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अपने नए नियमों के द्वारा प्रिंट मीडिया को समाप्त करने का कुचक्र रच रहा PRGI

छोटे और मझौले अखबारों के प्रकाशक को कितना गुलाम बनाया जाएगा ? सरकार क्या दे रही है इस पर भी विचार किया जाना चाहिए । सरकार अपनी बनाई विज्ञापन नीति का स्वयं अनुपालन नहीं करती । राष्ट्रीय पर्वों तक पर मिलने वाले विज्ञापन भी चुनिंदा अखबारों को जारी किए जा रहे है ।

Registration of newspapers, periodicals goes online via Press Sewa Portal | India News - Business Standardप्रतिष्ठा में,
श्री संजय जाजू जी IAS
सचिव
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
भारत सरकार, शास्त्री भवन,
नई दिल्ली-110001

विषय : PRGI के नए नियमों से छोटे और मझौले अखबारों के उत्पीड़न के सम्बन्ध में ।

महोदय,
अवगत कराना है PRGI द्वारा अभी हाल ही में नए नियमों के द्वारा प्रिंट मीडिया को समाप्त करने का कुचक्र रचा गया है । समाचार पत्र और पत्रिकाओं को कहा गया है कि वह अपने प्रकाशित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं को फोटो खींचकर PRGI के पोर्टल पर अपलोड करें । समझ में नहीं आता है कि इससे सरकार को क्या हासिल होगा ? उस खींचे गए फोटो को पढ़ा भी नहीं जा सकता । इसके स्थान पर पीडीएफ फाइल अपलोड कराई जाती तो वह पढ़ी भी जा सकती हैं । उल्लेखनीय तथ्य यह है कि PRGI, CBC और PIB के कार्यालय प्रदेश की राजधानियों में ही है । जनपदों से अखबार के प्रकाशकों को प्रदेश की राजधानियों में पीआईबी के कार्यालय में ही अखबार जमा कराने जाना पड़ता है । यह व्यय साध्य कार्य है । प्रकाशक रोजाना जिला सूचना कार्यालय में अखबार जमा करते है । राज्यों के सूचना निदेशालय में भी अखबार जमा कराए जाते है । प्रत्येक माह PIB में भी अखबार जमा कराने जाना पड़ता है । आखिर छोटे और मझौले अखबारों के प्रकाशक को कितना गुलाम बनाया जाएगा ? सरकार क्या दे रही है इस पर भी विचार किया जाना चाहिए । सरकार अपनी बनाई विज्ञापन नीति का स्वयं अनुपालन नहीं करती । राष्ट्रीय पर्वों तक पर मिलने वाले विज्ञापन भी चुनिंदा अखबारों को जारी किए जा रहे है । निर्धारित अनुपात में भी अखबारों को CBC विज्ञापन जारी नहीं कर रही । कलर के नाम पर भी अनियमित रूप से छोटे व मझौले अखबारों को उत्पीड़ित किया जा रहा है । माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के 13 मई 2015 को (कॉमन काज बनाम यूनियन ऑफ इंडिया) दिए गए निर्णय का भी सरकार द्वारा अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है । इस निर्णय के अनुसार सभी समाचार पत्रों को बिना किसी भेदभाव के समानता के आधार पर विज्ञापन जारी किए जाने चाहिए ।

PRGI को समाचार पत्र/पत्रिकाओं के नियमित प्रकाशन की पुष्टि जनपदों के सूचना कार्यालयों एवं प्रदेश के सूचना निदेशालय से करनी चाहिए । सभी समाचार पत्र और पत्रिकाएं इन कार्यालय में अनिवार्य रूप से भेजी जाती है । बहुत से छोटे और मझौले अखबारों पर अपने निजी संसाधन ही नहीं होते । वह जॉब वर्क कराते है । वर्ष 2016 से भारत सरकार निरंतर छोटे और मझौले का अखबारों का शोषण कर रही है । PRGI वर्षों से शीर्षक, पंजीयन आदि के हजारों प्रकाशकों के प्रकरण निस्तारित नहीं कर सकी है । PRGI में मानव शक्ति तक का अभाव है । काफी लंबे समय से DG अस्वस्थ होने की वजह से कार्यालय नहीं आ पा रहे है । अनेकों प्रकरण इस कारण लंबित है । प्रसार जांच के नाम लाखों रुपए का शुल्क निर्धारित किया गया है । जो अनुचित है । जब प्रसार जांच सरकार करा रही है तब प्रकाशक से यह शुल्क क्यों लिया जा रहा है । काफी लंबे समय से विज्ञापन दरों का निर्धारण नहीं हुआ है । जबकि मूल्य सूचकांक के आधार पर विज्ञापन दर निर्धारित होनी चाहिए । सरकारी नौकरी करने वालों का वेतन प्रत्येक वर्ष बढ़ाया जाता है । फिर समाचार पत्रों के साथ यह भेदभाव क्यों किया जाता है ?

आपसे अनुरोध है कि उपरोक्त तथ्यों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करके PRGI को पूर्ववत व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्देशित करने की अनुकंपा करें । साथ ही अविलंब CBC को विज्ञापन दर पुनरीक्षित करने के लिए निर्देशित करने का कष्ट करें ।

आशा है कि आप छोटे और मझौले अखबारों के प्रकाशकों के हित में निर्णय लेने की कृपा करेंगे ।

सादर !

भवदीय

अशोक कुमार नवरत्न
पूर्व सदस्य, भारतीय प्रेस परिषद
महासचिव, ऑल इंडिया स्मॉल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन नई दिल्ली ।
ईमेल : [email protected]
Mobile : 9412274763, 9140545534

प्रतिष्ठा में,
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई
अध्यक्ष
भारतीय प्रेस परिषद
सूचना भवन, सीजीओ कॉम्प्लेक्स, लोदी रोड, नई दिल्ली ।

विषय : स्वतः संज्ञान लेने हेतु ।

महोदया,

आपको अवगत कराना है कि उत्तर प्रदेश में पिछले काफी समय से पत्रकारों की हत्याएं और पुलिस प्रशासन द्वारा गिरफ्तारियां हो रही है । यह सब राजनीतिज्ञों के इशारे पर हो रहा है । सीतापुर में एक हत्या कुछ दिन पहले ही हुई है । अब एक और पत्रकार की हत्या हुई है । उस पत्रकार की लाश बाराबंकी जनपद में तालाब में मिली है । लखीमपुर खीरी में एक पत्रकार को बिना कारण जेल भेजा गया है । जबकि पुलिस महानिदेशक कार्यालय का आदेश है कि बिना उच्चाधिकारी से जांच कराये गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए । उत्तर प्रदेश सरकार से विगत 6 माह में पत्रकारों की हत्या और गिरफ्तारियों की तत्काल जानकारी ली जानी चाहिए । भारतीय प्रेस परिषद में उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव गृह को तलब करके पत्रकारों की हत्याओं और गिरफ्तारियों पर कोई सार्थक कार्यवाही नहीं करने पर भारतीय प्रेस परिषद को कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए ।

भवदीय

अशोक कुमार नवरत्न
पूर्व सदस्य, भारतीय प्रेस परिषद
संरक्षक, उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति
राष्ट्रीय महासचिव, ऑल इंडिया स्मॉल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन नई दिल्ली ।
Email : [email protected]
Mobile : 9412274763, 9140545534

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