पति की गोली ने लील ली तीन जिन्दगी, लेकिन वजह अब भी धुंधली
पारिवारिक संबंधों में कोई भी पुरुष केवल दो ही पहलू में किसी की हत्या पर आमादा होता है, जब या तो उसका कोई करीबी रिश्तेदार ने उसकी भारी रकम हड़प ली हो, या फिर किसी दूसरे शख्स का उसकी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध हों। तो क्या हम यह मान कर आगे बढ़ें कि अपनी पत्नी दिव्या की हत्या उसके पति मानस बाजपेई ने इनमें से ही किसी एक प्रकरण को लेकर की है।
दिव्या के कथित रिश्ते की कड़ी अभी अनसुलझी
हताश फैसले के पीछे क्या कोई दूसरी कहानी थी
चुप्पी गंभीर सवाल है, जवाब दें प्रज्ञा और भरत
कुमार सौवीर
पारिवारिक संबंधों में कोई भी पुरुष केवल दो ही पहलू में किसी की हत्या पर आमादा होता है, जब या तो उसका कोई करीबी रिश्तेदार ने उसकी भारी रकम हड़प ली हो, या फिर किसी दूसरे शख्स का उसकी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध हों। तो क्या हम यह मान कर आगे बढ़ें कि अपनी पत्नी दिव्या की हत्या उसके पति मानस बाजपेई ने इनमें से ही किसी एक प्रकरण को लेकर की है।
लेकिन इस मामले पर फैसलाकुन मोड़ पर पहुंच पाना अब खासा मशक्कत का काम बन गया है। मुझे नहीं पता कि पुलिस इस मामले में किस दिशा में काम जांच कर ही है। लेकिन जहां तक मैं समझता हूं कि मारी गयी युवती इस पूरे मामले में अहम किरदार रही है। उसके सिर पर पीछे से गोली मारना इस पूरे मामले को काफी कुछ प्रमाणित करता है।
पुलिस के पास किसी भी घटना का रिक्रीयेशन जैसा नाटक करने का अधिकार है, और उसके लिए आवश्यक साधन जुटाने की हैसियत भी। लेकिन मैं केवल सहज बुद्धि से इस मामले को देखता हूं तो सीधा जवाब मिलता है कि यह मामला उत्तर-वैवाहिक रिश्तों की परिणति है, जिसमें परिणय की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन रहा। इतना ही नहीं, इस मामले में प्रज्ञा मिश्रा और उसके पति भरत यादव की पूरी जानकारी रही है। हां, दिक्कत यह है कि इन दोनों ने इस मामले को सुलझाने की कोशिश नहीं की। हालांकि यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दिव्या के इतर-वैवाहिक रिश्ता में दखल रखने वाला शख्स कौन है। इसके बावजूद प्रज्ञा और भरत इस मामले में लगातार चुप हैं, जिसके चलते उन दोनों का व्यवहार गंभीर चरित्र होता जा रहा है।
अगर वास्तव में दिव्या के जीवन में कोई दूसरा व्यक्ति था तो वह कौन था। मानस को उसके बारे में कब पता चला। क्या इस कारण पति पत्नी के बीच तनाव बढ़ा। क्या प्रज्ञा और भरत को इसकी जानकारी थी। और अगर थी तो उन्होंने क्या भूमिका निभाई। या फिर कोई दूसरा कारण था इन हत्याओं व आत्महत्या का। इन सवालों के जवाब अभी नहीं हैं। प्रज्ञा और भरत की चुप्पी को अपने आप किसी अपराध की स्वीकारोक्ति मानना गलत होगा, लेकिन मानस के आखिरी संदेश में उनका नाम आने के बाद उनकी ओर से इस पूरे प्रसंग पर क्या कहा गया, यह जानना जरूर जरूरी है।
तो समझ लीजिए कि इस घटना की भूमि क्या रही है। करीब दस-बारह साल पहले दिव्या का विवाह मानस से हुआ। उसके माता-पिता नहीं थे। केवल एक बहन थी जो बीमार रहती थी। मानस भी बैंक में था, एसबीआई में। जबकि दिव्या आईसीआईसीआई में सहायक प्रबंधक थी। कुछ साल तो उल्लास में चला, लेकिन बाद में दिव्या के जीवन में एक युवक शामिल हुआ, जो मानस की जिन्दगी को लगातार डंसने लगा। जाहिर है कि तनाव बढने लगा। दिव्या नये प्रेम में झूम रही थी, जबकि मानस हालातों से लगातार टूटता ही जा रहा था।
इस मामले पर मैंने तत्सबन्धी कई विशेषज्ञों से गंभीर बातचीत की है, जिनमें बड़े वकील, पुलिस अधिकारी और सामाजिक व मनोवैज्ञानिक भी शामिल हैं। मुझे लगता है कि दिव्या और उसके नये प्रेम की जानकारी प्रज्ञा और भरत को शुरू से ही थी। इसके बावजूद यह नहीं समझ में पा रहा है कि मानस से दिव्या से दूरी और तनाव का लगामार बढते रहने का कारण क्या था। बीमार ननद का घर में साथ न मिल पाना, बहन का पति से लगाव रखना, या फिर इससे ऊब होकर दिव्या का किसी दूसरे से करीब चले जाना। कुछ भी हो, प्रज्ञा और भरत को इस उलझन की जानकारी थी, लेकिन वे इन दोनों के बीच मामला सुलझा पाने में असमर्थ रहे। या खामोश ही रहे। कारण चाहे कुछ भी हो।
एक साल पहले तनाव खासा बढा, तो दिव्या अलग हो गयी और उसने मानस को तलाक देने का फैसला कर लिया। इसके लिए उसने मानस के व्यवहार को दंडित करने के लिए एक करोड़ रुपया और स्त्रीधन की वापसी की मांग की। स्त्रीधन यानी दहेज की बात तो समझ में आती है, लेकिन मेरे हिसाब से एक करोड़ रुपयों की मांग का आधार केवल मानस को मानसिक रूप से तोड़ देने की कवायद ही थी। मानस के पास इतनी हैसियत नहीं थी, एक ओर तो टूटता परिवार, दूसरा तलाक से उपजने की आर्थिक आशंकाएं और फिर गंभीर रूप से बीमार बहन की सेवा करने में असमर्थता।
तो 20 अगस्त की दोपहर को मानस बाजपेई ने फैसला कर लिया। वह दिव्या के बैंक गया, उसे बाहर बुलाया और सीढी पर उससे बात करने लगा। बात नहीं बनी होगी, तो दिव्या मुड़ कर वापस बैंक की ओर बढने लगी होगी। इससे मानस पूरी तरह बौखला गया, गुस्से में उसने मुड़ कर जाती दिव्या के सिर पर पीछे से गोली मार दी। इस कांड के बाद उसने तत्काल फैसला किया होगा कि चलो प्रज्ञा और भरत यादव से भी निपट लिया जाए। फिर सोचा होगा कि वह दिव्या की हत्या के बाद वह पूरी तरह अकेला तो हो गया है, और अब उसका जीवन केवल जेल ही होगा। ऐसी हालत में बीमार बहन सीबा का क्या होगा। यही सोच कर उसने सोचा होगा कि अब वह पहले अपने घर जाए और अपनी बहन को मार कर प्रज्ञा मिश्रा और भरत यादव की हत्या करे।
लेकिन बहन की हत्या के बाद उस पर जबर्दस्त अपराध बोध का कहर टूटने लगा होगा। ऐसे में उसने हनुमान चालीसा का भजन बजाया और फिर अपने आप को भी मौत की गोद में धकेल दिया।
अब दिव्या का वह नया प्रेमी कौन हो, इसका पता तो या पुलिस पता करे, या फिर प्रज्ञा मिश्रा और भरत यादव ही बता दें। चाहे कुछ भी हो, इन तीनों पर कोई सजा भले ही न हो सके, लेकिन उस प्रेमी के नाम का खुलासा होना जरूरी है। ताकि भविष्य में यह घटना के पीछे घटनाक्रम समाज को जागृत करते रहें।
अभी इन सवालों के जवाब नहीं हैं। यह तो मेरे वह अनुमान हैं, जो अब तक हमारी विभिन्न विशेषज्ञों से हुई बात के आधार पर तैयार किया है मैंने। वैसे भी किसी पर आरोप तय करना हमारा काम नहीं। चाहे वह मानस, सीबा या दिव्या जैसे मृतात्मा हो, लेकिन इन सवालों को पूछना भी छोड़ दें तो फिर इस पूरी पड़ताल का अर्थ क्या रह जाएगा। मगर प्रज्ञा मिश्रा और भरत यादव को ही अपने चश्मा का उल्टा होने की सबब जाहिर करना ही होगा।
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