मोदी सरकार फाइल अखबारों के विज्ञापन कराएगी बंद

नई दिल्ली। अखबारों में ‘‘ऑपरेशन क्लीन’ अभियान के तहत केंद्र सरकार पहली जून से उन अखबारों का विज्ञापन बंद करने जा रही है, जिन्होंने अपनी प्रसार संख्या 40 से 75 हजार दिखाई है और एबीसी या आरएनआई प्रमाण पत्र जमा नहीं कराया है। इससे पहले डीएवीपी से केवल विज्ञापन पाने के लिए अखबार छपवाने वाले करीब साढ़े आठ सौ प्रकाशनों का इम्पैनलमेंट खत्म कर दिया गया था। ये अखबार विज्ञापन पाने के लिए सिर्फ फाइल कॉपी छाप रहे थे। जांच में पता चला था कि एक-एक प्रिंटिंग प्रेस से 70-70 अखबार छापे जा रहे हैं।

केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के विज्ञापन पाने के लिए झोलाछाप लोग प्रिंटिंग प्रेस, डीएवीपी और राज्यों के सूचना निदेशालयों के साथ मिलकर केवल आधिकारिक कापी छापते हैं और उन्हें दिखाकर विज्ञापन ले लेते हैं। डीएवीपी नियमों के अनुसार हरेक प्रकाशन को हर महीने अपने अंकों को जमा कराना होता है। छोटे अखबारों को सीए सर्टिफिकेट देने की छूट है। प्रकाशक डीएवीपी में जमा करने लायक ही अखबार छापते हैं और बाजार में उनकी उपस्थिति नहीं है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू के निर्देश पर आरएनआई और डीएवीपी के अधिकारियों ने कुछ प्रिंटिंग प्रेस और अखबारों के कार्यालयों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान चार दिल्ली की और चार लखनऊ की प्रिंटिंग प्रेसों से 70-70 अखबार छापे जा रहे थे।विज्ञापन घोटाला रोकने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने नई विज्ञापन नीति जारी की थी। इस नीति में 40 हजार तक के सकरुलेशन वाले अखबार को सीए सर्टिफिकेट देने की छूट जारी रखी गयी थी और उससे ऊपर के सकरुलेशन के लिए एबीसी या आरएनआई प्रमाण पत्र देना अनिवार्य कर दिया गया था।

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75 हजार से अधिक की सकरुलेशन वाले आखबारों के लिए अभी भी एबीसी या आरएनआई प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है। उसी नीति के तहत अब डीएवीपी ने 40 हजार से 75 हजार तक की सकरुलेशन वाले अखबारों को रिमाइंडर भेजा है कि यदि उन्होंने 31 मई तक आरएनआई या एबीसी प्रमाण जमा नहीं कराया तो पहली जून से उन्हें सरकारी विज्ञापन जारी नहीं किये जाएंगे। दरअसल सीए प्रमाण पत्र लेने बेहद आसान है। आसानी के कारण ही कुछ अखबार मनमाफिक सकरुलेशन का प्रमाण पत्र बनवा लेते हैं।

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