बेलगाम एंकर अंजना ओम कश्यप

अभी-अभी आजतक बंद किया है। देख रहा था, इंडिया 360 डिग्री। होस्ट कर रही थीं बेलगाम एंकर अंजना ओम कश्यप। एक खबर आई। ब्रेकिंग न्यूज में। खबर थी, नीतीश का स्टेटमेंट। नीतीश कुमार ने कहीं स्टेटमेंट दिया था कि मैं अहंकारी हूं परंतु शिष्टाचार नहीं भूलता। जाहिर तौर पर नीतीश के तीर पर मोदी ही थे। यह सब चल ही रहा है। कई दिनों से। लेकिन एक पत्रकार होने के नाते अंजना ओम कश्यप से जो उम्मीदें थी, उसे उन्होंने न सिर्फ तोड़ दिया बल्कि मेरे मन में अपने लिए और ज्यादा नफरत भी पैदा कर दिया। अंजना ने पंच मारा-कितनी बेमानी हैं ये बातें। बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, सड़कें नहीं हैं और इस किस्म की बातें…लड़ाई, झगड़ा, चोरी और डकैती वहां पर हो रही है….यह सब कहते-कहते उनके चेहरे पर बेहद घटिया किस्म के भाव आए थे। आप लोग इसकी रिकार्डिंग मंगवा सकते हैं। आज तक से।

देश का कौन सा शहर है ऐसा जहां इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा हो? दिल्ली में है? गुजरात में है? गोवा में है? महाराष्ट्रा में है? भाजपा शासित किस प्रदेश में है? मैं अपना जीवन उन सज्जन की चाकरी में बीता दूंगा जो साबित कर दें कि देश के किसी भी सूबे में पूरा का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर हो। भाजपा ही नहीं, कांग्रेस नीत सरकार वाले भी किसी सूबे में पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। तो, बिहार को बदनाम क्यों कर रही हैं अंजना? नीतीश का नाम लेते हुए उनका मुंह कसैला क्यों हो जाता है? ये पत्रकारिता नहीं कर रही हैं। ये हम पत्रकारों को बदनाम करने का दुष्कर्म कर रही हैं। इन्हें कितने विषयों की जानकारी है, भगवान जानें। एक बार सामना हो जाए तो मजा आ जाएगा।

अंजना ने कहा कि बिहार में चोरी होती है, मार-धाड़ होता है, डकैती होती है। मेरा प्रतिप्रश्न हैः दिल्ली, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड….किस राज्य में अपराध नहीं होते? यूपी में नहीं होता? महाराष्ट्र में नहीं होता? कहां नहीं होता?? हर जगह होता है। उसके लिए पुलिस है। पुलिस वाले ड्यूटी ईमानदारी से करते हैं या नहीं, यह अलग विषय है पर चुनाव के इस मौसम में इस तरह प्रधानमंत्री की तरफदारी करने वाली रिपोर्टिंग क्यों और वह भी आजतक जैसे मंच से???

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मैं 24 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं। बिहार, झारखंड, असम, महाराष्ट्रा, यूपी, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में पत्रकारिता कर चुका हूं। कहीं रामराज्य नहीं है। 100 फीसदी इंफ्रास्ट्रक्चर भी कहीं डेवलेप नहीं है। गांधीनगर की गलियों में भी घूम चुका हूं। कहीं रामराज्य नहीं है। फिर अंजना बिहार पर तंज क्यों कस रही हैं? आप जानती ही कितना हैं बिहार को? बीते 10 साल में बिहार जिस तेजी से बदला है उसे महसूस करने के लिए आपको बिहार की यात्रा करनी चाहिए। आप जाइए गांवों में, शहरों में। देखिए तो कि बिहार कहां से कहां पहुंच गया है? बिना केंद्र सरकार के समर्थन के 10 फीसदी का विकास दर हासिल करना हंसी ठट्ठा नहीं है। आप इसे मजाक न बनाएं अंजना जी। कोई हक नहीं है आपको। आप पत्रकारिता कीजिए न। किसने रोका है आपको। सत्ता की दलाली मत कीजिए। हम लोगों की विश्वसनीयता पर संकट मत खड़ा कीजिए। यही आपसे निवेदन है। अगर आप ऐसी ही उल-जुलूल टिप्पणियां करेंगी तो हम जैसे समर्थ पत्रकार आपके खिलाफ ही मोर्चा खोल देंगे। इसे बढ़िया से समझ लीजिए।

 

लेखक आनंद सिंह कई बड़े अखबारों में काम कर चुके हैं और इन दिनों अपने गृह जनपद गोरखपुर में रहते हुए पत्रकारिता के कुछ नए प्रयोगों में जुटे हुए हैं. आनंद से संपर्क 08400536116 या 08004678523 के जरिए किया जा सकता है.

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