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CBI-ED स्पेशल कोर्ट के जज ने 3 महीने में जुटाए ₹8cr, रियल एस्टेट कंपनियों से ली रिश्वत: घूस के बदले छोड़ी कुर्क की गई सैकड़ों करोड़ की संपत्तियाँ, चार्जशीट में खुलासा

यह मामला अप्रैल 2023 में सामने आया था। उस वक्त स्पेशल PMLA कोर्ट के न्यायाधीश सुधीर परमार, उनके भतीजे अजय परमार और रूप सिंह बंसल के खिलाफ तत्कालीन एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) ने पंचकूला में केस दर्ज कराई थी। एफआईआर में परमार पर एक केस में आरोपितों की मदद के बदले 5-7 करोड़ रुपए माँगने का आरोप लगा।

पूर्व जज सुधीर परमार के खिलाफ चार्जशीट में खुलासा

हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (HVSCB) ने सस्पेंड CBI-ED स्पेशल कोर्ट के जज (पंचकुला) सुधीर परमार के खिलाफ विस्तृत चार्जशीट दाखिल की गई है। इसमें कई खुलासे हुए हैं। इसमें कहा गया है कि ईडी ने संयुक्त सहयोग समझौते (आईआरईओ-एम3एम) के तहत जो संपत्तियाँ थी, उसे जब्त नहीं कीं।

इसमें कई ऑडियो क्लिप को सबूत के तौर पर पेश किया गया है। ये भी कहा गया है कि ईडी अधिकारी, जाँच अधिकारी की भूमिका भी जाँच के दायरे में है।

अप्रैल 2023 में दर्ज हुई FIR

यह मामला अप्रैल 2023 में सामने आया था। उस वक्त स्पेशल PMLA कोर्ट के न्यायाधीश सुधीर परमार, उनके भतीजे अजय परमार और रूप सिंह बंसल के खिलाफ तत्कालीन एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) ने पंचकूला में केस दर्ज कराई थी। एफआईआर में परमार पर एक केस में आरोपितों की मदद के बदले 5-7 करोड़ रुपए माँगने का आरोप लगा।

आरोप पत्र में आगे खुलासा हुआ है कि एजेंसी के अधिकारियों और जाँच अधिकारी की कार्रवाइयों को लेकर भी जाँच चल रही है। चार्जशीट में खास तौर पर उन लग्जरी गाड़ियों का उल्लेख है, जिसे सुधीर परमार ने अवैध तरीके से प्राप्त किया था। एफआईआर में ये भी कहा गया कि सुधीर परमान का भतीजा अजय परमार रियल स्टेट कंपनी एम3एम ग्रुप में बतौर कानूनी सलाहकार काम कर रहा था और सुधीर परमार उसके मोबाइल से डील के लिए बात करते थे।

परमार ने प्रॉपर्टी में पैसा इन्वेस्ट किया

ईडी की संपत्ति कुर्की के दौरान ये भी पता चला कि आईआरईओ और रियल स्टेट कंपनी एम3एम ग्रुप के बीच गुरुग्राम के सेक्टर 61 में 22.61875 एकड़ और सेक्टर 58 में 30.256 एकड़ ज़मीन समझौते हुआ। इसी तरह, राजस्थान के भिवाड़ी में लगभग 78 एकड़ ज़मीन के पाँच विकास समझौते को अंतिम रूप दिया गया।

एम3एम ने इसके लिए आईआरईओ को ₹700-800 करोड़ का भुगतान किया। रिपोर्टों के अनुसार, एचवीएससीबी को सौंपी गई ऑडियो क्लिप के मुताबिक बंसल ने सुधीर का इस्तेमाल कर आईआरईओ के ललित गोयल पर ज़मीन की रजिस्ट्री कराने का दबाव बनाया।

चार्जशीट में एक बातचीत का जिक्र है, जिसमें जज सुधीर ने गारंटी दी थी कि संपत्तियां कुर्क नहीं की जाएँगी। ईडी के 14 अक्टूबर 2022 के कुर्की आदेश से इसकी पुष्टि हुई थी, जिसमें ये संपत्तियां शामिल नहीं थीं।

सतर्कता एजेंसी ने आरोप पत्र में बताया है कि गुरुग्राम के सेक्टर 82 स्थित सिग्नेचर एवेन्यू में 327.96 वर्ग गज का एक प्लॉट सुधीर की भाभी पुष्पा देवी के नाम पर 15 अप्रैल 2022 को एक कन्वेयंस डीड के जरिए ₹1.80 करोड़ में खरीदा गया था। हालाँकि, इसका बाज़ार मूल्य ₹4.25-4.40 करोड़ से ज्यादा था।

बकाया भुगतान अवैध धन के जरिए किया गया। ₹50 लाख कैश दिया गया, जबकि शेष राशि का भुगतान पोस्ट-डेटेड चेक के जरिए किया गया।

इसके अलावा, पटौदी-गुरुग्राम रोड के किनारे सांपका गाँव में 10 कनाल ज़मीन का एक टुकड़ा 29 अप्रैल 2022 को अजय, मोहन लाल शर्मा और साईं ट्रांसपोर्ट के मालिक रोहित सिंह तोमर ने 20:40:40 के अनुपात में सिर्फ ₹1.01 करोड़ में खरीदा था। 11 जनवरी 2022 को अजय परमार ने तोमर को एक व्हाट्सएप मैसेज भेजा था।

इससे पता चलता है कि जमीन की असली कीमत ₹5.3 करोड़ थी और एक शेयर जज सुधीर परमार के नाम पर पंजीकृत था। बाद में पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान इसे अजय के नाम पर बदल दिया गया।

इसी तरह, गुरुग्राम में पुष्पा देवी के बहुमंजिला आवास के विकास पर ₹1.5-2 करोड़ का खर्च आया और सीएनजी/पेट्रोल पंप बनाने के लिए अतिरिक्त ₹1 करोड़ की आवश्यकता थी। परिवार को ₹2.7 करोड़ का लोन भी मिला।

जज सुधीर परमार ने कहा था कि अगर बंसल सीबीआई मामले में बरी हो जाते हैं, तो वह उन्हें ईडी मामले में फँसने नहीं देंगे।
HVSCV के मुताबिक, परमार और उनके परिवार के पास लोन चुकाने की क्षमता नहीं थी। फिर भी मात्र 3-4 महीनों में 7-8 करोड़ रुपए की संपत्ति खरीद ली। चार्जशीट में कहा गया है कि 18 नवंबर 2021 को परमार पंचकूला के सीबीआई-ईडी कोर्ट में बतौर जज नियुक्त हुए थे।

जनवरी 2022 में ईडी ने आईआरईओ के ललित गोयल के खिलाफ धर खरीदारों के पैसे की हेराफेरी करने और 1777.48 करोड़ रुपए विदेश भेजने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई।

दस्तावेज में कहा गया है कि सुधीर परमार ने सुनील यादव (एक ईडी अधिकारी) के साथ बातचीत का दावा किया था। और कहा था कि ₹1,200 करोड़ रुपए की संपत्ति को कुर्क नहीं होने देंगे। बशर्तें की पैसे के लेन-देन का औचित्य बताया जाए।

चार्जशीट में रिकॉर्डिंग का जिक्र

रिकॉर्डिंग: महोदय, मुझे रजिस्ट्री करवानी है। सुधीर: मैंने सुनील को सूचित कर दिया है और उन्होंने बताया कि मैंने उन्हें बता दिया है। मैंने सीधे साकेत (ईडी के उप निदेशक) को भी बोल दिया है। वह एक आईआरएस अधिकारी हैं। आईओ के काम होते हैं।

मनोज मिश्रा (ईडी अधिकारी) की बजाय साकेत से मिलें। साकेत सभी दस्तावेजों की जाँच करेंगे और आपको सूचित करेंगे। अगर कागजात वैध हैं, तो आपको मंजूरी मिल जाएगी।

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