करण थापर ने इंडिया टुडे को कहा बाय बाय…………

अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘इंडिया टुडे’ से एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल जाने-माने टीवी एंकर करण थापर अब इंडिया टुडे का हिस्सा नहीं रहे। 14 अप्रैल को उन्होंने टीवी टुडे नेटवर्क के लिए अपना आखिरी प्रोग्राम किया। इंडिया टुडे टेलिविजन में, थापर सोमवार से शुक्रवार तक शाम 7:30 बजे प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘टू द प्वाइंट’ को होस्ट करते थे।

थापर इससे पहले ‘सीएनएन-आईबीएन’ (अब सीएनएन-न्यूज18) में थे, लेकिन रिलायंस द्वारा नेटवर्क18 के औपचारिक अधिग्रहण के बाद, उन्होंने सीएनएन-आईबीएन के साथ अपने लंबे सम्बन्ध विराम दे दिया। अप्रैल 2014 में, थापर ने ‘सीएनएन-आईबीएन’ छोड़कर ‘इंडिया टुडे’ में आए थे।

करण थापर भारत के पूर्व सेनाध्यक्ष प्राण नाथ थापर के सबसे छोटे बेटे हैं। उन्होंने पत्रकारिता करियर की शुरुआत नाइजीरिया में ‘द टाइम्स’ के साथ की थी। उन्होंने 1981 तक उनके मुख्य लेखक के तौर पर भारतीय उपमहाद्वीप में काम किया। हालांकि प्रिंट मीडिया में वे लंबी पारी नहीं खेल पाए और 1982 में वे लंदन वीकेंड (London Weekend Television) के साथ जुड़ गए। ब्रिटेन में 10 साल बिताने के बाद, थापर भारत आ गए, जिसके बाद उन्होंने द हिंदुस्तान टाइम्स टेलिविजन ग्रुप, होम टीवी (Home TV) और यूनाइटेड टेलिविजन (UTV) के साथ काम किया और बाद में अगस्त 2001 में इंफोटेनमेंट टेलिविजन नाम से अपना प्रोडक्शन हाउस खोला।

इस प्रोडक्शन कंपनी में बीबीसी के लिए ‘हार्डटॉक इंडिया’ (Hardtalk India) और ‘फेस टू फेस’ (Face to Face) जैसे प्रतिष्ठित शो का निर्माण किया, जिनमें से बहुत से एपिसोड को थापर ने जामिया के मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर में शूट किया, लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा ख्याति मिली राम जेठमलानी और नरेंद्र मोदी जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों के इंटरव्यू से। 2008 में ‘डेविल्स एडवोकेट’ कार्यक्रम में राम जेठमलानी का इंटरव्यू लेने के लिए उन्हें बेस्ट सामयिकी प्रस्तुतकर्ता का अवॉर्ड भी मिला।

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थापर ने देहरादून में ‘दून स्कूल’ से अपनी शुरुआती पढ़ाई की। वे प्रतिष्ठित ऑक्सब्रिज क्लब के पूर्व छात्र भी रह चुके हैं। कैंब्रिज यूनियन के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद, उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।

पत्रकारिता जगत में उन्हें 35 साल से भी ज्यादा का अनुभव है और इस बीच उन्होंने कई अवॉर्ड्स भी जीते हैं। साल 2009 में करण थापर को पत्रकारिता में रामनाथ गोयनका एक्सिलेंस अवॉर्ड के लिए चुना गया।

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