दिल्ली सरकार में बैठे लोग अखबार में अपने मन माफिक खबरें छपवाना चाहते हैं

आम आदमी पार्टी सरकार के विधायकों ने दिल्ली विधानसभा में दैनिक जागरण में प्रकाशित कुछ खबरों पर आपत्ति जताई और इस मामले को विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को सौंपने की मांग की, जिसके बाद इस मामले को विधानसभा अध्यक्ष ने विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया है। हालांकि इससे नाराज होकर विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध किया और इसे लोकतंत्र की हत्या बताया।

आम आदमी पार्टी के नाराज विधायक कपिल मिश्रा इसका जोरदार ढंग से विरोध किया। उन्होंने न केवल इसे लोकतंत्र की हत्या बताया, बल्कि कहा कि अध्यक्ष ने उनकी बात को अनसुना कर दिया, क्योंकि इससे पहले सदन में इस तरह के प्रस्ताव की सुगबुगाहट का पता लगने पर विधानसभा अध्यक्ष को उन्होंने पत्र लिखा था और इस तरह के प्रस्ताव को सदन में न लाए जाने की मांग की थी।

सदन में दैनिक जागरण के खिलाफ मामला विशेषाधिकार समिति को सौंपे जाने पर कपिल मिश्रा ने कहा कि दैनिक जागरण अखबार के खिलाफ दिल्ली विधानसभा में अवमानना का प्रस्ताव जायज नहीं है। उन्‍होंने कहा कि इस हरकत से आज विधानसभा ने अपना कद बहुत छोटा कर लिया। ऐसा प्रस्ताव सीधे सीधे अखबार और पत्रकार और मीडिया की आजादी पर हमला है, डराने की कोशिश है। शर्मनाक है। उन्होंने आगे कहा कि पत्रकार तो सरकार के खिलाफ बोलते ही हैं। लेकिन जब सरकार पत्रकार और अखबार के खिलाफ बोलने लगे और चुप कराने की कोशिश करने लगे तो यही उस पत्रकार और अखबार की निष्पक्षता का सबसे बड़ा मैडल है।

वहीं दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह लोकतंत्र ही हत्या है। यह सरकार प्रेस की आजादी पर हमला कर रही है। दिल्ली में आपातकाल की तरह हालात हैं। दिल्ली में ऐसा पहली बार हुआ है जब निर्भीक पत्रकारिता को कुचलने की कोशिश की जा रही है। प्रेस की आजादी पर हो रहे हमले को लेकर राष्ट्रपति को भी हस्तक्षेप करना चाहिए।

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इसके अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी और कहा कि केजरीवाल सरकार प्रेस को दबाने की कोशिश कर रही है, जोकि लोकतंत्र पर हमला है। सत्ता में आने के तुरंत बाद आम आदमी पार्टी की सरकार ने पहले सचिवालय में पत्रकारों को रोकने का प्रयास किया, फिर निर्देश पत्र निकाला, जिसे अदालत की आपत्ति के बाद वापस लिया गया। यह सरकार शुरू से प्रेस की आजादी का विरोध करने वाली है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने भी इस मामले को लेकर केजरीवाल सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि दिल्ली सरकार में बैठे लोग अखबार में अपने मन माफिक खबरें छपवाना चाहते हैं। सरकार ने प्रेस की आजादी पर हमला किया है। हम इसके खिलाफ एडिटर्स गिल्ड और कोर्ट में भी जाएंगे।

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