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विधि के विधान से हार गए विधि……..!!!

तीन दशक पुराने साथी हिंदुस्तान अखबार के क्राइम रिपोर्टर विधि सिंह का आकस्मिक निधन से मीडिया जगत में शोक…

जीवन की इस भागदौड़ में अक्सर हम भूल जाते हैं कि हर सांस एक उपहार है, हर पल एक अनमोल तोहफा। और जब यह तोहफा अचानक छिन जाता है, तो दिल टूट जाता है, आंसू रुकने का नाम नहीं लेते। हिंदुस्तान अखबार के निडर, जुझारू क्राइम रिपोर्टर विधि सिंह का अचानक चले जाना… यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक गहरा दर्द है, उनके लिए जो विधि के करीब थे। विधि हमारे कुबेर टाइम्स के दिनों के साथी थे।

विधि, नाम ही जिसका मतलब है नियति, भाग्य… और देखिए नियति की क्रूर लीला, विधि सिंह खुद विधि के विधान से हार गए। यह सोचकर सीने में एक टीस उठती है, आंखें नम हो जाती हैं। उनकी कलम, जो अपराधियों के दिलों में खौफ पैदा करती थी, समाज की रक्षा करती थी, अब हमेशा के लिए शांत हो गई। हृदयाघात ने उन्हें छीन लिया। कुछ दिन पहले ही उन्होंने स्टन डलवाया था, ये सोचकर कि आगे सबकुछ ठीक रहेगा मगर नियति को कुछ और ही मंजूर था।

उनके परिवार का दर्द, उनके सहकर्मियों की उदासी, और उन अनगिनत पाठकों का शोक अकल्पनीय है जिनके लिए विधि सिंह की खबरें न्याय की उम्मीद थीं। यह नुकसान कितना बड़ा है! एक पिता, एक पति, एक भाई, एक दोस्त… चला गया।

“नैनं छिन्दंति शस्त्राणि, नैनं दहति पावकः…” आत्मा अमर है, शरीर तो बस एक वस्त्र है जो बदल जाता है। लेकिन यह ज्ञान भी आज दिल को सुकून नहीं दे पा रहा। उपनिषद बताते हैं कि आत्मा की यात्रा अनंत है, जन्म-मृत्यु का चक्र चलता रहता है, मोक्ष की ओर। फिर भी, विधि सिंह का यूं अचानक जाना हमें रोने पर मजबूर कर देता है। क्यों? क्योंकि हम इंसान हैं, भावनाओं से बने हुए। रामचरितमानस में तुलसीदास जी की वह पंक्ति याद आती है: “काल करम बस जीव जड़, माया बस गुण मूल।” जीव काल और कर्म के वश में है, लेकिन यह सच्चाई कितनी कड़वी लगती है जब कोई अपना चला जाता है। विधि सिंह ने क्राइम रिपोर्टिंग की दुनिया में डटकर लड़ाई लड़ी, लेकिन जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई – ‘मृत्यु’ – से वे हार गए। यह सोचकर दिल भर आता है।

उनकी यादें अब हमारी ताकत बनें। उनके सहकर्मी जब कोई नई स्टोरी कवर करेंगे, तो विधि सिंह की कमी महसूस करेंगे। उनकी सलाहें याद आएंगी। समाज में अपराध के खिलाफ उनकी आवाज अब हम सबकी आवाज बने। आइए, इस शोक को शक्ति में बदलें। आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनें – ध्यान करें, योग करें, सद्कर्म करें। क्योंकि विधि का विधान अटल है, लेकिन हमारा प्यार, हमारी यादें अमर हैं। विधि सिंह, तुम्हारी आत्मा को शांति मिले, तुम हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहोगे। अलविदा नहीं, क्योंकि कहीं गए नहीं हो तुम, बस रूप बदल लिया है।

ओम शांति… और आंसुओं के बीच एक प्रार्थना….
“विधि सिंह, जहां भी हो, खुश रहो।”

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