आर टी ओ कार्यालय में पत्रकार पर जानलेवा हमला

चंबल के डकैतों से भी ज्यादा लूटते हैं, हमारी खबर लिखोगे तो मार खाओगे, जान से भी जाओगे

जब भी डकैत शब्द का जिक्र होता है, तो हम सभी के जेहन में चम्बल घाटी के अंधेरे बीहड़ों की तस्वीर आ जाती है जहां से डकैती, अपहरण और हत्याओं का ‘कारोबार’ हुआ करता था। लेकिन उन डकैतों का अपना ईमान धर्म था, स्थानीय लोग दयावान मानते थे, वो गरीबों की सेवा करते थे और अमीरों को लूट कर धन गरीबों में बांट दिया करता था। लेकिन आज तो हर जिले में आर टी ओ कार्यालय में कार्यरत कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों ने अपने कारनामों से इतना आतंक फैला दिया की केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को भी कहना पड़ा “आरटीओ सबसे भ्रष्ट संस्था हैं। लूट के मामले में उन्होंने चंबल के डाकुओं को भी पीछे छोड़ दिया है। आरटीओ की कार्यप्रणाली से मुझे गुनहगार होने का अनुभव हो रहा है. भारत में कहीं भी ड्राइविंग लाइसेंस आसानी से हासिल नहीं किया जा सकता.”
ये वक्तव्य 2015 का है लेकिन मंत्रीजी आज भी ये संघठित गिरोह अपना काम कर रहा है और हर काम के लिए इन कर्मचारियों के दलाल को कई गुना राशि दिए बिना काम नहीं हो सकता।
मोदी जी आपका स्वच्छ भारत का सपना कैसा पूरा होगा जब तक इन भ्रष्ट कर्मचारियों की सफाई नही होगी India Clean कैसा होगा, योगी जी आपके राज में आर टी ओ कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी जब पत्रकार पर हमला करते हैं और आपके सम्मुख दिनांक 14.09.2017 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पुलिस कप्तान 2 घंटे में उनको गिरफ्तार करने का वादा करते हैं लेकिन कार्यवाही के नाम पर सिर्फ दिखावा करते हैं और हर 2 घंटे बाद गिरफ़्तारी का दम हवा में फैलाते हैं और उन हवाओं से मासूम, मज़लूम कलमकारों को oxygen देते रहते हैं जिससे हमारी सांस तो चलती हैं लेकिन दम घुटता जा रहा है । पुलिस कप्तान साहेब आपकी oxygen से हमारी सांस तो चल सकती हैं लेकिन कार्यवाही न होने से चम्बल के बीहड़ों में जान जोखिम पर रखकर, खबर लिखने का साहस अब कोई नही कर पायेगा और डकैतों का ये संघठित गिरोह गरीब जनता को लूट कर अपना घर आँगन ही चमकाएगा, India को क्या clean करेगा, भ्रष्टाचार और कलमकार के खून से इसके हाथ भरे होंगे, योगी जी के सपने के उत्तर प्रदेश को स्वच्छ नहीं करेगा ये तो सिर्फ भ्रष्टाचार करेगा। पुलिसिया कार्यवाही न होना भी इनके भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना ही है, ऐसे में कलमकार क्या करेगा, अभियुक्तों की गिरफ़्तारी न होने की दशा में अपनी मायूसी, बेबसी, लाचारी और प्रदेश की राजधानी के पुलिस के लचर रवैय्या पर गांधी प्रतिमा, हज़रतगंज चौराहे पर, कुछ पल प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शित करेगा।। ये प्रदर्शन नही और न ही ये कोई धरना होगा, ये किसी एक पत्रकार की लाचारगी, बेचारगी, मायूसी, ख़ामोशी नही है बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति का विश्वास हैं जिसे लगता है कि कलमकार समाज में फैले भ्रष्टाचार को ख़त्म करने में कारगर होता है, हर वो संघठन जो ऐसे सिस्टम से लड़ कर, समाज में न्यायहित के लिए कार्यरत हों,,समाचार पत्र से जुड़ा हर वो व्यक्ति जिसे समाचार पत्र में कार्य करने पर गर्व होता हों, समाचार पत्र, पत्रकारों के हर उस संघठन के स्वाभिमान की बात होगी जो समाचारपत्र, पत्रकारों के हितों के लिए संघर्षरत होगा, डकैत अगर संघठित हो रहे हैं, सच को दबाने की पुरजोर कोशिश में लगे है, क्या हम और आप प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस द्वारा कलमकार पर हुए जानलेवा हमले पर गांधी प्रतिमा, हज़रतगंज पर कुछ पल उजाला देख सकते हैं,, तो ज़रूर अपनी राय दीजिये।।
वक़्त और तारिख हमारे सभी संघठन सुनिश्चित करें।। हम तैयार हैं ।।

मोहम्मद कामरान
पत्रकार,, 9335907080 
नोट ;; दिनांक 17.09.2017 को विकासदीप पर आयोजित बैठक में अनेक पत्रकारों के सम्मुख पुलिस कप्तान द्वारा मोबाइल पर वार्ता में अभियुक्तों को 24 घंटे में गिरफ़्तारी की बात पुनः दुहरायी है।

,,,,हम तैयार हैं ।। सत्यमेव जयते !!
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