The Telegraph के पूर्व संपादक को वोटिंग व पासपोर्ट अधिकारों से वंचित किए जाने पर भारतीय पत्रकारों का विरोध
भारतीय निर्वाचन आयोग ने 4 नवंबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में Special Intensive Revision (SIR) अभियान शुरू किया था। इसका उद्देश्य अयोग्य मतदाताओं की पहचान कर मतदाता सूची को अपडेट करना बताया गया था। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है। आलोचकों का आरोप है कि इस अभियान के दौरान लाखों योग्य मतदाताओं के नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिए गए, जबकि चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है। अब तक इस प्रक्रिया के तहत करीब 6 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 90 लाख नाम केवल पश्चिम बंगाल से हटाए गए हैं। राजगोपाल भी उन हजारों लोगों में शामिल हैं जिन्होंने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी है।
भारत के वरिष्ठ पत्रकार आर. राजगोपाल का पासपोर्ट नवीनीकरण (Passport Renewal) वोटर लिस्ट से नाम हटने के कारण अटक गया है। इस मामले को लेकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने गहरी चिंता जताई है और कहा है कि यह मामला दिखाता है कि देश के लाखों लोग Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया की वजह से किस तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
राजगोपाल, जो पहले The Telegraph के संपादक रह चुके हैं, का कहना है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। इसके बाद उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण की प्रक्रिया भी प्रभावित हो गई।
क्या है पूरा मामला?
भारतीय निर्वाचन आयोग ने 4 नवंबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में Special Intensive Revision (SIR) अभियान शुरू किया था। इसका उद्देश्य अयोग्य मतदाताओं की पहचान कर मतदाता सूची को अपडेट करना बताया गया था।
हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है। आलोचकों का आरोप है कि इस अभियान के दौरान लाखों योग्य मतदाताओं के नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिए गए, जबकि चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
अब तक इस प्रक्रिया के तहत करीब 6 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 90 लाख नाम केवल पश्चिम बंगाल से हटाए गए हैं। राजगोपाल भी उन हजारों लोगों में शामिल हैं जिन्होंने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजगोपाल ने बताया कि वह पिछले 25 वर्षों से कोलकाता के बालीगंज इलाके में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 से वह नियमित मतदाता रहे हैं और 2016 से 2023 तक कोलकाता के प्रमुख दैनिक अखबार ‘द टेलीग्राफ’ के संपादक रहे। इसके बावजूद उनका नाम इसलिए हटा दिया गया क्योंकि उनके और उनके पिता का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नहीं मिला।
उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना मैट्रिक प्रमाणपत्र भी जमा किया, लेकिन इसके बावजूद उनका नाम दोबारा नहीं जोड़ा गया। फिलहाल उनकी अपील संबंधित ट्रिब्यूनल में लंबित है।
राजगोपाल का कहना है कि बाद में अधिकारियों ने उन्हें बताया कि कोलकाता पुलिस पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए आवश्यक पुलिस सत्यापन (Police Verification) पूरा नहीं कर सकी, क्योंकि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं था।
उन्होंने कहा कि उन्हें यह बात हैरान करने वाली लगी, क्योंकि उन्हें ऐसा कोई सार्वजनिक नियम नहीं मिला जिसमें पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए वोटर आईडी को अनिवार्य दस्तावेज बताया गया हो। इस पूरे मामले पर निर्वाचन आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने अपने बयान में कहा कि अगर एक जाने-माने पत्रकार और पूर्व संपादक के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम नागरिकों, खासकर समाज के कमजोर वर्गों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गिल्ड ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन लाखों भारतीयों की परेशानी को सामने लाता है जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
राजगोपाल के मामले को सोशल मीडिया पर भी व्यापक समर्थन मिला है। वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि वह राजगोपाल के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सबसे डराने वाली बात यह है कि ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है।
वहीं, सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि राजगोपाल को उनकी पत्रकारिता और जवाबदेही की मांग की कीमत चुकानी पड़ रही है।
इस बीच वी.डी. सतीशन ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कोलकाता पुलिस की प्रतिकूल सत्यापन रिपोर्ट की वजह से राजगोपाल का पासपोर्ट नवीनीकरण रुक गया। उनके मुताबिक, वोटर लिस्ट से नाम हटने के कारण ही यह स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि राजगोपाल ने अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए अपील दायर कर दी है।
वहीं, पिनरयी विजयन ने भी फेसबुक पोस्ट के जरिए इस मामले पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के कारण राजगोपाल का नाम वोटर लिस्ट से हटा और इसी वजह से उनका पासपोर्ट भी नवीनीकृत नहीं हो सका।


