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पारंपरिक मीडिया को मजबूत करने की तैयारी में सरकार, नए सुधार होंगे जल्द लागू

केंद्र सरकार जल्द ही प्रिंट मीडिया के लिए विज्ञापन दरों में 26% की बढ़ोतरी की घोषणा करने जा रही है। यह कदम वर्ष 2019 के बाद पहली बार सरकारी प्रिंट विज्ञापनों की दरों में की जा रही बड़ी बढ़ोतरी होगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) के सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय की औपचारिक अधिसूचना बिहार विधानसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने के बाद जारी की जाएगी।

सरकार अब पारंपरिक मीडिया यानी अखबार, रेडियो और टीवी को डिजिटल युग के झटकों से बचाने के लिए कई बड़े कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को बताया कि सरकार मीडिया सेक्टर में मौजूद रुकावटों को हटाने और कई अहम सुधार लागू करने की दिशा में काम कर रही है।

रेडियो और टीवी के नियमों में बदलाव की तैयारी

मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का मकसद मीडिया सेक्टर में मौजूद सभी तरह की नियामकीय बाधाओं को खत्म करना है। इसके तहत रेडियो लाइसेंसिंग के नियमों में ढील देने और टेलीविजन रेटिंग पॉइंट (टीआरपी) सिस्टम में सुधार की योजना पर काम चल रहा है।

टीआरपी सिस्टम के लिए नए दिशानिर्देश बन रहे हैं

वैष्णव ने बताया कि सरकार नए टीआरपी दिशानिर्देश तैयार कर रही है ताकि टीवी चैनलों को राजस्व (revenue) का न्यायसंगत बंटवारा मिल सके, खासकर सरकारी विज्ञापनों से। उन्होंने कहा कि टीआरपी ढांचे पर पहली चरण की चर्चा पूरी हो चुकी है और अब हितधारकों (stakeholders) के सुझावों को शामिल करते हुए दूसरी परामर्श रिपोर्ट जल्द जारी की जाएगी।

अखबारों और टीवी को मिलेगी विज्ञापन दरों में बढ़ोतरी

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार पारंपरिक मीडिया संस्थानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए अखबारों और टीवी चैनलों के विज्ञापन दरों में बढ़ोतरी पर भी विचार कर रही है। इससे इन संस्थानों को अतिरिक्त राजस्व का लाभ मिलेगा।

तीन प्रमुख संस्थाओं का होगा एकीकरण

सरकार प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB), सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन (CBC) और रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर फॉर इंडिया (RNI) को एक साथ लाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसका मकसद नियमों को सरल बनाना और नीति निर्माण से लेकर मीडिया संचार तक बेहतर तालमेल स्थापित करना है।

फेक न्यूज रोकने के लिए बनेगा चैटबॉट

सरकार की फैक्ट-चेक पहल के तहत एक चैटबॉट भी बनाया जा रहा है, जो वीडियो और ऑनलाइन कंटेंट की सच्चाई की जांच में मदद करेगा।

पीआईबी का विस्तार और शोध आधारित रिपोर्ट्स

वैष्णव ने बताया कि पीआईबी ने अपनी जनसंपर्क गतिविधियों को और बढ़ाया है और अब वह महत्वपूर्ण विषयों पर शोध आधारित रिपोर्ट और पृष्ठभूमि दस्तावेज भी तैयार कर रहा है, ताकि जनता तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाई जा सके।

प्रिंट मीडिया के लिए विज्ञापन दरों में 26% की बढ़ोतरी जल्द

केंद्र सरकार जल्द ही प्रिंट मीडिया के लिए विज्ञापन दरों में 26% की बढ़ोतरी की घोषणा करने जा रही है। यह कदम वर्ष 2019 के बाद पहली बार सरकारी प्रिंट विज्ञापनों की दरों में की जा रही बड़ी बढ़ोतरी होगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) के सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय की औपचारिक अधिसूचना बिहार विधानसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने के बाद जारी की जाएगी।

नई दरें सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन (CBC) के माध्यम से अखबारों को जारी किए जाने वाले सरकारी विज्ञापनों पर लागू होंगी। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है जब प्रिंट उद्योग सर्कुलेशन और विज्ञापन दोनों मोर्चों पर दबाव में है। सरकार का उद्देश्य इस बढ़ोतरी के जरिए समाचार संस्थानों में नौकरियों पर मंडरा रहे संकट को कम करना और उद्योग को राहत देना है।

सूत्रों के मुताबिक, यह दर वृद्धि विशेष रूप से छोटे और मध्यम अखबारों को राहत देने के लिए है, जो 2022 से दर संशोधन की मांग कर रहे थे। इन प्रकाशनों के लिए सरकारी विज्ञापन त्योहारी और चुनावी सीज़न के अलावा प्रमुख आय स्रोत बने हुए हैं।

सरकारी प्रिंट विज्ञापन दरों में आखिरी बार जनवरी 2019 में 25% की बढ़ोतरी की गई थी। उससे पहले 2013 में 19% की वृद्धि 2010 की दरों के मुकाबले लागू की गई थी। उस समय मंत्रालय ने कहा था कि यह बढ़ोतरी समाचारपत्र लागत (newsprint cost) और प्रोसेसिंग शुल्क में बढ़ोतरी को देखते हुए की गई थी, ताकि क्षेत्रीय और भारतीय भाषाई प्रेस को सहारा मिल सके।

रेट स्ट्रक्चर कमेटी नवंबर 2021 में बनाई गई थी ताकि 2019 की दरों की तीन वर्षीय वैधता खत्म होने के बाद संशोधन की समीक्षा की जा सके। हालांकि, यह प्रक्रिया कई दौर की सिफारिशों के बावजूद अब तक लंबित थी।

इंडियन न्यूज़पेपर सोसाइटी (INS) सहित कई उद्योग संगठनों ने लगातार सरकार से दरें बढ़ाने की मांग की थी, यह तर्क देते हुए कि इनपुट लागत में वृद्धि और विज्ञापन राजस्व के डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर शिफ्ट ने प्रिंट माध्यम को गहराई से प्रभावित किया है।

सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार टेलीविज़न माध्यम के सरकारी विज्ञापन दरों की भी अलग से समीक्षा करने की तैयारी में है।

इस बीच, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मंत्रालय ने नए टीआरपी (Television Rating Point) दिशानिर्देशों पर प्रारंभिक परामर्श पूरा कर लिया है और आगे भी कुछ और चरणों में विचार-विमर्श किया जाएगा।

मंत्रालय पारंपरिक मीडिया से जुड़े संस्थानों के पुनर्गठन पर भी काम कर रहा है, जिसमें रजिस्ट्रार ऑफ न्यूज़पेपर्स फॉर इंडिया (RNI), प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन (CBC) को एकीकृत कर संचार और नियामक कार्यों के बेहतर समन्वय का लक्ष्य रखा गया है।

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