चुनाव से पहले उत्तराखंड में सबसे बड़े अख़बार के मालिक को CM हरीश रावत का तोहफा

3 जनवरी को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने देहरादून के मशहूर आराघर’ चौक का नया नाम ‘अतुल माहेश्वरी’ चौक रख दिया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत जिस वक्त देहरादून के आराघर चौक का नाम उत्तराखड के एक अग्रणीय अखबार ‘अमर उजाला’ के मालिक अतुल माहेश्वरी के नाम पर रख रहे थे, उसी वक़्त मुख्यमंत्री के दफ्तर के सामने कई पत्रकार अपने साथ हुई पुलिस की बर्बरता के लिए न्याय मांग रहे थे।

दरअसल 30 दिसंबर 2016 को पुलिस ने प्रेस क्लब के विवाद में कई पत्रकारों की बर्बरता से पिटाई कर दी। सबसे अखरने वाली बात तो यह रही कि पुलिस द्वारा पत्रकारों की इस बर्बर पिटाई की खबर उत्तराखंड के सभी नामी अख़बारों अमर उजाला, दैनिक जागरण और दैनिक हिंदुस्तान से भी गायब रही। देहरादून में प्रेस क्लब पर कब्जे को लेकर पत्रकारों के दो गुट बन चुके हैं। सूत्रों की माने तो सीएम हरीश रावत के चेहेते 33 पत्रकारों का एक गुट इतना हावी है कि पुलिस ने इनके विरोधी खेमे की 100 से ज्यादा पत्रकारों की जमकर पिटाई कर दी।

उत्तराखंड के कई पत्रकारों का कहना है कि सीएम हरीश रावत उत्तराखंड चुनाव से पहले साम, दाम, दंड, भेद की राह पकड़ चुके हैं। उनका आरोप है कि उत्तराखंड के सबसे अग्रणीय अख़बार अमर उजाला  को खुश करने के लिए हरीश रावत ने एक चौक का उसके मालिक के नाम पर रख दिया। हरीश रावत सरकार का यह फैसला इसलिए भी देहरादून के पत्रकारों गले नही उतर रहा है क्योंकि अतुल माहेश्वरी का उत्तराखंड के लिए कोई सरोकार रहा ही नही है।

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न ही अतुल माहेश्वरी उत्तराखंड के निवासी है, हाँ एक दौर जरूर था जब अमर उजाला की पत्रकारिता उत्तराखड में खूब सराही गई लेकिन अख़बार का उत्तराखंड से असली नाता तो व्यावासिक तौर पर ही रहा। उत्तराखंड के 13 जिलों में इसके संस्करण निकलते हैं। अखबार को उत्तराखंड सरकार हर साल करोड़ों का विज्ञापन भी देती है। जहाँ एक ओर उत्तराखंड के बड़े अखबारों में सुदूरवर्ती इलाकों में काम करने वाले पत्रकारों को यहाँ के तमाम बड़े अख़बार अपने कर्मचारी तक का दर्जा नही देते हैं। वहीँ पत्रकारों की पिटाई की खबर इन अख़बारों से गायब होना सबको चौका रही है।

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