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न्यायालय से राहत नहीं मिली तो आरोपी हुए भूमिगत, राम जानकी मंदिर प्रकरण में पुलिस का शिकंजा

न्यायालय के आदेश के मुताबिक थाना बाजारखाला में दर्ज मुकदमा संख्या 175/2025 में नीरज गुप्ता, प्रवीण गुप्ता, अमित गुप्ता तथा अन्य के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। अभियोजन के अनुसार मामले में मंदिर पर अधिकार जमाने के उद्देश्य से दस्तावेजों के संबंध में कथित हेरफेर, मंदिर में प्रवेश कर दानपात्र तोड़े जाने, रकम निकालने, सीसीटीवी तोड़े जाने तथा वादी को गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

मंदिर पर कब्जे और दानपात्र तोड़ने के आरोपों से घिरे अभियुक्तों पर शिकंजा, साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका पर अदालत ने नहीं दी राहत

त्रिनाथ कुमार शर्मा


लखनऊ के ऐशबाग स्थित राम जानकी मंदिर से जुड़े विवाद में न्यायालय ने आरोपी नीरज गुप्ता को अग्रिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, लखनऊ की अदालत ने 1 अक्टूबर 2026 को दिए आदेश में मामले की गंभीरता, आरोपित धाराओं और विवेचना के दौरान साक्ष्यों से छेड़छाड़ तथा गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका को देखते हुए अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र निरस्त कर दिया।
न्यायालय के आदेश के मुताबिक थाना बाजारखाला में दर्ज मुकदमा संख्या 175/2025 में नीरज गुप्ता, प्रवीण गुप्ता, अमित गुप्ता तथा अन्य के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। अभियोजन के अनुसार मामले में मंदिर पर अधिकार जमाने के उद्देश्य से दस्तावेजों के संबंध में कथित हेरफेर, मंदिर में प्रवेश कर दानपात्र तोड़े जाने, रकम निकालने, सीसीटीवी तोड़े जाने तथा वादी को गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
अदालत ने अपने आदेश में विशेष रूप से दर्ज किया कि नीरज गुप्ता एफआईआर में स्पष्ट रूप से नामित है। उसके विरुद्ध आरोप है कि सहअभियुक्तों के साथ मिलकर राम जानकी मंदिर पर अधिकार जमाने के उद्देश्य से दस्तावेजों पर वादी के हस्ताक्षर कराए गए। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपित धारा 338 बीएनएस आजीवन कारावास तक की सजा से दंडनीय है।


दानपात्र तोड़ने से लेकर दस्तावेजों के विवाद तक गंभीर आरोप

अभियोजन पक्ष के अनुसार 8 मई 2025 की रात मंदिर में दानपात्र तोड़कर उसमें रखी रकम निकालने और सीसीटीवी को क्षतिग्रस्त करने की घटना हुई। अगले दिन मंदिर पहुंचे परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि मंदिर की देखरेख और उससे जुड़े कार्यों का लाभ उठाकर मंदिर तथा उससे आने वाली धनराशि पर कब्जे की कोशिश की गई।
न्यायालय ने यह भी माना कि मामले में अभी आरोपपत्र दाखिल नहीं हुआ है और अन्य साक्ष्यों का संकलन शेष है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी को अग्रिम जमानत दी जाती है तो उसके द्वारा साक्ष्यों से छेड़छाड़ अथवा गवाहों को प्रभावित करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इन्हीं परिस्थितियों में नीरज गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
उधर, मंदिर पक्ष का आरोप है कि मामले में नामजद अन्य आरोपी भी पुलिस की कार्रवाई से बचने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस द्वारा संभावित ठिकानों पर दबिश दिए जाने की बात कही जा रही है। मंदिर पक्ष का यह भी आरोप है कि आरोपियों से जुड़े लोग मंदिर के आसपास दबाव और भय का माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं तथा मंदिर से जुड़े लोगों को धमकाया जा रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। मंदिर पक्ष का कहना है कि धार्मिक स्थल की व्यवस्था और संपत्तियों को लेकर चल रहे विवाद में अब न्यायालय के आदेश ने मामले की गंभीरता को सामने ला दिया है। मंदिर से जुड़े लोगों ने पुलिस से मांग की है कि फरार बताए जा रहे आरोपियों की तलाश तेज की जाए और मंदिर परिसर तथा वहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

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