कभी जो बनना चाहते थे राजदीप सरदेसाई जैसा ‘पत्रकार’, उन्होंने ही बताया क्यों मनमोहन सरकार ने दिया ‘पद्मश्री’: बताया- स्टिंग की सीडी दबाकर बचाई थी सरकार

आखिर वो क्यों राजदीप सरदेसाई के खिलाफ हैं। इसके लिए उन्होंने 16 साल पुरानी घटना को याद किया। बकौल अशोक श्रीवास्तव, तब कैश फॉर वोट कांड हुआ था, राजदीप सरदेसाई जिस चैनल के हेड थे अगर वो उस स्टिंग ऑपरेशन को प्रसारित कर देता तो शायद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार गिर जाती। अशोक श्रीवास्तव ने आगे बताया, “मनमोहन सिंह की सरकार को बचाने के लिए पैसों का जो लेनदेन हुआ था, उस पर एक स्टिंग ऑपरेशन हो गया था। राजदीप सरदेसाई उस स्टिंग ऑपरेशन को देखने के बाद एक संपादक के रूप में निर्णय लिया कि इसे टेलीकास्ट करने से पहले वो इसकी जाँच करेंगे। आपने जाँच के नाम पर कई महीनों तक उसे रोक कर रखा। मनमोहन सिंह की सरकार बन गई, उसके बाद राजदीप सरदेसाई को पद्मश्री सम्मान दिया जाता है।”

राजदीप सरदेसाई, पत्रकारदूरदर्शन न्यूज़ के एंकर अशोक श्रीवास्तव ने ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को लेकर बड़ा खुलासा किया है। ‘DO News’ पर वैभव सिंह के साथ पॉडकास्ट में अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि जब वो TV पत्रकार नहीं थे तब पहले राजदीप सरदेसाई के बहुत बड़े फैन हुआ करते थे और उनके जैसा बनने की सोचते थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से राजदीप सरदेसाई खबर पेश करते थे, उन्हें बहुत अच्छा लगता था। राजदीप सरदेसाई तब NDTV का हिस्सा हुआ करते थे।

हालाँकि, अब अशोक श्रीवास्तव खुल कर राजदीप सरदेसाई की आलोचना करते हैं। उन्होंने समझाया है कि आखिर वो क्यों राजदीप सरदेसाई के खिलाफ हैं। इसके लिए उन्होंने 16 साल पुरानी घटना को याद किया। बकौल अशोक श्रीवास्तव, तब कैश फॉर वोट कांड हुआ था, राजदीप सरदेसाई जिस चैनल के हेड थे अगर वो उस स्टिंग ऑपरेशन को प्रसारित कर देता तो शायद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार गिर जाती।

अशोक श्रीवास्तव ने आगे बताया, “मनमोहन सिंह की सरकार को बचाने के लिए पैसों का जो लेनदेन हुआ था, उस पर एक स्टिंग ऑपरेशन हो गया था। राजदीप सरदेसाई उस स्टिंग ऑपरेशन को देखने के बाद एक संपादक के रूप में निर्णय लिया कि इसे टेलीकास्ट करने से पहले वो इसकी जाँच करेंगे। आपने जाँच के नाम पर कई महीनों तक उसे रोक कर रखा। मनमोहन सिंह की सरकार बन गई, उसके बाद राजदीप सरदेसाई को पद्मश्री सम्मान दिया जाता है।”

अशोक श्रीवास्तव ने इस घटना का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या ये चीजें हमें बतातीं नहीं, इशारा नहीं करतीं कि क्या कुछ चल रहा है? बता दें कि राजदीप सरदेसाई को जनवरी 2008 में पद्मश्री दिए जाने की घोषणा हुई थी, तब वो ‘ग्लोबल ब्रॉडकास्ट न्यूज़’ (GBN) के एडिट-इन-चीफ थे। बता दें कि अमेरिका से परमाणु करार का विरोध करते हुए वामदलों ने UPA से समर्थन वापस ले लिया था, जिसके बाद सरकार को बहुमत साबित करना था। इसी दौरान भाजपा सांसदों को घूस की पेशकश की गई थी।

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