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जाने-माने फोटो जर्नलिस्ट रघु राय का निधन

उनके जाने से देश ने एक ऐसे महान फोटोग्राफर को खो दिया, जिन्होंने अपनी तस्वीरों के जरिए भारत की आत्मा, समाज और इतिहास को दुनिया के सामने पेश किया।

जाने-माने फोटो पत्रकार रघु राय का रविवार को निधन हो गया। वह करीब 83 साल के थे। रघु राय के निधन की पुष्टि परिवार की ओर से की गई। उनके जाने से देश ने एक ऐसे महान फोटोग्राफर को खो दिया, जिन्होंने अपनी तस्वीरों के जरिए भारत की आत्मा, समाज और इतिहास को दुनिया के सामने पेश किया।

1942 में वर्तमान पाकिस्तान के झंग में जन्मे रघु राय ने 1960 के दशक में फोटोग्राफी की दुनिया में कदम रखा। अपने करियर की शुरुआत में ही उन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली। ‘द स्टेट्समैन’ में चीफ फोटोग्राफर के रूप में काम करते हुए उन्होंने कई अहम घटनाओं को अपने कैमरे में कैद किया। इसके बाद ‘इंडिया टुडे’ में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही, जहां उनकी तस्वीरों ने भारतीय पत्रकारिता के विजुअल स्टाइल को नई दिशा दी।

रघु राय को अंतरराष्ट्रीय पहचान तब मिली जब 1977 में मशहूर फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसों ने उन्हें प्रतिष्ठित मैग्नम फोटोज से जुड़ने के लिए नामित किया। यह सम्मान बहुत कम फोटोग्राफरों को मिलता है और इससे उनकी वैश्विक प्रतिष्ठा और मजबूत हुई।

अपने लंबे करियर में रघु राय ने भारत की कई ऐतिहासिक घटनाओं को कैमरे में उतारा। भोपाल गैस त्रासदी के बाद के दर्दनाक दृश्य हों या मदर टेरेसा और दलाई लामा जैसे महान व्यक्तित्वों के भावनात्मक चित्र—उनकी हर तस्वीर एक कहानी कहती थी। उनकी फोटोग्राफी में गहराई, संवेदनशीलता और सटीकता साफ दिखाई देती थी।

उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1972 में पद्मश्री से सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले।


जब भोपाल का दम घुट रहा था… गैस त्रासदी में जिंदगी को अलविदा कहता मासूम और रघु राय की दिल छू लेने वाली फोटो

भारत के मशहूर फोटो पत्रकार रघु राय का 83 साल की उम्र में निधन हो गया. उनके जाने के बाद एक बार फिर उनकी ऐतिहासिक तस्वीरें चर्चा में हैं, खासकर भोपाल गैस त्रासदी की वह तस्वीर जिसमें एक मासूम बच्ची मिट्टी में दबी नजर आती है.

रघु राय द्वारा खिची यह तस्वीर आज भी दुनिया को उस दर्दनाक हादसे की याद दिलाती है और हजारों बेगुनाह जिंदगियों की कहानी बयान करती है

भारत के मशहूर फोटो जर्नलिस्ट रघु राय अब हमारे बीच नहीं रहे. 83 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. वे काफी समय से बीमार थे और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. उनके बेटे नितिन राय ने बताया कि उन्हें कैंसर था और उम्र बढ़ने की वजह से भी कई दिक्कतें हो रही थीं. कुछ साल पहले उन्हें प्रोस्टेट कैंसर हुआ था, जो बाद में शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल गया और आखिरकार यह बीमारी उनके दिमाग तक पहुंच गई. उनके निधन के बाद आज उनकी उन तस्वीरों के लिए पूरे देश में उन्हें याद किया जा रहा है.

जब भी भारत की सबसे दर्दनाक घटनाओं की बात होती है, तो भोपाल गैस ट्रेजेडी की वह मशहूर तस्वीर जरूर याद आती है, जिसमें एक मासूम बच्ची मिट्टी में दबी हुई नजर आती है. यह तस्वीर रघु राय ने ही खींची थी, और यही फोटो उनके करियर की सबसे प्रभावशाली तस्वीरों में गिनी जाती है. आज उनकी खींची तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.

तस्वीर को याद कर दे रहें श्रद्धांजलि
यह तस्वीर सिर्फ एक फोटो नहीं थी, बल्कि एक पूरा दर्द, एक पूरी कहानी अपने अंदर समेटे हुए थी. इसे देखने के बाद दुनिया भर के लोग हिल गए थे. इस एक तस्वीर ने भोपाल गैस त्रासदी की भयावहता को दुनिया के सामने ला दिया. आज जब रघु राय हमारे बीच नहीं हैं, तो लोग उनकी इसी तस्वीर को याद करके उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं. भोपाल गैस ट्रेजेडी दुनिया की सबसे भयानक दुर्घटनाओं में से एक मानी जाती है. इस त्रासदी की कई तस्वीरें आज भी लोगों को अंदर तक झकझोर देती हैं. उन्हीं में से एक है एक छोटी बच्ची की तस्वीर, जो मिट्टी में दबी हुई नजर आती है. यह फोटो सालों तक इस हादसे की सबसे दर्दनाक पहचान बन गई.

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राजनीति, समाज और संस्कृति से जुड़ी घटनाओं को किया कवर
आपको बता दें कि रघु राय ने बहुत कम उम्र में फोटोग्राफी शुरू की थी. 1965 में उन्होंने कैमरा उठाया और सिर्फ एक साल बाद, 1966 में, उन्हें ‘द स्टेट्समैन’ अखबार में काम करने का मौका मिल गया. यहां उन्होंने करीब 10 साल तक काम किया और अपनी खास पहचान बनाई. उनकी फोटोग्राफी की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे हर तस्वीर में एक कहानी दिखाते थे. चाहे वह आम लोगों की जिंदगी हो, देश की संस्कृति हो या कोई बड़ी घटना- वे हर चीज को अपने कैमरे में बहुत ही सजीव तरीके से कैद करते थे.

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और बांग्लादेश शरणार्थियों की स्थिति को उन्होंने अपने कैमरे में बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाया. उनके इसी काम के लिए 1972 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा. 1980 के दशक में उन्होंने इंडिया  मैगजीन के साथ काम किया. यहां उन्होंने कई बड़े प्रोजेक्ट किए और राजनीति, समाज और संस्कृति से जुड़ी घटनाओं को अपनी तस्वीरों के जरिए लोगों तक पहुंचाया.

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फोटोग्राफर ऑफ द ईयर का मिला अवॉर्ड 
उनकी तस्वीरें सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर की बड़ी पत्रिकाओं में छपी. 1992 में उन्हें नेशनल ज्योग्राफिक में प्रकाशित एक स्टोरी के लिए फोटोग्राफर ऑफ द ईयर का अवॉर्ड मिला. 2009 में फ्रांस सरकार ने भी उन्हें एक बड़ा सम्मान दिया.उनके निधन के बाद एक बार फिर उनकी वही तस्वीरें सोशल मीडिया और खबरों में छाई हुई हैं. लोग कह रहे हैं कि रघु राय सिर्फ एक फोटोग्राफर नहीं थे, बल्कि एक कहानीकार थे, जिन्होंने कैमरे के जरिए इतिहास को जीवित कर दिया.

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कौन थी यह बच्ची?
यह तस्वीर मशहूर फोटोग्राफर रघु राय ने खींची थी. इस फोटो में एक मासूम बच्ची का चेहरा दिखाई देता है, जो आधी मिट्टी में दबी हुई है. उसकी आंखें बंद हैं और चेहरा बिल्कुल शांत, लेकिन बेहद दर्दनाक नजर आता है. इस तस्वीर को देखकर ऐसा लगता है जैसे उस बच्ची ने बहुत तकलीफ झेली हो. इस तस्वीर में दिख रही बच्ची की पहचान पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाई थी. यही कारण है कि यह फोटो और भी ज्यादा रहस्यमयी और भावनात्मक बन जाती है. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बच्ची उन हजारों बच्चों में से एक थी, जो जहरीली गैस के कारण अपनी जान गंवा बैठे थे.

इस बच्ची की कोई एक आधिकारिक पहचान सामने नहीं आई, लेकिन यह तस्वीर उन सभी मासूम जिंदगियों का प्रतीक बन गई, जो इस हादसे में खत्म हो गईं. इसलिए इसे भोपाल गर्ल या भोपाल गैस ट्रेजेडी गर्ल के नाम से भी जाना जाता है.

क्या है इस फोटो की कहानी
1984 की उस रात, जब यूनियन कार्बाइड के प्लांट से जहरीली मिथाइलआइसोसाइनाइट (MIC) गैस लीक हुई, तब हजारों लोग नींद में ही इसकी चपेट में आ गए. सुबह होते-होते शहर में हर तरफ मौत और तबाही का मंजर था. इसी दौरान फोटोग्राफर रघु राय वहां पहुंचे और उन्होंने इस दर्दनाक सच्चाई को अपने कैमरे में कैद किया. उन्होंने कई तस्वीरें लीं, लेकिन यह बच्ची वाली तस्वीर सबसे ज्यादा चर्चित हुई. इसमें एक आदमी का हाथ भी दिखता है. यह दृश्य इतना भावुक था कि जिसने भी इसे देखा, वह अंदर तक हिल गया. इस तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान भोपाल गैस त्रासदी की ओर खींचा.

इस फोटो की खास बात यह है कि इसमें बिना कुछ बोले ही बहुत कुछ कहा गया है. इसमें न सिर्फ एक बच्ची का दर्द दिखता है, बल्कि उस पूरी त्रासदी का असर नजर आता है. यह तस्वीर कई अंतरराष्ट्रीय मैगजीन और अखबारों में छपी. इसने लोगों को यह समझाने में मदद की कि यह हादसा कितना बड़ा और भयावह था. कई लोग कहते हैं कि अगर यह फोटो न होती, तो शायद दुनिया को इस त्रासदी की गंभीरता इतनी जल्दी समझ नहीं आती.

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इस तस्वीर ने लोगों के दिलों को झकझोर दिया. इसे देखने के बाद दुनियाभर में गुस्सा और दुख दोनों फैला. लोगों ने सवाल उठाए कि इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो सकती है? और क्यों इतने निर्दोष लोगों की जान चली गई? भोपाल गैस त्रासदी को कई साल बीत चुके हैं, लेकिन इस तस्वीर को लोग आज भी याद करते हैं.  जब भी इस हादसे की बात होती है, यह फोटो जरूर सामने आती है.

रघु राय की तस्वीरों में खामोशी व आत्मविश्वास की 2 कहानियाँ… जब मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी के फोटो से नजर आई सत्ता परिवर्तन की झलक

पूर्व PM मनमोहन सिंह और PM नरेंद्र मोदी (रघु राय द्वारा ली गईं तस्वीरें:

देश के दिग्गज फोटो पत्रकार रघु राय का रविवार (26 अप्रैल 2026) को 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने अपने दशकों लंबे करियर में कई मशहूर और चर्चित तस्वीरें खींची और उनकी तस्वीरों से जुड़े कई किस्से मशहूर रहे। इनमें एक किस्सा मनमोहन सिंह और PM नरेंद्र मोदी की तस्वीरों से जुड़ा है। बात जनवरी 2014 की है उस वक्त मनमोहन सिंह PM थे और चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी उनके सबसे बड़े प्रतिद्विंदी के तौर पर सामने आए थे।

स्क्रॉल की रिपोर्ट के मुताबिक, Raghu Rai ने कॉन्ग्रेस और BJP के राजनीतिक सत्रों को कवर करने का फैसला किया। 17 जनवरी 2014 को राय कॉन्ग्रेस के सत्र में पहुँचे और वहाँ उन्होंने देखा कि मनमोहन सिंह के चेहरे पर ‘गहरी उदासी’ झलक रही थी। राय अपनी किताब ‘The Tale of Two: An Outgoing and An Incoming Prime Minister’ में लिखते हैं, “मैं बेचैन हो गया और खुद से पूछा कि किसने इनके साथ ऐसा किया और क्यों किया, या क्या ये खुद ही इसके जिम्मेदार हैं?”

कुछ दिन बाद, 19 जनवरी को जब वह भाजपा के सत्र में गए, तो उन्होंने पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के व्यक्तित्व में अलग ही आत्मविश्वास नजर आया। राय लिखते हैं, “जब मैं बड़ी स्क्रीन पर एक-एक करके तस्वीरें देख रहा था, तो जो मैंने देखा उससे मुझे दुख हुआ।” उनकी तस्वीरों में एक ओर ऐसा व्यक्ति दिखाई दिया जो अकेलापन महसूस करता हुआ और हालात के सामने हार मानता नजर आता है जबकि दूसरी ओर एक नेता आत्मविश्वास से भरा हुआ, साफ लक्ष्य के साथ अपने समर्थकों से संवाद करता दिखता है।

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