हो रही है।

वैसे तो अभी तक ऑनलाइन न्‍यूज चैनल्स और पोर्टल्‍स सूचना-प्रसारण मंत्रालय की पहुंच से दूर है, क्योंकि ऑनलाइन न्‍यूज चैनल्स और पोर्टल्‍स को लाइसेंस जारी करने का अधिकार मंत्रालय के पास अधिकार नहीं है। लिहाजा सरकार का अभी तक न्यूज पोर्टल के कंटेंट पर कोई दखल नहीं है, लेकिन स्मृति ईरानी की कही बातों पर गौर करें तो माना जा रहा है कि सरकार के हस्तक्षेप से उसके और मीडिया के बीच एक बार फिर तनातनी बढ़ने की संभावना है।

हालांकि इस कार्यक्रम के दौरान ईरानी ने यह शिकायत भी की है कि कुछ पत्रकार समाचार और विचार के बीच की लाइन क्रॉस कर जाते हैं। हालांकि उन्होंने माना कि डिजिटल और सोशल मीडिया का नियमन एक नाजुक मसला है और इसे बेहद संतुलित ढंग से हल किया जाना चाहिए।

‘फेक न्यूज’ की समस्या पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि फेक न्यूज केवल ऑनलाइन की समस्या नहीं है बल्कि यह टीवी और अखबारों में भी देखी जा सकती है। उन्होंने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया का हवाला देते हुए कहा कि जैसे यह सरकार से स्वतंत्र एक संगठन है जो स्व-नियमन के जरिए काम करता है, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन टेलिविजन माध्यम पर नियंत्रण रखता है, ऐसी ही किसी संस्था की जरूरत ऑनलाइन के लिए भी है।

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