पांच दिनो की हड़ताल का बहाना लेकर सहारा के वकील सिब्बल पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, नोएडा में मंगलवार शाम तक तनाव बरकरार

bhadas4journalist-logoएक तरफ कर्मचारियों को छह-छह महीने से तनख्वाह नहीं, दूसरी तरफ अथाह दौलत में खेलते मालिकान और ऊंची सैलरी से ऐशो आराम का जीवन जी रहे कंपनी के आला अधिकारियों का मीडिया तमाशा पांच दिनो की हड़ताल से अब लड़खड़ाने लगा है। कंपनी के सर्वेसर्वा दिल्ली के तिहाड़ जेल से अपना अंपायर चला रहे हैं। ऐसी विडंबनापूर्ण स्थिति शायद ही दुनिया भर में किसी भी मीडिया घराने की होगी। उधर, सहारा के वकील एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में सहारा में तालाबंदी का हवाला देते हुए हलफनामा दे दिया है। कोर्ट को बताया गया है कि मीडिया हाउस पर तालाबंदी पहले से है और इससे कर्मचारी गुस्से में हैं। संभवतः कोर्ट में कानूनी खेल खेलने के उद्देश्य से ऐसा कहा गया है। इससे ये भी अंदेशा लगाया जा रहा है कि प्रेसर बनाकर ये कही सेबी के देय से मुक्त होने और सुब्रत रॉय को मुक्त कराने का षड्यंत्र तो नहीं है। मंगलवार को दिल्ली में सहारा प्रबंधन और कर्मियों से वार्ता हुई है। सहमति पर मतैक्य नहीं हो सका है। नोएडा मुख्यालय में हड़ताल और लखनऊ, देहरादून, पटना, वाराणसी यूनिटों में मीडिया कर्मियों के बहिष्कार का अब साफ असर सहारा के मीडिया तंत्र पर गहराने लगा है। समूह इन दिनो गर्दिश के दौर से गुजर रहा है। अखबार के अलावा न्यूज चैनलों पर भी सिर्फ पुराने फीचर प्रसारित हो रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी 11 जुलाई से अपडेट होना बंद हो चुका है। कर्मचारियों को जो आधा-तीहा सैलरी दी भी जा रही है, समय से नहीं। इससे उनका गुस्सा अब आसमान पर है। वे आरपार की लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में हैं। गौरतलब है कि नोएडा मुख्यालय से अखबार के प्रमुख पेज अन्य यूनिटों में भेजे जाते हैं तो उनमें स्थानीय खबरों के पन्ने संलग्न कर पेपर प्रकाशित किया जाता रहा है। नोएडा में पूरी तरह प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक सेक्शन हड़ताल पर चले जाने से समूह की बाकी यूनिटों को प्रमुख पेज मिलने बंद हैं। वहां के मीडिया कर्मियों का कहना है कि जब नोएडा से पन्ने ही नहीं आ रहे तो वे अखबार कैसे बनाएं। इस तरह गत शनिवार से कानपुर अथवा पटना में जो मास्टर एडिशन प्रकाशित हुए भी हैं, वे पाठकों के किसी काम के न होने से इसका सहारा समूह के बाजार पर गंभीर असर पड़ा है। उसका पूरा मीडिया बाजार जैसे उजड़ता जा रहा है। सहारा वन मीडिया ऐंड एंटरटेनमेंट के शेयर दिन भर के कारोबार के दौरान 3 फीसदी टूटकर 71 रुपए पर बंद हुआ। इसके अतिरिक्त समूह हिंदी में पांच समाचार चैनलों का परिचालन करता था, जो सहारा समय ब्रैंड के तहत उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान की क्षेत्रीय खबरों का प्रसारण करते थे। इसके अतिरिक्त समूह आलमी समय नाम से उर्दू चैनल का भी परिचालन करता था। समूह की वेबसाइट के अनुसार उसके  प्रमुख हिंदी दैनिक राष्ट्रीय सहारा के 43 संस्करण थे और इसका प्रकाशन 7 केंद्रों से होता था। समूह रोजनामा राष्ट्रीय सहारा नाम से दैनिक उर्दू समाचार पत्र का भी प्रकाशन करता था, जिसके 15 संस्करण थे। उसका पूरा काम अस्तव्यस्त हो चुका है। उधर, सेबी मामले में सुब्रत रॉय का तिहाड़ में लंबे समय से कैद रह जाना भी समूह के विनाश का कारण बन चुका है। ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ के मुताबिक सहारा के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया है कि ग्रुप के टेलिविजन नेटवर्क व प्रेस बंद हो गए हैं और कर्मचारी समूह छोड़कर जा रहे हैं। सेबी को बकाया नहीं चुकाने के कारण रॉय पिछले साल मार्च से तिहाड़ जेल में बंद हैं। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।

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