Trending

पत्रकार से एक शानदार विधायक ……न्यूजरूम से विधानसभा तक: शलभ मणि त्रिपाठी

साल 1998 में उन्होंने पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। इसके साथ ही शुरू हुआ लगभग दो दशक लंबा करियर, जिसने उन्हें जिलों, कस्बों और राजनीतिक मैदानों तक पहुंचाया। इस दौरान उन्होंने देश को बदलते हुए बहुत करीब से देखा। चाहे स्थानीय मुद्दों की रिपोर्टिंग हो या राष्ट्रीय घटनाक्रम की कवरेज, उन्होंने आम लोगों की उम्मीदों और चिंताओं को समझने की एक अलग पहचान बनाई। उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ एक पेशा नहीं थी, बल्कि तेजी से बदलते भारत की हकीकत को समझने का एक माध्यम थी।

हर सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति की एक ऐसी यात्रा होती है, जो उसकी पहचान बन जाती है। शलभ मणि त्रिपाठी की यात्रा भी ऐसी ही है। यह सफर सत्ता के गलियारों से नहीं, बल्कि हिंदी पत्रकारिता के व्यस्त न्यूजरूम से शुरू हुआ था, जहां हर दिन डेडलाइन का दबाव होता था, खबरें तेजी से तैयार की जाती थीं और देश की नब्ज अक्सर सुर्खियां बनने से पहले ही महसूस कर ली जाती थी।

1 दिसंबर 1977 को उत्तर प्रदेश के देवरिया में जन्मे शलभ मणि त्रिपाठी एक मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े। उनके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। ऐसे माहौल में उनका पालन-पोषण हुआ, जहां शिक्षा, अनुशासन और सार्वजनिक सेवा को बहुत महत्व दिया जाता था। पढ़ाई में उनका विषय गणित था, लेकिन आगे चलकर कहानी कहने और लोगों तक उनकी बात पहुंचाने का हुनर ही उनकी असली पहचान बना।

साल 1998 में उन्होंने पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। इसके साथ ही शुरू हुआ लगभग दो दशक लंबा करियर, जिसने उन्हें जिलों, कस्बों और राजनीतिक मैदानों तक पहुंचाया। इस दौरान उन्होंने देश को बदलते हुए बहुत करीब से देखा। चाहे स्थानीय मुद्दों की रिपोर्टिंग हो या राष्ट्रीय घटनाक्रम की कवरेज, उन्होंने आम लोगों की उम्मीदों और चिंताओं को समझने की एक अलग पहचान बनाई। उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ एक पेशा नहीं थी, बल्कि तेजी से बदलते भारत की हकीकत को समझने का एक माध्यम थी।

दैनिक जागरण, अमर उजाला और कई टीवी न्यूज नेटवर्क जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उनका सफर आधुनिक भारत के कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक बदलावों का गवाह बना। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने सवाल पूछना, जवाबदेही तय करना और स्पष्ट तरीके से अपनी बात रखना सीखा। यही अनुभव आगे चलकर उनके सार्वजनिक जीवन की सोच और कार्यशैली का आधार बने। फिर उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया।

साल 2016 में राजनीति, प्रशासन और जननीतियों पर वर्षों तक रिपोर्टिंग करने के बाद शलभ मणि त्रिपाठी ने खुद राजनीति में उतरने का फैसला किया। यह ऐसा बदलाव था, जिसे बहुत कम लोग सफलतापूर्वक कर पाते हैं। सत्ता को बाहर से देखने और फिर खुद जिम्मेदारी संभालने के लिए अलग तरह के विश्वास और संकल्प की जरूरत होती है। लेकिन यह फैसला उन मुद्दों पर सीधे काम करने की उनकी इच्छा को दर्शाता था, जिन पर वह वर्षों तक रिपोर्टिंग करते रहे थे।

उनकी इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय साल 2022 में सामने आया, जब वे देवरिया से उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गए। कई लोगों के लिए यह उस लंबे करियर की उपलब्धि थी, जो जनता से जुड़ाव और जमीनी समझ पर आधारित था। वहीं शलभ मणि त्रिपाठी के लिए यह उन लोगों के प्रति एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत थी, जिनकी कहानियां वह कभी पत्रकार के रूप में दुनिया तक पहुंचाते थे।

उनकी कहानी को खास बनाती है सिर्फ उनके पद नहीं, बल्कि वह बदलाव जो उनकी यात्रा में दिखाई देता है। उन्होंने सार्वजनिक जीवन को अलग-अलग नजरियों से देखा है। एक तरफ वह पत्रकार रहे, जिन्होंने बदलावों को दर्ज किया और दूसरी तरफ विधायक बने, जो उन बदलावों का हिस्सा हैं।

आज जब शलभ मणि त्रिपाठी अपना जन्मदिन मना रहे हैं, तो उनका सफर यह याद दिलाता है कि करियर हमेशा सीधी रेखा में नहीं चलता। कई बार जीवन के एक अध्याय में सीखे गए कौशल ही अगले और बड़े उद्देश्य की नींव बनते हैं। न्यूजरूम की चर्चाओं से लेकर विधानसभा की बहसों तक, उनकी कहानी खुद को नए रूप में ढालने, लगातार प्रयास करते रहने और सार्वजनिक जीवन से गहरे जुड़ाव की कहानी है।

Loading...
loading...

Related Articles

Back to top button