दैनिक भास्कर में ये क्या छप गया! आपत्ति आते ही 2 कर्मियों तन्मय अग्रवाल और सुमन पांडे की गई नौकरी

हैडिंग में कोई शायरी नहीं है। बल्कि हकीकत है दैनिक भास्कर के रायपुर एडिशन की। आनंद पांडे जी के जाने के बाद जब से शिव दुबे को रायपुर भास्कर का संपादक बनाया गया है। भास्कर की छीछालेदर होती जा रही है। ताजा उदाहरण है कि 14 अक्टूबर के सिटी भास्कर में खबर में ऐसे शब्द शामिल हैं जिन पर कड़ी आपत्ति आते ही 2 कर्मियों तन्मय अग्रवाल और सुमन पांडे की विदाई कर दी गई है।

दरअसल गलती खबर बनाने वालों की नहीं है क्योंकि उन्हें तजुर्बा ही नहीं… उन्हें पता ही नहीं कि किसी ने अपने किरदार का नाम “गाली” रखा हो तो उसे घुमाकर परोसा जाता है। उन्होंने तो सीधे-सीधे किरदारों के नाम लिखकर छाप दिए थे। अब हुआ यूं कि जब ऊपर से शिव दुबे की सिंकाई हुई तो उसने दोनों कर्मियों को तत्काल रिलीव कर दिया।

अंदर की बात यह है कि तन्मय अग्रवाल, शिव दुबे का खास बन्दा था। दुबे को पता था सिटी भास्कर को निकालने और पब्लिक के टेस्ट को पकड़ने का हुनर उसके किसी और खास आदमी में नहीं है। इसीलिए उसने तन्मय को सुनहरे भविष्य के सपने दिखाकर भास्कर से जाने नहीं दिया था। लेकिन जब माई बाप से प्रेशर पड़ा तो उसी ने तन्मय की विदाई कर दी। वैसे यह वही शिव दुबे हैं जो सन्डे के दिन IIT का रिजल्ट डिक्लेयर होने की खबर बनवा रहा था जिसे मैंने रुकवाया था। क्योंकि सन्डे को एग्जाम तो कंडक्ट हो सकते हैं लेकिन रिजल्ट डिक्लेयर नहीं हुआ करते।

नमूनों से भरी है नई टीम

24 अक्टूबर के रायपुर सिटी भास्कर के फ्रंट पेज की लीड खबर में ट्रांसपेरेंट शब्द की बजाय “न्यूड” का बारबार इस्तेमाल किया गया है। अब जाहिर सी बात है ट्रेनी पत्रकारों को या नौसिखियों को कम तनख्वा देकर बिठाओगे तो यही सब तो पढ़ने मिलेगा।

आशीष चौकसे
पत्रकार और ब्लॉगर
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