राज्यसभा टीवी में ‘कांग्रेसी घोटाले’ की जांच के आदेश

पिछले उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के कार्यकाल में राज्यसभा टीवी के नाम पर मची करोड़ों रुपयों की लूट की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। नए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इन रिपोर्ट्स पर संज्ञान लेते हुए पूरे खर्च का ऑडिट कराने को कहा है। यह जानकारी सामने आई है कि 2011 में राज्यसभा टीवी शुरू होने से लेकर अब तक इस पर 375 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। जबकि बड़े-बड़े प्राइवेट चैनलों का बजट भी इतना नहीं होता। राज्यसभा की कार्यवाही दिखाने के मकसद से शुरू किए गए इस चैनल ने बाकायदा कमर्शियल फिल्मों का प्रोडक्शन भी शुरू कर दिया था और इसके लिए प्राइवेट प्रोड्यूसर को बिना किसी औपचारिकता के करोड़ों रुपये दिए गए।

नए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इस बात पर हैरानी जताई है कि राज्यसभा टीवी के फंड से साढ़े 12 करोड़ रुपये एक कमर्शियल फिल्म ‘रागदेश’ बनाने के लिए दे दिए गए। फिल्म इसके अलावा फिल्म के प्रोमोशन और दूसरे मदों में खर्चे अलग हैं। इस फिल्म का प्रोड्यूसर राज्यसभा टीवी को नहीं, बल्कि इसके सीईओ गुरदीप सप्पल को बनाया गया। मानो फिल्म के लिए पैसे उन्होंने अपनी जेब से दिए हों। सप्पल हामिद अंसारी के ओएसडी भी थे। इस फिल्म के जरिए दिग्विजय सिंह की दूसरी पत्नी अमृता राय को हीरोइन बनाया गया।  चैनल के लिए संसद भवन के बाहर एक जगह किराये पर ली गई थी जिसका किराया 25 करोड़ रुपये था। इसमें भी घोटाले का शक है। साढ़े तीन करोड़ रुपये तो सिर्फ कर्मचारियों को लाने-ले-जाने के लिए कैब सर्विस पर फूंक दिए गए। इस घोटाले पर हमने 19 अगस्त को विस्तार से रिपोर्ट पोस्ट की थी।

दरअसल राज्यसभा टीवी के बहाने कांग्रेस ने अपने वफादार पत्रकारों की एक पूरी फौज को फायदा दिलवाया। उन्हें गेस्ट एंकर बनाकर हर महीने लाखों रुपये बांटे गए। इसके अलावा हामिद अंसारी जब-जब विदेश जाते उनके साथ राज्यसभा टीवी की एक के बजाय दो टीमें भेजी जाती थीं। ताकि ज्यादा लोगों को सरकारी पैसे पर विदेश की सैर करवाई जा सके। इसके अलावा नौकरी में रहते हुए इसके पत्रकारों ने विदेशों में पढ़ाई और स्कॉलरशिप पर भी खूब ऐश की। इन पत्रकारों में दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय द वायर के एमके वेणु, कैच के भारत भूषण, इंडियास्पेंड.कॉम के गोविंदराज इथिराज और उर्मिलेश जैसे नाम थे। ये सभी कांग्रेस के तनखैया पत्रकार माने जाते रहे हैं।

राज्यसभा टीवी घोटाले को कांग्रेस का आखिरी घोटाला कहा जा सकता है, क्योंकि 2014 में सत्ता जाने के बाद राज्यसभा वो आखिरी संस्था थी जिस पर कांग्रेस का कब्जा बना रहा। अगस्त 2017 में हामिद अंसारी के रिटायर होने के बाद ये कब्जा खत्म हुआ। इस दौरान उनकी अगुवाई में राज्यसभा में कांग्रेस के चाटुकार पत्रकारों की गतिविधियां हमेशा विवादों के साये में रहीं। इस टीम में कांग्रेसियों के अलावा बड़ी संख्या में वामपंथी और जिहादी सोच वाले पत्रकार शामिल थे। जिन्होंने सत्ता की मलाई का जमकर मजा उठाया।

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