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FICCI Frames में देश के मीडिया परिदृश्य पर खुलकर बोले अरुण पुरी, कही ये बात

‘इंडिया टुडे’ समूह के फाउंडर-पब्लिशर और एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने FICCI Frames में देश के मीडिया परिदृश्य की चुनौतियों, नियामक अड़चनों, AI के प्रभाव और अन्य मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी।

‘फिक्की फ्रेम्स’ (FICCI Frames) में मंगलवार को ‘इंडिया टुडे’ (India Today) समूह के फाउंडर-पब्लिशर और एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने देश के मीडिया परिदृश्य, तकनीकी बदलाव और AI के प्रभाव पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, ‘पिछले पांच दशकों में disruption यानी अस्थिरता कभी खत्म नहीं हुई। वास्तव में disruption ही एकमात्र स्थिर चीज है।’

मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में पुरी ने मीडिया के पांच दशक के विकास और बदलाव पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि इंडिया टुडे, जिसके कभी 50 लाख पाठक थे, अब 24 घंटे के चार न्यूज चैनल्स और 60 डिजिटल, मोबाइल व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक फैल चुका है और अब इसके 7.5 करोड़ व्युअर्स, रीडर्स, फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स तक फैल चुका है। इसके साथ ही उन्होंने देश की पहली AI न्यूज एंकर ‘सना’ लॉन्च करने का जिक्र किया, जो हर दिन अपनी क्षमता बढ़ा रही है।

उन्होंने कहा कि हर तकनीकी बदलाव (disruption) अवसर भी लेकर आता है। पुरी के अनुसार, ‘प्रत्येक बदलाव ने दर्शकों का ध्यान और विज्ञापन की दिशा दोनों में गति बढ़ाई है।’ फिर भी उन्होंने चेताया कि तकनीकी बदलाव के पीछे न्यूज बिजनेस के मॉडल में संरचनात्मक समस्याएं हैं।

पुरी के अनुसार, ‘देश का मीडिया परिदृश्य वॉल्यूम में काफी खास है। किसी अन्य देश में 1,40,000 से अधिक प्रिंट पब्लिकेशंस नहीं हैं।’ दिल्ली में रोज़ाना दर्जनों अंग्रेजी और क्षेत्रीय अखबार आते हैं और डिजिटल मीडिया भी तेजी से बढ़ रहा है। ब्रॉडकास्ट मीडिया में देश में लगभग 900 सैटेलाइट टीवी चैनल्स हैं, जिनमें से 375 से अधिक 24 घंटे के न्यूज चैनल हैं और कई चैनल्स पाइप लाइन में हैं।

पुरी ने ब्रॉडकास्टिंग बिजनेस की वर्तमान चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि केबल चैनल उच्च डिस्ट्रीब्यूशन शुल्क और linear distribution की चुनौतियों का सामना करते हैं, और डिजिटलाइजेशन के बाद भी carriage fees का चलन जारी है।

उन्होंने नियामक अड़चनों की भी आलोचना की। पुरी का कहना था, ‘मुझे समझ नहीं आता कि सरकार केबल टीवी को एक आवश्यक वस्तु मानकर उसकी कीमत भी नियंत्रित क्यों करती है। भारत में मीडिया सस्ता या मुफ्त है और उपभोक्ता के पैसे से पब्लिशर या ब्रॉडकास्टर को बहुत कम लाभ मिलता है। विज्ञापन ही वास्तविक आमदनी का स्रोत है।’

पुरी का कहना था कि भविष्य की चुनौती के रूप में ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ (AI) को देखा जा रहा है। उन्होंने चेताया कि यह विश्वसनीय जानकारी के निर्माण के लिए एक अस्तित्वगत खतरा बन सकता है। उन्होंने मीडिया इंडस्ट्री को इनोवेट करने की सलाह दी। पुरी के अनुसार, ‘विश्वसनीय और अच्छी तरह से रिसर्च की गई खबरें जरूरी हैं और इनका मूल्य होना चाहिए। सब्सक्रिप्शन केवल पैसों के लेन-देन की बात नहीं है, बल्कि यह उस मीडिया के लिए जरूरी है, जैसा आप चाहते हैं।’

उन्होंने disruption को अवसर के रूप में लेने पर जोर दिया। पुरी ने कहा, ‘Disruption कोई दुश्मन नहीं है, यह नया व सामान्य है। असली सवाल यह है कि क्या हमारे पास इसे अपनाने की हिम्मत, कल्पना, नवाचार, लचीलापन और ईमानदारी है? ’

अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने स्टोरीज की अहमियत पर जोर देते हुए कहा, ‘हम मूलतः स्टोरीटैलर हैं, और मानवता उन स्टोरीज पर जीवित रहती है, जो हम एक-दूसरे को सुनाते हैं। पोस्ट-ट्रूथ के युग में सच बताना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।’

FICCI Frames में अरुण पुरी के पूरे संबोधन को आप यहां देख सकते हैं। 

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