अमर उजाला हल्दवानी में देखिए क्या खबर छपी

अमर उजाला, देहरादून से पुरुषोतम कुमार का कानपुर स्थानांतरण, होंगे कांपैक्ट के प्रभारीअमर उजाला हल्दवानी में देखिए किस तरह से खबर की हेडिंग के साथ खेल हो रहा है। वह भी पहले पेज पर। लगता है कि हल्दवानी अब उन लोगों के हाथ में है जिनमें न तो कंटेंट की समझ है न तथ्यों और खबर की। इसलिए हल्दवानी पर नजर रखने की जरूर है नहीं तो वह भी एक दिन अमर उजाला डाट काम की तरह हो जाएगा जहां के कंटेंट पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अमर उजाला अपने कंटेंट के लिए ही जाना जाता था पर इन दिनों वह काफी सुर्खियों में है कि उसका कंटेंट न केवल निम्न स्तर का होता जा रहा है बल्कि इससे अखबार की साख भी प्रभावित हो रही है।

Gunjan Sinha ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा है कि
सेवा में प्रधान सम्पादक, अमर उजाला डॉट काम –
आपने अपने डॉट कॉम में छापा है, “देखिये कितने तरह के होते हैं क्लीवेज!” ये तो वात्स्यायन ने अपने काम सूत्र में भी नहीं लिखा है .. इस अद्भुत जानकारी को जन जन तक, देश के तमाम नन्हें बच्चों तक पहुंचाने के लिए शुक्रिया! सूचना एवं प्रसारण मंत्री, भारतीय प्रेस परिषद् सबको चाहिए कि मिल कर आपको इसके लिए सुधीर चौधरी की तरह ही सम्मानित करें, राजेन्द्र माथुर स्कूल में प्रारंभिक दीक्षा लेने के बावजूद आपने पत्रकारिता में मानसिक वेश्यावृत्ति को मजबूत किया है. इसके लिए धन्यवाद ! सीरिज को जारी रखते हुए ये भी दिखाएं कि एनस कितने तरह के, कितने डिजाइन के होते हैं.

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उधर, हल्दवानी में एड्स दिवस पर पहले पेज पर खबर छपी है कि कुमाउं के लोग अब कंट्रोल करने लगे हैं। एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है कि अब कुमाउं में एड्स के रोगी कम होते जा रहे हैं। इसी पर यह हेडिंग लगाई गई है। आपको क्या लगता है कि क्या यह खबर पहले पेज की है। क्या एड्स के रोगी केवल कंट्रोल से होते हैं या फिर अन्य कारणों से भी। फिर इस खबर को पहले पेज पर रखने की क्या जरूरत थी। यदि जरूरत थी तो उसे कुछ दूसरे तरह से पेश किया जा सकता था। कुमाउं से ही फोन करके एक सज्जन ने कहा कि देखिए भाई साहब कुमाउं के लोगों के बारे में क्या क्या छापा जा रहा है। क्या हम लोग इससे पहले बेकाबू थे। ये पूरे कुमाउं के लिए शर्मनाक है। इससे कुमाउं के लोगों के बारे में दूसरे प्रदेशों के लोगों ने क्या सोचा होगा। जरा इस ओर संपादक और मालिक का ध्यान दिलाइए। खैर जो भी हो हमारी टीम भी इस हेडिंग से इत्तेफाक नहीं रखती उसका भी मानना है कि संपादक को इस खबर की तरफ ध्यान देना चाहिए था क्योंकि पहले पेज की खबर उसे भी तो पता होती ही है। जिसने खबर लिखी उसे भी हेडिंग लगाने से पहले सोचना चाहिए था।

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