कौन होगा ज़िम्मेदार प्रेस क्लब पर लगने वाले ताले पर, बोटी बिरयानी की आड़ में जेब भरते महारथी क्या फसेंगे जाल में

मोहम्मद कामरान
सहाफी कलमकार नावेद शिकोह ने शराबी कबाबी पत्रकारों की तरफ से एक इल्तिज़ा सरकार से प्रेस क्लब की बहाली को लेकर की है,, प्रेस क्लब की बहाली अगर हो गयी तो बदहाली की कगार पर खड़े प्रेस क्लब मे क्या सिर्फ शराबी और कबाबी ही सदस्यता के हकदार होंगे ? क्या कलम चलाने वाले सहाफी को प्रेस क्लब में सदस्यता का कभी हक़ मिलेगा की नही, ये एक बड़ा सवाल है,, उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के जब जब चुनाव होते है प्रेस क्लब की सदस्यता के वादे होते है,, समिति के अध्यक्ष जो भी रहे रहें हों उन्होंने मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकारों से प्रेस क्लब की सदस्यता दिलाने का वादा भी किया और प्रयास भी किया लेकिन प्रेस क्लब के मठाधीशों के आगे जब LDA , Nagar Nigam के आला अधिकारियों की नही चलती तो इनकी भी बात हवा हवाई हो जाती है। प्रेस क्लब के पदाधिकारियों के रुतबे का आलम ये है कि जिस जगह प्रेस क्लब नाम की संस्था काबिज है उस जगह का पट्टा उत्तर प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन लखनऊ के नाम हुआ था लेकिन व्यावसायिक कार्य के लिए प्रेस क्लब नाम की संस्था काबिज़ होकर लाखों रुपये प्रति माह की करती है कमाई और ये बात लखनऊ विकास प्राधिकरण की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज है।
वर्ष 1989 में राज्यपाल महोदय ने रानी लक्ष्मी बाई मार्ग, लखनऊ स्थित चाइना बाजार गेट भवन/भूमि जिसका क्षेत्रफल 10890 वर्गफुट है का वर्तमान बाजार दर का अइकलित नजराना (प्रीमियम) रुपया 8,78,460/- (रुपया आठ लाख अठत्तर हजार चार सौ साठ केवल) तथा वार्षिक किराया रु21,961.50 पैसे (रुपया इक्कीस हजार नौ सौ इकसठ तथा पचास पैसे मात्र) लेकर दिनांक 18 जून, 1978 से अगले 30 वर्ष के लिये नया पट्टा उत्तर प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन लखनऊ के पक्ष में देने की सशर्त स्वीकृति उल्लेखित शर्तों सहित प्रदान की थी:
कृपया वांछित धनराशि का भुगतान यथाशीघ्र करने का कष्ट करें तथा रु1,35,955/- के जनरल स्टैम्प संयुक्त सचिव, उ. प्र. शासन, नजूल अनुभाग के नाम से क्रय करके था वाटर मार्क सहित पट्टे के निष्पादन हेतु जमा कर दें। भुगतान किये जाने वाले धन का विवरण निम्नवत है।:-
1. नजराना रु 8,78,450.00
2. वार्षिक लीज रेण्ट दिनांक 18 जून,78 से दिनांक 31.3.90 तक रु 2,58,829.00
3. पट्टा व्यय 2.00
कुल मूल्य रु 11,37,301.00

प्रेस क्लब के नाम पर व्यावसायिक गतिविधयों का संचालन एवं नॉन वेज प्रतिष्ठानों से प्रतिमाह वसूली कर अपनी जेबें भरने में जो लोग लगे थे उन्होंने सरकारी शुल्क का भुगतान तक नही किया और आज यही धनराशि 70,57,440.00 लाख पहुँच गयी है,, ऐसे में अगर उत्तर प्रदेश सरकार प्रेस क्लब की अनियंमित्ताओं को माफ कर भी दे तो लाखों रुपये की माहवार आमदनी किसके जेब मे जाती रही है, कौन भोगता रहा है सुख सुविधाए, मासाहारी भोजन, कलमकारों के नाम पर मिली इस सुविधा से कौन चंद लोग लाभान्वित हो रहे है, इसका खुलासा और उनपर कार्यवाही ज़रूरी है।
शराबी कबाबी को मिले सुविधा लेकिन हक़दारों को भी मिले सदस्यता, वरना प्रेस क्लब में तालाबंदी होने पर ज़िम्मेदार लोगों को न पत्रकार माफ करेंगे और न ही सहाफी नावेद की कलम से निकले शराबी कबाबी पत्रकार भाई और चियर्स के साथ इन्हीं अल्फ़ाज़ों में खो जाएगी दास्ताने प्रेस क्लब —

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दिल के फफूले जल उठे सीने के दाग़ से !
इस घर को आग लग गई घर के चराग़ से !!

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