शक्ति भवन में भी मीडिया कार्मिको का प्रवेश प्रतिबंधित, एपॉइंटमेन्ट लेकर, पास बनवाकर ही मिलेगा प्रवेश

आखिर प्रेस की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने का सरकारी विभागों का क्या है प्रयोजन? अपॉइंटमेंट के लिए रिसेप्शन द्वारा दूरभाष पर बात करने पर सम्बंधित अधिकरियों के कैंप कार्यालय द्वारा बताया जाता है साहब मीटिंग में है; साहब लंच पर है, साहब कार्यालय में बैठे नहीं है; अधिकारियों का मोबाईल नंबर विभागीय वेबसाइट पर है ही नहीं; अब न संपर्क होगा न एपॉइंटमेंट मिलेगा; प्रेस मतलब शून्य...

लखनऊ शक्ति भवन में अगले आदेश तक बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक

उoप्रo पावर कारपोरेशन लिमिटेड के मुख्यालय ‘शक्ति भवन’ में पत्रकारो का प्रवेश कर दिया है प्रतिबंधित। नई जारी व्यवस्था के तहद अब शक्ति भवन में पत्रकारों को प्रवेश पूर्व सम्बंधित अधिकारी से अपॉइंटमेंट लेना होगा तथा दिए गए समय पर पास कार्यालय से प्रवेश पत्र बनवाने के बाद ही शक्ति भवन में प्रवेश संभव हो सकेगा।

आखिर प्रेस की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने का सरकारी विभागों का क्या है प्रयोजन? अपॉइंटमेंट के लिए रिसेप्शन द्वारा दूरभाष पर बात करने पर सम्बंधित अधिकरियों के कैंप कार्यालय द्वारा बताया जाता है साहब मीटिंग में है; साहब लंच पर है, साहब कार्यालय में बैठे नहीं है; अधिकारियों का मोबाईल नंबर विभागीय वेबसाइट पर है ही नहीं; अब न संपर्क होगा न एपॉइंटमेंट मिलेगा; प्रेस मतलब शून्य…

अन्य कार्यालयों में ‘प्रेस कार्ड’ ही मान्य 

दरअसल वर्तमान व्यवस्था के तहत विभिन्न सरकारी विभागों के मुख्यालय या अन्य कार्यालयों में प्रवेश के लिए केवल ‘प्रेस कार्ड’ ही मान्य है और उनके प्रवेश पर रोक नहीं है, आखिर पावर कारपोरेशन का प्रेस की स्वतंत्रता पर अर्धप्रतिबंध लगाने का क्या उद्देश्य है?

फोन करने पर साहब कार्यालय में नहीं होते

वहीं अपॉइंटमेंट के लिए फोन पर रिसेप्शन पर बात करने पर संबंधित अधिकारियों के कैंप कार्यालय से बताया जाता है कि साहब मीटिंग में हैं, साहब लंच पर हैं, साहब कार्यालय में नहीं बैठे हैं, अधिकारियों के मोबाइल नंबर विभागीय वेबसाइट पर नहीं हैं, अब न तो कोई संपर्क होगा और न ही अपॉइंटमेंट दिया जाएगा, प्रेस का मतलब शून्य है।

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