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सूचना विभाग की मुहर बेकार, परिचालक की गुंडई भारी

बस परिचालक की गुंडई: मान्यता कार्ड की धज्जियाँ उड़ाई

मान्यता प्राप्त पत्रकार का अपमान,प्रेस की गरिमा का अपमान

पत्रकार को धक्का, लोकतंत्र को धक्का प्रेस की गरिमा से खिलवाड़

लखनऊ। लखनऊ में परिवहन निगम बस परिचालक की दबंगई ने लोकतंत्र की आत्मा को झकझोर दिया। मान्यता प्राप्त पत्रकार दिलीप मिश्रा के साथ अभद्र व्यवहार कर परिचालक ने न केवल व्यक्तिगत सम्मान का अपमान किया, बल्कि प्रेस की पहचान और सूचना विभाग की व्यवस्था को भी ठेंगा दिखाया।
पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला शर्मनाक मामला प्रकाश में आया है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बस संख्या UP 34 T 9163 में यात्रा कर रहे जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार दिलीप मिश्रा के साथ बस परिचालक ने न केवल अभद्र व्यवहार किया, बल्कि उनके वैध प्रेस मान्यता पत्र को मानने से भी इंकार कर दिया। पत्रकार को आवश्यक कार्य हेतु लखनऊ आना था, इसी अपनी इज्जत बचाते 67 रुपए देकर टिकट लेकर यात्रा पूरी की।
सूत्रों के अनुसार परिचालक ने सार्वजनिक स्थान पर पत्रकार को धक्का देकर बस से उतारने का प्रयास किया। यह आचरण न सिर्फ व्यक्तिगत सम्मान का अपमान है बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सूचना विभाग की मान्यता प्रणाली पर सीधा हमला है।
पत्रकार दिलीप मिश्रा ने इस घटना को भारतीय दंड संहिता की धारा 504 (जानबूझकर अपमान), धारा 506 (आपराधिक धमकी) और धारा 352 (मारपीट व आपराधिक बल प्रयोग) के तहत स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध बताया है। उन्होंने निदेशक, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश को विधिक नोटिस भेजकर परिचालक पर कठोर विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई की माँग की है।
साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि 15 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो मामला न्यायालय, प्रेस परिषद, प्रेस क्लब और मीडिया मंचों पर उठाया जाएगा। पत्रकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी परिवहन निगम और सूचना विभाग की होगी।
इस संबंध में पत्रिलिपि के माध्यम से जिलाधिकारी लखनऊ, जिलाधिकारी सीतापुर, जिला सूचना अधिकारी तथा परिवहन निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक को प्रेषित की गई है।

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