यूपी पुलिस के कारनामे; जिम्मेदारी से बचने के लिए दूसरे थाना क्षेत्र में फेंका शव, चौकी इंचार्ज और बीट सिपाही निलंबित
पहला मामला मेरठ का, चौकी इंचार्ज, बीट सिपाही निलंबित, होमगार्डकर्मी की सेवा समाप्ति की संस्तुति. लखनऊ में सरिया व्यापारी को भेजा था जेल.
उत्तर प्रदेश की हाईटेक पुलिस विभाग और सरकार की किरकिरी कराने में अव्वल साबित हो रही है. मेरठ और लखनऊ के दो सनसनीखेज मामले उजागर होने के बाद पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है. मेरठ नौचंदी थाने के पुलिसकर्मियों ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए एक अज्ञात शव को दूसरे थाना क्षेत्र में ठिकाने लगाने की कोशिश की. मामला उजागर होने पर एसएसपी ने पुलिसकर्मियों के सस्पेंड कर दिया है. वहीं लखनऊ की बंथरा पुलिस पर गुडवर्क के लालच में झूठा केस दर्ज करने के मामले में इंस्पेक्टर समेत 5 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज की गई है.
केस-1
पुलिस की अमानवीयता और गैर जिम्मेदारी का पहला मामला मेरठ के नौचंदी थाना क्षेत्र का है. बीते दिनों एक अज्ञात व्यक्ति का शव नौचंदी थाना क्षेत्र में मिला था. जिम्मेदारी से बचने के लिए संबंधित चौकी इंचार्ज ने सहकर्मियों की मदद से ई-रिक्शा पर शव लाद कर दूसरे थाना क्षेत्र में फेंकवा दिया. सीसीटीवी से घटनाक्रम उजागर हुआ तो पुलिस की किरकिरी देख एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने चौकी इंचार्ज जितेंद्र कुमार, बीट सिपाही राजेश कुमार निलंबित करते हुए होमगार्ड की सेवा समाप्ति की संस्तुति कर दी है. एसएसपी ने दोनों थानेदारों की भी भूमिका की जांच कराने की बात कही है. लापरवाही उजागर मिलने पर सख्त एक्शन की चेतावनी भी दी है.
केस-2
गुडवर्क के लालच में सरिया व्यापारी पर किया झूठा केस, इंस्पेक्टर समेत 5 पुलिसकर्मियों पर FIR
लखनऊ में इंस्पेक्टर समेत 5 पुलिसकर्मियों पर एंटी करप्शन इकाई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज कराई है. आरोप है कि पुलिसकर्मियों पर गुडवर्क की शाबाशी बटोरने के लालच में एक सरिया व्यापारी और उसके साथियों को चोरी और जालसाजी के झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजा था. तीन साल चली जांच में पुलिस की कहानी मनगढ़ंत साबित हुई. जिसके बाद बंथरा थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर प्रह्लाद सिंह समेत 5 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज किया गया है.
2020 का है मामला, बंथरा थाने में हुआ था केस
मामला वर्ष 2020 का है. बंथरा थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर प्रह्लाद सिंह तत्कालीन इंस्पेक्टर, SSI दिनेश कुमार, SI संतोष कुमार, SI राजेश कुमार, SI आलोक श्रीवास्तव ने सरिया व्यापारी विकास गुप्ता, डाला चालक दर्शन लाल और छह अन्य पर चोरी और जालसाजी का केस दर्ज जेल भेजा था. एंटी करप्शन लखनऊ इकाई की जांच में मामला झूठा निकलने पर एंटी करप्शन इकाई के निरीक्षक नूरुल हुदा खान ने बंथरा थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर प्रह्लाद सिंह समेत 5 पुलिसकर्मियों पर पीजीआई थाने में मुकदमा दर्ज कराया है.
झूठे साक्ष्य और मनगढ़ंत कहानी
2022 में यह केस संदिग्ध पाए जाने पर इसकी जांच एंटी करप्शन लखनऊ इकाई को सौंपी गई थी. तीन साल की गहन जांच में साबित हुआ कि पांचों पुलिसकर्मियों ने जानबूझ कर झूठे साक्ष्य जुटाए और मनगढ़ंत कहानी तैयार करके कोर्ट में फर्जी दस्तावेज पेश किए.
पुलिस की कहानी के मुताबिक 31 दिसंबर 2020 की रात दारोगा संतोष कुमार ने दावा किया था कि चोरी के सरिया का सौदा हो रहा था. व्यापारी विकास गुप्ता और चालक दर्शन सिंह को गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने रसीद मिलने के बाद कहानी गढ़ी थी कि विकास गुप्ता चोरी का सरिया सस्ते में खरीदकर अपनी दुकान पर बेचता था. इसी झूठे केस में बंथरा के लालता सिंह और उनके बेटे सहित अन्य साथी भी आरोपी बनाए गए थे.
एंटी करप्शन इकाई के निरीक्षक नूरुल हुदा खान ने बताया जांच में दोषी पाए जाने के बाद बंथरा थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर प्रह्लाद सिंह समेत 5 पुलिसकर्मियों पर पीजीआई थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है. आरोपी पुलिसकर्मी फिलहाल लखनऊ पुलिस लाइन और बहराइच में तैनात हैं.

