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यूपी का हुनर, दुनिया का बाजार: UP International Trade Show ने रचा कारोबार का नया रिकॉर्ड

4,400 MoU, करीब ₹6,500 करोड़ के समझौते और ₹15,500 करोड़ के संभावित कारोबार का दावा; 5.99 लाख लोगों की मौजूदगी ने बनाया मेगा ट्रेड शो।लोकल से ग्लोबल- मुख्यमंत्री के विजन को जमीन पर उतारने की कोशिश।।शिशिर सिंह: मंच के पीछे खड़ा वह चेहरा, जिसने विजन को आकार दिया।

4,400 MoU, करीब ₹6,500 करोड़ के समझौते और ₹15,500 करोड़ के संभावित कारोबार का दावा; 5.99 लाख लोगों की मौजूदगी ने बनाया मेगा ट्रेड शो।लोकल से ग्लोबल- मुख्यमंत्री के विजन को जमीन पर उतारने की कोशिश।।शिशिर सिंह: मंच के पीछे खड़ा वह चेहरा, जिसने विजन को आकार दिया।

उत्तर प्रदेश ने अपने उत्पादों, उद्यमियों, कारीगरों, MSME और निर्यातकों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में आयोजित चौथे UP International Trade Show (UPITS) 2026 के जरिए एक बार फिर अपनी कारोबारी क्षमता का बड़ा प्रदर्शन किया। 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित India Expo Centre & Mart में आयोजित पांच दिवसीय ट्रेड शो का समापन कारोबार, निवेश और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के लिहाज से कई महत्वपूर्ण आंकड़ों के साथ हुआ। UPITS 2026 में 4,400 MoU करीब ₹6,500 करोड़ के मूल्य के साथ हस्ताक्षरित हुए, जबकि संभावित कारोबार का अनुमान करीब ₹15,500 करोड़ लगाया गया। ट्रेड शो के दौरान 41,500 B2B बैठकें हुईं और कुल फुटफॉल लगभग 5.99 लाख रहा।
UP International Trade Show को केवल एक व्यापारिक प्रदर्शनी के रूप में देखना इसके व्यापक उद्देश्य को छोटा कर देना होगा। इसके पीछे उत्तर प्रदेश सरकार का वह विजन है जिसमें प्रदेश के स्थानीय उत्पाद, स्थानीय उद्यमी, कारीगर और MSME देश की सीमाओं से बाहर निकलकर वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बनाएं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ODOP जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जिलों की स्थानीय क्षमता को पहचान देने और उसे बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया है। UPITS उसी सोच का एक बड़ा मंच बनकर सामने आया—जहां गांव और जिले का उत्पाद अंतरराष्ट्रीय खरीदार के सामने था और छोटे उद्यमी के लिए बड़े कारोबारी नेटवर्क तक पहुंच का रास्ता खुला।इस आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण कहानी सिर्फ मंच पर दिखने वाले बड़े उद्योगों की नहीं, बल्कि उस पूरी टीम की भी है जिसने मुख्यमंत्री के इस विजन को जमीन पर उतारने के लिए महीनों तक लगातार काम किया।किसी बड़े आयोजन की चमक मंच, स्टॉल और उद्घाटन समारोह में दिखाई देती है, लेकिन उस चमक के पीछे कई ऐसे चेहरे होते हैं जिनकी मेहनत कैमरों में नजर नहीं आती।UPITS 2026 के नोडल अधिकारी और MSME विभाग के विशेष सचिव शिशिर सिंह, IAS, ऐसे ही अधिकारियों में शामिल रहे, जिन्होंने आयोजन को केवल सरकारी कार्यक्रम न रहने देकर उसे कारोबारी संपर्क और बाजार निर्माण के बड़े मंच में बदलने की दिशा में लगातार काम किया।मुख्यमंत्री के “लोकल से ग्लोबल” विजन को वास्तविक कारोबारी मंच में बदलने की जिम्मेदारी आसान नहीं थी। प्रदेश के 75 जिलों के उत्पादों को एक मंच पर लाना, MSME, ODOP, कृषि, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्नोलॉजी, EV, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, पर्यटन और दूसरे क्षेत्रों को जोड़ना तथा विदेशी खरीदारों के साथ व्यापारिक संपर्क स्थापित कराना—इसके लिए पर्दे के पीछे लगातार समन्वय की जरूरत थी।बताया जाता है कि आयोजन की तैयारियों और क्रियान्वयन के दौरान शिशिर सिंह और उनकी टीम ने लंबे समय तक लगातार बैठकों, समन्वय और व्यवस्थाओं की निगरानी की। सुबह की तैयारियों से लेकर देर रात तक चलने वाली व्यवस्थाओं तक उनकी सक्रियता आयोजन की पूरी प्रक्रिया में दिखाई दी।
एक अधिकारी की यह भूमिका उस अंतर को रेखांकित करती है जो विजन और उसके क्रियान्वयन के बीच होता है। मुख्यमंत्री का सपना था कि उत्तर प्रदेश का स्थानीय हुनर दुनिया के बाजार तक पहुंचे; शिशिर सिंह और उनकी टीम का काम उस सपने को प्रदर्शनी के स्टॉल, B2B मीटिंग, खरीदारों और कारोबारी समझौतों की वास्तविक व्यवस्था में बदलना था।
यही वजह है कि UPITS की सफलता की कहानी में मुख्यमंत्री के विजन के साथ-साथ उन अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत का उल्लेख भी जरूरी है, जिन्होंने इस विजन को जमीन पर उतारने में दिन-रात काम किया।
75 जिलों के उत्पाद, एक अंतरराष्ट्रीय मंचUPITS की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें उत्तर प्रदेश के बड़े औद्योगिक समूहों के साथ छोटे उद्यमियों, कारीगरों, निर्यातकों और जिला आधारित उत्पादों को भी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने अपनी पहचान बनाने का अवसर मिला।एक जिला, एक उत्पाद यानी ODOP को विशेष स्थान मिला। इसके साथ One District, One Cuisine—ODOC को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। यानी उत्तर प्रदेश ने केवल उत्पादों और उद्योगों को ही नहीं, बल्कि अपने जिलों की खान-पान और पारंपरिक खाद्य संस्कृति को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की कोशिश की।
आयोजकों के मुताबिक ODOC में प्रदेश के 75 जिलों के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिला। इससे ट्रेड शो केवल औद्योगिक प्रदर्शनी न रहकर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, संस्कृति, खान-पान, हस्तशिल्प और स्थानीय उद्यमिता का बड़ा मंच बन गया।छह देशों की भागीदारी, विदेशी खरीदारों का बड़ा नेटवर्क UPITS 2026 में ऑस्ट्रिया, जापान, रूस, सिंगापुर, बेलारूस और वियतनाम को पार्टनर कंट्री के रूप में शामिल किया गया। इन देशों के प्रतिनिधियों ने अपने उत्पाद, तकनीक और कारोबारी अवसरों को प्रदर्शित किया तथा उत्तर प्रदेश के उद्यमियों के साथ व्यापारिक संभावनाओं पर बातचीत की।FIEO के अनुसार, ट्रेड शो में भारतीय विक्रेताओं और निर्यातकों को 600 से अधिक विदेशी खरीदारों के साथ जोड़ने की व्यवस्था की गई थी। हजारों B2B बैठकों ने इस आयोजन को व्यापारिक नेटवर्किंग का महत्वपूर्ण मंच बनाया।
छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि बाजार तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधा संपर्क है। UPITS ने इसी अंतर को पाटने का प्रयास किया।
कृषि से EV तक, हर सेक्टर की मौजूदगीट्रेड शो में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लगभग हर प्रमुख क्षेत्र को जगह मिली। कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल, हैंडीक्राफ्ट, ऑटोमोबाइल और EV, इलेक्ट्रॉनिक्स, IT, रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य, पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, वित्तीय सेवाएं और उभरती तकनीक से जुड़े उत्पाद और कंपनियां यहां दिखाई दीं।कृषि क्षेत्र में प्रदेश के कृषि विभाग ने करीब 1,000 वर्गमीटर क्षेत्र में 61 स्टॉल लगाए। इनमें 20 से अधिक FPO, लगभग 40 कृषि इनपुट कंपनियां, कृषि मशीनरी, बीज, उर्वरक, प्लांट प्रोटेक्शन और कृषि तकनीक से जुड़े संस्थान शामिल रहे।
यह संकेत है कि कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उसेप्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, तकनीक और निर्यात से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।गाजियाबाद ने भी दिखाई अपनी विकास गाथा
हालांकि UPITS का आयोजन ग्रेटर नोएडा में हुआ, लेकिन गाजियाबाद ने भी इसमें अपनी विकास क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन किया। Ghaziabad Development Authority (GDA) ने अपने स्टॉल के जरिए शहर के मौजूदा और प्रस्तावित विकास कार्यों, शहरी विस्तार, कनेक्टिविटी, आवासीय विकास, खेल सुविधाओं, हरित क्षेत्र और शहरी सौंदर्यीकरण को प्रदर्शित किया।GDA के स्टॉल पर राजनगर एक्सटेंशन में प्रस्तावित इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम भी प्रमुख आकर्षणों में रहा।इससे यह संदेश सामने आया कि NCR का गाजियाबाद केवल दिल्ली के उपनगर के रूप में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और शहरी विकास के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है।
ट्रेड शो से आगे—’बिजनेस कनेक्ट’ का मंचUPITS की असली अहमियत सिर्फ प्रदर्शनी में दिखाई देने वाले स्टॉल और भीड़ में नहीं है। इसका बड़ा उद्देश्य उत्तर प्रदेश के उत्पादों को स्थानीय से राष्ट्रीय और राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है।2025 के पिछले संस्करण में 2,228 प्रदर्शकों के साथ करीब 5.07 लाख आगंतुक आए थे। आयोजकों के अनुसार उस संस्करण में 2,400 से अधिक MoU और करीब ₹11,200 करोड़ से अधिक की कारोबारी पूछताछ दर्ज हुई थी। 2026 में B2B बैठकों, MoU और संभावित कारोबार के आंकड़ों में वृद्धि दर्ज की गई।सबसे बड़ा सवाल—MoU से जमीन पर कितना कारोबार?
हालांकि 4,400 MoU और ₹15,500 करोड़ के संभावित कारोबार का आंकड़ा आयोजन के पैमाने को दर्शाता है, लेकिन किसी भी ट्रेड शो की वास्तविक सफलता का आकलन केवल आयोजन के दौरान हुए समझौतों से नहीं किया जा सकता।इन MoU में से कितने वास्तविक निवेश में बदलते हैं? कितने निर्यात ऑर्डर में तब्दील होते हैं? कितने रोजगार पैदा होते हैं? कितने MSME को स्थायी अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलता है?इन सवालों का जवाब आने वाले महीनों में मिलेगा।
यही UPITS की अगली चुनौती भी है—ग्रेटर नोएडा में बने कारोबारी संपर्कों को प्रदेश के जिलों की वास्तविक आर्थिक गतिविधि में बदलना
UP International Trade Show 2026 ने उत्तर प्रदेश के उस बदलते आर्थिक मॉडल की तस्वीर पेश की जिसमें ODOP का उत्पाद, ODOC का स्वाद, MSME की क्षमता, किसान का उत्पाद, कारीगर का हुनर और बड़े उद्योग की तकनीक—एक ही मंच पर वैश्विक बाजार के सामने मौजूद रहे।
4,400 MoU, करीब ₹6,500 करोड़ के समझौते, ₹15,500 करोड़ के संभावित कारोबार, 41,500 B2B बैठकें और करीब 5.99 लाख लोगों की मौजूदगी आयोजन के पैमाने को दर्शाती है।लेकिन इस कहानी में आंकड़ों के साथ उन लोगों की मेहनत भी दर्ज होनी चाहिए, जिन्होंने इसे संभव बनाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लोकल को ग्लोबल बाजार से जोड़ने के विजन को जमीन पर उतारने में MSME विभाग की टीम और नोडल अधिकारी शिशिर सिंह की लगातार सक्रियता इस आयोजन के प्रशासनिक पक्ष की महत्वपूर्ण कड़ी रही।
अब असली कसौटी यही होगी कि ग्रेटर नोएडा के इस मेगा शो से निकली कारोबारी संभावनाएं उत्तर प्रदेश के जिलों तक कितनी पहुंचती हैं और MoU की फाइलें वास्तविक उत्पादन, निवेश, निर्यात और रोजगार में कितनी बदलती हैं।
क्योंकि किसी ट्रेड शो की सबसे बड़ी सफलता उसके पांच दिनों की भीड़ नहीं होती—उसकी असली सफलता तब होती है, जब पांच दिन के बाद भी कारोबार चलता रहे, ऑर्डर मिलते रहें, कारखाने चलें, कारीगर का हुनर बिके और उत्तर प्रदेश का स्थानीय उत्पाद दुनिया के बाजार में स्थायी जगह बना ले।

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