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लक्ष्मी हॉस्पिटल में नो-डॉक्टर ट्रीटमेंट का महामंत्र, मालिक ही डॉक्टर, मालिक ही बोर्ड

राजधानी में ऐसे अस्पताल का लगातार संचालन बताता है कि स्वास्थ्य सुरक्षा नहीं, सिस्टम की सुरक्षा प्राथमिकता है। लखनऊ की जनता पूछ रही है,अगर मुख्यमंत्री जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं, तो यह 100 फीसदी टॉलरेंस वाला हॉस्पिटल मॉडल किसके भरोसे चल रहा है।

क्लीनिकल एक्ट को गुड मॉर्निंग कहकर अस्पताल में रातभर खुला रहता है जुगाड़-इमरजेंसी

लखनऊ। राजधानी का स्वास्थ्य विभाग किस रफ्तार से प्रगति कर रहा है यह बताने के लिए किसी सरकारी रिपोर्ट की ज़रूरत नहीं, हरदोई रोड बाईपास पर खड़े होकर किसी भी अवैध हॉस्पिटल के बाहर के बोर्ड को पढ़ लीजिए,आप समझ जाएंगे कि यहां इलाज नहीं, साहस की परीक्षा ली जाती है।
उसी साहस का सबसे शानदार उदाहरण है मॉल रोड जेहटा स्थित लक्ष्मी हॉस्पिटल, जहां मरीजों को भर्ती तो किया जाता है लेकिन इलाज करने के लिए डॉक्टरों की नहीं, जुर्रत की डिग्री चाहिए। अस्पताल में दिन हो या रात MBBS डॉक्टर का नाम लेने पर भी नर्सें ऐसे देखती हैं जैसे आप कोई विलुप्त प्रजाति के बारे में पूछ रहे हों।
सबसे बड़ा मेडिकल चमत्कार यह कि अस्पताल का मालिक ही पूरे हॉस्पिटल का मेडिकल बोर्ड बना बैठा है। जैसा कि स्थानीय लोगों का कहना है,मरीज गार्ड के भरोसे आता है और मालिक की समझदारी के भरोसे जाता है या फिर कहीं और भेज दिया जाता है।

अस्पताल से जुड़े दस्तावेज़ बताते हैं कि इलाज करने वाले व्यक्ति के पास कोई मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री नहीं है। मगर साहब के आत्मविश्वास का कोई जवाब नहीं, क्या MBBS, क्या MS इलाज दिल से होना चाहिए।

यही मंत्र यहां खुलेआम चलता है। यह पूरा प्रकरण क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2010, नर्सिंग होम एक्ट और मेडिकल काउंसिल एक्ट को ऐसे ठेंगा दिखाता है कि नियम खुद शर्म से मुंह ढक लें।
मेडिकल कॉलेज के एक वरिष्ठ चिकित्सक बताते हैं,जहां मरीज भर्ती किए जाते हैं, वहां 24×7 रजिस्टर्ड MBBS डॉक्टर अनिवार्य है।
बिना डिग्री इलाज करना सीधी–सीधी अवैध चिकित्सा है। पर असली सवाल, निगरानी तंत्र सो क्यों रहा है ? क्योंकि इतनी शिकायतों के बाद भी इस अस्पताल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोग कहते हैं, जिम्मेदार विभाग की जांच टीम आती है तो अस्पताल में अचानक सब सामान्य हो जाता है, जैसे कोई जादू हो गया हो।
राजधानी में ऐसे अस्पताल का लगातार संचालन बताता है कि स्वास्थ्य सुरक्षा नहीं, सिस्टम की सुरक्षा प्राथमिकता है। लखनऊ की जनता पूछ रही है,अगर मुख्यमंत्री जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं, तो यह 100 फीसदी टॉलरेंस वाला हॉस्पिटल मॉडल किसके भरोसे चल रहा है।

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