साम्प्रदायिकता और आजम

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राजनीतिक परिदृश्य से देखें तो उत्तर प्रदेश हमेशा देश की राजनीति के लिए सबसे मुफीद और सबसे बड़ा प्रदेश रहा है। उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा प्रदेश होने का ही सिर्फ गौरव प्राप्त नहीं है बल्कि यह प्रदेश साम्प्रदायिक हिंसा के लिए भी अपनी सर्वोच्च छवि बनाए हुए है। पता नहीं यह साम्प्रदायिकता प्रदेश की जनता चाहती है या हमारे नेता। हां इतना जरूर है कि जब-जब प्रदेश ने सपा के हाथों प्रदेश की चाभी थमाई तब-तब इसे हिंदू-मुस्लिम दंगा या यूं कहें कि दो वर्गों में तलवार जरूर खिंच जाती है। याद है 1990 का वह दौर जब प्रदेश में हर तरफ अयोध्या मसले को लेकर माहौल गर्म था। यह मुद्दा भी दो सम्प्रदाय के बीच में था, लेकिन साम्प्रदायिक नहीं था। इसे साम्प्रदायिक बनाया मुलायम सिंह के सबसे खास आजम खां जी ने। एक तरफ जहां पूरा प्रदेश राममंदिर को लेकर जोश में था उसी समय आजम खांने एक बड़ा ही घटिया बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत मां डायन है। इनके शब्द थे और प्रदेश में तनाव चरम पर पहुंच गया। बहुत लोग मारे गए, बहुत लोग बेघर हुए, लेकिन आजम खांजहां थे वहीं रह गए। उस समय भी आजम खां मीडिया को दोषी बताते रहे और यह भी कहा कि मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा था, मीडिया ने मेरी बातों को तोड़-मरोड़ के पेश किया। कुछ ऐसी ही मुजफ्फरनगर दंगे की भी कहानी है। बात एक लड़की की छेड़छाड़ से शुरू हुई और ये छेड़छाड़ हत्या में तब्दील हुई, हत्या के आरोपियों को चश्मदीदों की शिनाख्त पर पकड़ा गया और मजबूरन पुलिस को उन आरोपियों को छोडऩा पड़ा। छोडऩा इसलिए पड़ा क्योंकि हमारे मंत्री साहब माननीय आजम खां जी ने उन्हें छोडऩे का आदेश दे दिया। यह वह आरोपी थे जिन पर एक नहीं तीन-तीन हत्याओं का आरोप था और यही वह तीन हत्याएं हैं जिन्होंने मुजफ्फरनगर में दंगे का रूप ले लिया। आजम खां साहब ने पुलिस अधिकारियों को फोन करके कहा कि उन्हें छोड़ दो और जो हो रहा है उसे होने दो यानि दंगा मत रोको। आजम खां साहब शायद इस बात को जानते थे कि दंगा होगा तभी तो सुरक्षा की तलाश में अल्पसंख्यक सपा के करीब आएंगे। ऐसा नहीं है कि आजम खां साहब पर हम या कोई और आरोप लगा रहा है। यह बातें एक चैनल द्वारा स्टिंग आपरेशन के दौरान सामने आईं। इस स्टिंग आपरेशन में पुलिस वालों को यह कहते सुना गया कि दंगा रोको मत जो हो रहा है उसे होने दो। पुलिस अधिकारी मंत्री साहब के फोन पर इस तरह के बात से अचंभित थे और अपने आपको बड़ी संशय में पा रहे थे कि आखिर वो क्या करें। ऐसा नहीं है कि प्रदेश की जनता को सपा से कोई नुकसान होता है हां इतना जरूर है कि ये जो साम्प्रदायिकता का जहर सपा के शासनकाल में उनके एकाध मंत्रियों की वजह से होता है वह न सिर्फ प्रदेश के लिए बल्कि खुद समाजवादी पार्टी के लिए भी खतरनाक है। मुजफ्फरनगर के दंगे ने आजम खां को फिर मेन स्ट्रीम में लाकर खड़ा कर दिया। मैंने कभी किसी मुसलमान को यह कहते नहीं सुना कि वह हिंदू है इसलिए वह मेरा दुश्मन है। यही नहीं किसी हिंदू को भी यह नहीं कहते सुना कि वह मुस्लिम है इसलिए वह मेरा दुश्मन है। लोगों को इस बात से कोई लेना-देना नहीं होता कि कौन हिंदू है और कौन मुस्लिम है। प्रदेश में राजनीतिक फायदे लेने के लिए आजम खां जैसे नेता हिंदू और मुस्लिम के बीच हमेशा खाई बनाने का काम करते हैं। सपा शासनकाल में जब-जब साम्प्रदायिक हिंसा हुई या यूं कहें कि प्रदेश में जब-जब समाजवादी पार्टी ने सरकार को अपने हाथ में लिया तब-तब प्रदेश को साम्प्रदायिक हिंसा ने अपनी चपेट में लिया। समझ नहीं आता कि यही मीडिया अखिलेश यादव या मुलायम सिंह यादव को साम्प्रदायिक हिंसा के लिए उतना जिम्मेदार नहीं ठहराती जितना उनके एक मंत्री माननीय आजम खां साहब को जिम्मेदार बताती है। कहते हैं न कि कहीं आग होती है तभी तो वहां धुआं निकलता है। अब भी समय है सपा को और सपा सुप्रीमो को चेत लेना चाहिए। उनको यह तय करना चाहिए कि उनके मंत्री ज्यादा कीमती हैं या प्रदेश और देश के लोग।

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