पत्रकारों और कितना लात खाओगे?

 पत्रकारों और कितना लात खाओगे?

शाहजहांपुर में पत्रकार को जिंदा जला दिया गया. अपराधी खुले घूम रहे हैं. सपा नेता रामगोपाल यादव आरोपी माफिया मंत्री के बचाव में ही उतर आए हैं. कह रहे हैं कि सिर्फ एफआईआर दर्ज होने से कोई अपराधी नहीं हो जाता. सरकार पूरे सुकून में है और बेशर्मी से बयानबाजी कर रही है. पत्रकार जगेंद्र सिंह को जलाने का श्रेय यूपी के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्रीराममूर्ति सिंह वर्मा को है. मंत्री जी मीडिया को बयान दे रहे हैं, लेकिन पुलिस के लिए वे फरार हैं. वे मंत्री नहीं, दाउद इब्राहिम के बाप हैं. पुलिस मृतक के परिवार को धमका रही है कि समझौता करो. यह हाल तब है जब जगेंद्र सिंह ने उसी दिन सिटी मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना बयान दर्ज करा चुके थे. इसके बाद उनकी मौत हुई.
बस्ती में एक और पत्रकार पर हमला हुआ. वे लखनऊ के ट्रामा सेंटर में हैं. बस्ती अमर उजाला ब्यूरो के जिला प्रभारी धीरज पांडेय को पांच जून की रात बांसी के पूर्व विधायक लालजी यादव के गुर्गों ने सफारी गाड़ी से उनकी बाइक में पीछे से टक्कर मारी और फरार हो गए. अमर उजाला प्रबंधन, प्रशासन और पुलिस सब इस मामले को दबाने में लगे हुए हैं. कानपुर में भी एक पत्रकार पर हमला हुआ. पत्रकार दीपक मिश्रा को बदमाशों ने गोली मार कर जख्मी कर दिया. जुए का अड्डा पकड़वाने की वजह से दीपक को बदमाशों ने निशाना बनाया। यह सब समाजवादी शासन में सपा के गुंडों का कारनामा है. पत्रकारों और कितना लात खाओगे? मालिकों के दलाल संपादकों से लेकर माफिया तक आपको लतियाने में लगे हैं. रीढ़ की हड्डी मजबूत करो और इन अपराधियों की नाक में दम कर दो. चीखो, इतना तेज चीखो कि इनके कान फट जाएं. मजीठिया वेजबोर्ड पर कुंडली मारे बैठे संपादकों की कुर्सी पर लात मारो. मालिकों की कॉलर पकड़ो. तुम्हारा खून पीकर ये सब के सब अरबपति हैं. नेताओं की दलाली बंद करो और आत्मसम्मान से जीना सीखो. नेताओं से जवाब मांगो, वरना वे कुत्ते की तरह आपको हाकेंगे और अंतत: आपको जिंदा जला देंगे. हम खुद के जिंदा जलाए जाने का इंतजार नहीं कर सकते. इस देश में लोकतंत्र है या आईएस का कानून चलता है? उठो… जागो… वरना जनता को जगाने का नैतिक अधिकार आपको नहीं है।

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सतीश सिंह

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