वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र प्रसाद से लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता चक्रेश केन ने किया बेहूदा व्यवहार!
अधीक्षण अभियंता चक्रेश केन पर गंभीर आरोपों के साथ भ्रष्टाचार का पुलिंदा खुलने लगा है। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि चक्रेश केन ने कर्मचारी सेवा आचरण नियमावली को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी और स्वार्थ सिद्धि के लिए कार्य किए।

एस.के. सिंह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यालय विधान सभा परिसर में स्थित है, जहाँ सत्र के दौरान सम्मानित पत्रकारों को प्रवेश के लिए पास जारी किए जाते हैं। सत्र के प्रथम दिन, सोमवार दोपहर लगभग तीन बजे बहुखंडी भवन स्थित लोक निर्माण विभाग, अनुरक्षण खंड-1 (सिविल) में अधीक्षण अभियंता 39वां वृत्त चक्रेश केन से वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र प्रसाद की मुलाकात हुई।
मुलाकात के दौरान चक्रेश केन अचानक भड़क गए और अभद्रता की हद पार करते हुए पत्रकार से कहा-“कार्यालय से निकल जाओ।” यह बात सुनकर मौके पर मौजूद लोग भी हैरान रह गए।
विडंबना यह है कि जिस कार्यालय में यह घटना हुई, वह मुख्यमंत्री का है, जहाँ से जनता की आवाज उठाई जाती है। बावजूद इसके, महाबेईमान और असभ्य रवैया अपनाने वाले चक्रेश केन अधीक्षण अभियंता, 39वां वृत्त, लोक निर्माण विभाग ने न केवल पत्रकार का अपमान किया, बल्कि सरकारी मर्यादा और पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई। यह घटना स्पष्ट करती है कि कुछ अधिकारी सत्ता और पद के नशे में शिष्टाचार और संवाद की बुनियादी सीमाएँ तक भूल जाते हैं।
सरकार और विभागाध्यक्ष लोक निर्माण विभाग को ऐसे बेलगाम, बदतमीज और भ्रष्ट अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, वरना यह संदेश जाएगा कि मुख्यमंत्री के दफ्तर में भी भ्रष्टाचार, अहंकार और गुंडई की खुली छूट है।
अधीक्षण अभियंता चक्रेश केन के कारनामों से लोक निर्माण विभाग में खलबली और सेवा आचरण नियमावली को बनाया मजाक
अधीक्षण अभियंता चक्रेश केन पर गंभीर आरोपों के साथ भ्रष्टाचार का पुलिंदा खुलने लगा है। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि चक्रेश केन ने कर्मचारी सेवा आचरण नियमावली को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी और स्वार्थ सिद्धि के लिए कार्य किए।
सूत्रों का कहना है कि चक्रेश केन अधीक्षण अभियन्ता, 39वां वृत्त (लो0नि0वि0), लखनऊ के कामकाज में न केवल पारदर्शिता का अभाव रहा, बल्कि उन्होंने अनुशासन और नैतिकता की सभी सीमाएं लांघ दीं। जब चक्रेश केन अधिशासी अभियन्ता थे तब “जहां नियम रास्ता रोकते थे, वहां नियमों को ही बदल दिया जाता था,” ठेकेदार को लाभ पहुचाना और उनसे लाभ लेना ही जानते हैं। एक विभागीय कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चक्रेश केन की अगर विभागीय जांच शुरू हो जाए तो जेल जाना तय है। वहीं, दूसरी ओर जानकार मानते हैं कि अगर जांच निष्पक्ष हुई, तो चक्रेश केन के कई छिपे ‘काले अध्याय’ सामने आ सकते हैं, जो लोक निर्माण विभाग की छवि पर गहरी चोट करेंगे।


