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बड़ा खुलासा …तो क्या रिटायर्ड आईएएस नवनीत सहगल ने डकारा 112 करोड़ का कमीशन !

कांग्रेस ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस रिपोट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सहगल को तीन साल में 24 से 26 करोड़ रुपये तक की “कट मनी” मिली और इसके बावजूद उन्हें रिटायर्मेंट के बाद प्रसार भारती के शीर्ष पद पर नियुक्त किया गया। पार्टी के मुताबकि आईइडी से लगभग 65 करोड़ और यूपीकान से लगभग 46 करोड़ रुपये कथति रूप से लिए गए, जिनका बड़ा हिस्सा  नौकरशाहों और बिचौलियों के बीच बंटने का आरोप है।

उत्तर प्रदेश में तीन दशकों से अधकि समय से सत्ता और प्रशासन के केंद्र में रहे 1988 बैच के रटिायर्ड आईएएस अधकिारी और पूर्व प्रसार भारती चेयरमैन नवनीत कुमार सहगल के कथति 112 करोड़ रुपये के कमीशन नेटवर्क को लेकर सूबे की नौकरशाही निशाने  पर है। एक गोपनीय इनकम टैक्स रिपोर्ट और उस पर आधारति मीडयिा खुलासों के बाद से सहगल का नाम सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में कथति भ्रष्टाचार के सबसे बड़े लाभार्थी के तौर पर लिया जा रहा है।

गोपनीय 254 पन्नों की इनकम टैक्स (इन्वेस्टीगेशन विंग) रिपोर्टिंग में दावा है कि 2०19-2० से 2०21-22 के बीच यूपी सरकार की योजनाओं,खासकर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी), विश्वकर्मा श्रम सम्मान, आईइडी और यूपीकान जैसी संस्थाओं से जुड़े ट्रेनिंग, टूलकटि और कंसल्टेंसी कॉन्ट्रैक्ट्स में व्यवस्थति तौर पर “कट मनी सिस्टम” चला, जसिके जरएि करीब 112 करोड़ रुपये का कथति कमीशन निकाला गया। कमीशन लेने वाले के नाम के तौर पर एनएस दर्ज है। एक प्रतिष्ठान ने तो पैसे जमा करने वाली अपनी गोपनीय डायरी मे एनएस के साथ लम्बू भी लिख रखा है। रिपोर्ट के मुताबकि नकदी बरामदगी, संदग्धि शेल कंपनियों के जरएि प्रॉपर्टी खरीद, महंगे तोहफों के संदेश और कॉन्ट्रैक्ट पेमेंट की चेन जैसे वभिन्नि साक्ष्य इस नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं और सहगल को इस पिरामिड के शीर्ष पर दखिाया गया है।

कांग्रेस ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस रिपोट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सहगल को तीन साल में 24 से 26 करोड़ रुपये तक की “कट मनी” मिली और इसके बावजूद उन्हें रिटायर्मेंट के बाद प्रसार भारती के शीर्ष पद पर नियुक्त किया गया। पार्टी के मुताबकि आईइडी से लगभग 65 करोड़ और यूपीकान से लगभग 46 करोड़ रुपये कथति रूप से लिए गए, जिनका बड़ा हिस्सा  नौकरशाहों और बिचौलियों के बीच बंटने का आरोप है।

इन आरोपों के सार्वजनकि होने के कुछ ही समय बाद सहगल ने प्रसार भारती चेयरमैन पद से कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया, जिसने अफसरशाही और सियासी हलकों में अटकलों को और हवा दी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सवाल उठाया कि जब आयकर विभाग की रिपोर्ट राज्य सरकार और लोकायुक्त तक भेजे जाने की बात कही गई है तो न तो यूपी सरकार ने स्पष्ट कार्रवाई की, न ही प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पर सार्वजनकि स्पष्टीकरण दिया।

इन खुलासों और राजनीतकि हमलों के बाद यूपी कैडर की नौकरशाही में सहगल का नाम फुसफुसाहट से खुली चर्चा तक पहुंच गया है, जहां इसे “सिस्टमेटिक करप्शन” और “पोस्ट-रिटायर्मेंट पोस्टिंग” की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सोशल मीडयिा पर भी इनकम टैक्स डोजियर की लिंक, मीडयिा रिपोर्ट और कांग्रेस के आरोप तेजी से शेयर हो रहे हैं, जसिसे यह संकेत जा रहा है कि उच्च स्तर पर लिए गए फैसलों और जवाबदेही की कमी पर सवाल अब सिर्फ बंद कमरों तक सीमति नहीं रहे। उधर, उपलब्ध रिपोर्केटों  अनुसार सहगल सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहते रहे हैं कि आयकर वभिाग की जांच बंद हो चुकी है।

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