रवीश कुमार के बाद अब दीपक चौरसिया सोशल मीडिया के गुंडों के निशाने पर

deepakVineet Kumar के फेसबुक वाल से। एक एंकर, संपादक के तौर पर दीपक चौरसिया से हमारी-आपकी लाख असहमति हो सकती है लेकिन वो इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं, ये यकीन कर पाना किसी हाल में संभव नहीं है. मैंने उन्हें सालों से टीवी स्क्रीन पर देखने के साथ-साथ आमने- सामने बैठकर करीब तीन महीने काम किया है. फक्कड़ अंदाज में वो ऑफ रिकार्ड जरूर बात करते हैं लेकिन इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कभी नहीं करते जैसा कि उनके नाम की ट्विट फेसबुक पर तैर रही है.
आप अगर उनके ट्विटर अकाउंट पर जाएंगे तो पाएंगे कि 13 अगस्त के बाद उन्होंने कोई ट्विट ही नहीं की है. कहना न होगा कि उनके नाम की जो ट्विट है वो न केवल पूरी तरह फर्जी है बल्कि उनकी तस्वीर का इस्तेमाल करके फेक अकाउंट से ट्विट की गई है. लोग इसे दनादन शेयर भी कर रहे हैं.

फेसबुक और व्हॉट्स अप पर पिछले कुछ दिनों से ये नया ट्रेंड चला है कि उन तमाम टीवी एंकरों, की तस्वीर के साथ ऐसी बातें चस्पायी जा रही है जो राजनीतिक पार्टी या खास मानसिकता के समर्थकों के विचारों से मेल नहीं खाते. लिहाजा, उनके नाम से उटपटांग संदेश पोस्ट करके आक्रोश पैदा करने का काम किया जाए, उन्हें भड़काए और दनादन इन एंकरों को गाली देने पर मजबूर करे. दीपक चौरसिया भीड़ वाले समारोह,शूट में बाउंसर लेकर चलते हैं लेकिन ये सुविधा बाकी के एंकर के पास नहीं है. ऐसे में बहुत संभव है कि ये जब बिना तथ्यों के ऐसे उग्र भीड़ के आगे पड़ें तो उन पर हमले हो सकते हैं.

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सोशल मीडिया पर अभी तक जो मामला वैचारिक सहमति-असहमति तक सीमित थी, उसे अब ज्यादा खतरनाक रंग दिया जा रहा है. आप ऐसी पोस्टों से गुजरेंगे तो ये महसूस करना बेहद आसान होगा कि इन्हें शारीरिक तौर पर क्षति पहुंचाने की तैयारी चल रही है. एक ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है कि इन पर नजर पड़ते ही इन पर टूट पड़ो. आए दिन पत्रकारों पर हो रहे हमले और हत्या के बीच संभावित हत्या और हमले कहीं रूटीन का हिस्सा न हो जाए.

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