सरदाना ने जी न्यूज छोडने का बताया कारण, बोले- मैं ठहरा पानी बनकर खराब हो रहा था

दो महीने पहले जी न्यूज को छोड़ने वाले चर्चित एंकर रोहित सरदाना ने हाल में बताया कि उन्होंने क्यों आज तक चैनल ज्वाइन किया। सरदाना राष्ट्रवादी एंकर माने जाते हैं। खासकर हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर तीखी बहस करते हैं। कश्मीर पर अक्सर डिबेट सजाकर बैठ जाते हैं। इस पर मीडिया ही नहीं बल्कि बुद्धिजीवियों के एक तबके में उनकी जहां आलोचना होती है, वहीं दक्षिणपंथियों के बीच उनकी सराहना।

क्यों छोड़ना पड़ा जी न्यूज

रोहित सरदाना जी न्यूज मे ताल ठोंक के कार्यक्रम पेश करते थे. यह डिबेट आधारित प्रोग्राम था। अब वे आज तक में दंगल नाम से डिबेट करते हैं। एक समय सुधीर चौधरी के बाद रोहित सरदाना ही जी न्यूज के चेहरे थे। उनके जी न्यूज से इस्तीफे की खबर ने सबको चौंकाया था।

उन्होंने हाल में एक यूट्यूब चैनल से बातचीत करते हुए कहा है कि जी न्यूज छोड़ना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा रहा। ठहरा हुआ पानी एक जगह खराब हो जाता है, वे 13 साल से जी न्यूज में थे। इस नाते सामान्य प्रक्रिया के तहत उन्होंने आज तक ज्वाइन किया।

राष्ट्रवाद और हिंदुत्व संस्कृति पर सरदाना के बेबाक सवाल

सरदाना, ज़ी न्यूज़ के मालिक  सुभाष चंद्र के भी करीबी रहे जिन्होंने कम समय में उन्हें आउटपुट एडिटर तक के ओहदे तक प्रमोट किया। ज़ी न्यूज़ में सरदाना के शाम के डिबेट शो ‘ताल ठोंक के’ की टीआरपी इतनी तेज़ी से आगे बढ़ी कि उसने सारे न्यूज़ चैनलों के कंटेंट और प्रोग्रामिंग को प्रभावित किया। राष्ट्रवाद और हिंदुत्व संस्कृति पर सरदाना के बेबाक सवाल और जेहादी इस्लाम को चुनौती देने वाले उनकी बहस ने ज़ी न्यूज़ की रेटिंग्स को नया आसमान दिया। उनका शो हर शाम से ही ज़ी न्यूज़ की रेटिंग उठाने लगा और प्राइम टाइम आने तक अक्सर ज़ी न्यूज़  देश में सबसे ज्यादा देखने वाला चैनल बनने लगा. एक तरह से सरदाना के भगवा करिश्मे ने टीवी के शाम के स्लॉट  को नई तरीके से परिभाषित कर दिया।

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सरदाना के समर्थन में उमड़ा था जनसैलाब

रोहित सरदाना ने एस दुर्गा नामक फिल्म को अभिव्यक्ति की आजादी का दुरुपयोग मानते हुए एक जवाबी ट्वीट कर दिया था। जिसके बाद कट्टरपंथियों की ओर से लगातार धमकियां दी जाने लगीं। विदेशों से भी धमकी भरे फोन आने लगे। कई बार शिकायत के बावजूद पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं  हुई।

जब कट्टरपंथियों के आगे सिस्टम दबाव में आता दिखा तो राष्ट्रवादी पत्रकार रोहित सरदाना के चाहने वाले सड़क पर उतरने का फैसला कर लिए। उन्होने बंपर मार्च कर साबित कर दिया कि रोहित सरदाना अकेले नहीं हैं।

बता दें कि रोहित सरदाना ने विवादित ट्वीट माफी भी मांग ली थी बावजूद इसके उनको और उनके परिवार को लगातार धमकियां मिलीं और उनका सिर कलम करने पर इनाम की घोषणा भी की गई।

ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन यानि बीईए यानि टीवी चैनल्स के संपादकों की संस्था ने आजतक चैनल के एंकर रोहित सरदाना के समर्थन में एक बयान जारी कर उन्हें धमकाए जाने की निंदा की थी। फिर भी कट्टरपंथी उन्हें निशाना बना रहे थे। जिसके विरोध में यह मार्च हुआ था।

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