राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त पत्रकारों के नाम हेमंत तिवारी ने लिखा ख़त

प्रिय साथियों,

हम और आप, सभी पत्रकार साथियों के लिए यह दुष्काल है.

दो वर्ष पूर्व एकता को बनाये रखने के लिए मेरे हरसंभव प्रयासों के बावजूद विभाजन की स्थिति पैदा हो गयी जिसे मैं भी दुर्भाग्यपूर्ण मानता हूँ मगर अब वक्त का तकाजा है कि आरोप प्रत्यारोपों को दरकिनार कर पत्रकारों की एकजुटता जरूरी है.

हम मान्यता प्राप्त पत्रकार साथी डीएवीपी की नई नीतियों, यूपी सूचना विभाग की कार्यप्रणाली, मान्यता पर लटकी तलवार, बढ़ रहे हमलों सहित तमाम चुनौतियों के बीच एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं. ये परेशानियां, चुनौतियां तब और भी सख्त हो जाती हैं जब कभी एक छतरी के तले, एकजुट रहने वाले हम सभी राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त पत्रकार खांचों, खेमों और पसंद-नापसंद के नाम पर बंट जाते हैं. मित्रों आपके समर्थन, प्यार और सहयोग से मैंने मान्यता प्राप्त पत्रकारों की एकमात्र सशक्त प्रतिनिधि संस्था राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अविभाजित समूह का बतौर कोषाधयक्ष, सचिव व अध्यक्ष के रुप में प्रतिनिधित्व किया है.

साथियों यह समय अपनी उपलब्धियों का बखान करने या आत्मश्लाघा का कतई नही हैं. उपलब्धियां कितनी भी हों अपेक्षाओं से कमतर ही नजर आती हैं. शायद यही लोकतंत्र में नेतृत्व को हरदम कुछ बेहतर करते रहने के लिए मजबूर भी करती है. दुर्भाग्यपूर्ण है मगर सत्य है, शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सर छिपा लेने से खतरा नही टलता, हमारी कभी प्रदेश में ही नही बल्कि देश में सराही जाने वाली एकजुटता दो साल पहले षडयंत्रकारी ताकतों का शिकार होकर बिखरी. आज जब एक बार फिर से कभी हमारी एकता को तार-तार करने का सबब बने संवाददाता समिति के चुनाव की बातें जेरे बहस है तो मैं अपने और संवाददाता समिति के पदाधिकारियों  की समवेत राय से आपको अवगत कराते हुए आपका समर्थन,  निर्देशन व मार्ग दर्शन चाहता हूं.

मैं सहित पूरी संवाददाता समिति के पदाधिकारियों का यह मत है कि भूत को भूल वर्तमान की चुनौतियों को सामने रख सभी मान्यता प्राप्त संवाददाताओं के मान,सम्मान और बेहतरी के लिए हमें मेरा-तेरा की रट को दरकिनार करना होगा. मेरा-तेरा की इस लड़ाई में मैं खुद को सबसे अदना व महत्वहीन मानने को तैयार हूं. पर समय है कि हमारे मार्गदर्शक, सामाजिक,व्यवहारिक व पत्रकारिता के जीवन में हमारे पथ प्रदर्शक रहे वरिष्ठ जन आगे आएं. हमें राह दिखाएं, एकजुटता के रास्ते पर लाएं. मैं और समूची संवाददाता समिति के प्रतिनिधि आपके समक्ष वरिष्ठों की एक समिति बनाने का प्रस्ताव रखती है जो खांचों, खेमों में बंट गए साथियों को एक साथ बैठा कर समिति के चुनाव और पेश आ रही चुनौतियों से मुकाबले के लिए राह सुझाए. वरिष्ठों की यह समिति की कब, कहां, कैसे मान्यता प्राप्त संवाददाताओं के चुनाव हों यह तय करे और आगे की लड़ाई के लिए भी निर्देशित करे.

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इस समिति के लिए वरिष्ठ जनों के बीच से मैं, सहित सभी पदाधिकारी गण सर्वश्री ज्ञानेंद्र शर्मा, रतनमणि लाल, अजय कुमार, रामेश्वर पांडे, रामदत्त त्रिपाठी,प्रमोद गोस्वामी, सुरेश बहादुर सिंह, वीरेंद्र सक्सेना, कमाल खान, गोलेश स्वामी व प्रदीप कपूर का नाम प्रस्तावित करते हैं.

अंतिम फैसला आपके विवेक पर छोड़ता हूं.

                                                            आपका सदैव,

                                                                                                                    हेमंत तिवारी

                           .   अध्यक्ष

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