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SDM साहब की ‘रील’ बनाना पड़ा भारी हरदोई में एक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर एफआईआर दर्ज हुई…

धर्मेन्द्र हिन्द के ब्लैकमेल करने वाले अंदाज को देखते हुए प्रमुख सचिव ने सीधे तौर पर जवाब दिया कि इस सरकार में ऐसा ही होता है इसमें कुछ गलत नहीं हुआ है इसके बाद धर्मेन्द्र हिन्द बौखला से गए और उन्होंने प्रमुख सचिव के सामने चिल्लाते हुए यह तक कह डाला कि अगर मेरे खबर पर ऐक्शन नहीं हुआ और मैं हारता हुआ महसूस करूंगा तो  विश्वास करिए मैं हथियार उठा लूंगा और अगर हथियार उठाऊंगा तो ऊपर से नीचे तक किसी को नहीं छोड़ूंगा।’

धर्मेन्द्र हिन्द उर्फ़ धर्मेन्द्र सिंह

आजकल सोशल मीडिया पर ‘रील’ बनाने का चस्का किसे नहीं है? लेकिन हरदोई में एक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष को SDM साहब की रील बनाना अब काफी ‘महंगा’ पड़ गया है और उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है।किस्सा शुरू होता है SDM सदर की गाड़ी से। खबर है कि ‘ऐसा कल मंच’ के अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार सिंह ने साहब के साथ हुई गुफ्तगू को बिना कैमरे में कैद कर लिया।राष्ट्रीय अध्यक्ष यहीं नहीं रुके, उन्होंने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर ‘तड़का’ मारकर पोस्ट कर दिया।जब यह वीडियो इंटरनेट पर धड़ल्ले से तैरने लगा, तो SDM साहब के ड्राइवर अजीत कुमार का पारा चढ़ गया। ड्राइवर साहब ने सीधे थाने में ‘नहले पर दहला’ मारते हुए शिकायत दर्ज करा दी।आरोप बड़े चटपटे है बिना परमिशन शूटिंग साहब की बिना मर्जी के वीडियो कैसे बनाया? प्राइवेसी में सेंध: सरकारी काम के बीच में रीलबाजी करना निजता का उल्लंघन है। टशन दिखाना: आरोप है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष वीडियो के जरिए अधिकारियों पर ‘धौंस’ जमाकर अनैतिक दबाव बना रहे थे।अब पुलिस इस मामले की ‘स्क्रिप्ट’ लिख रही है। IT Act और BNS-2023 की धाराओं के तहत अब राष्ट्रीय अध्यक्ष को रील के ‘व्यूज’ के बदले पुलिसिया चक्कर काटने पड़ सकते हैं।फिलहाल राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी इस एफआईआर का जिक्र करते हुए एक वीडीओ फिर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया है।

पत्रकारिता के पवित्र पेशे को कलंकित करते तथाकथित ब्लैमेलर पत्रकार

पत्रकारिता एक ऐसा पेशा है ​जिसका धर्म आम जन को सजग करना भ्रष्टाचार की खबरों को जनता तक पहुंचाना और जनमानस की समस्याओं से सरकार को और प्रशासन को अवगत कराना। आज के समय में इस पवित्र पेशे को कलंकित करने का कुछ तथाकथित पत्रकारों ने ठेका ले लिया है। उनका सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद है कि बिना साक्ष्य शासन-प्रशासन के खिलाफ मनगढ़ंत खबर लगाना और फिर उसी खबर के माध्यम से शासन-प्रशासन के अधिकारियों को ब्लैकमेल करके धन उगाही करना। ताजा मामला एक तथाकथित पत्रकार धर्मेन्द्र सिंह उर्फ धर्मेन्द्र हिन्द का है। यह एक मासिक पत्रिका चलाते हैं और उस मासिक पत्रिका का एक मात्र धर्म ब्लैकमेल करने का हो गया है। ताजा मामला उनके पत्रिका का यह है कि वे पंचायती राज विभाग में अपना कोई व्यक्तिगत काम लेकर पहुंचे थे और जब उनके काम को अधिकारियों ने करने से मना कर दिया तो फिर पंचायती राज विभाग के खिलाफ अजीब-गरीब खबरों का इन्होंने निर्माण करना शुरू कर दिया। बहुत अंदर न जाते हुए अगर इस खबर की बात की जाए तो इस खबर में कुछ चीजों इन्होंने बाक्स में लिखी हैं। यदि उस पर ध्यान दिया जाए तो इन्होंने पंचायती राज विभाग के हर अधिकारी, कर्मचारी को धमकाने का कार्य किया। अपने आपको सही साबित करने के लिए इन्होंने पंचायती राज 2024 में हुए चुनाव को लेकर एक बड़ा मुद्दा बना दिया। यहां तक तो सब ठीक था लेकिन जब इनकी बात को विभाग द्वारा तबज्जो नहीं दी गई तब इन्होंने प्रमुख सचिव तत्कालीन पंचायती राज नरेंद्र भूषण से मुलाकात कर उनको धमकाने के अंदाज में कहा कि मैंने दो महीने पहले एक खबर चलाई थी जिसको आपने संज्ञान में नहीं लिया। उनको धमकाते हुए धर्मेन्द्र सिंह उर्फ धर्मेन्द्र हिन्द ने कहा कि ‘इतनी सशक्त सरकार में अभी तक इतने बड़े पद पर आपके रहते हुए भी आपके विभाग का एक छोटा सा मैटर हल नहीं हो पा रहा है। धर्मेन्द्र हिन्द के ब्लैकमेल करने वाले अंदाज को देखते हुए प्रमुख सचिव ने सीधे तौर पर जवाब दिया कि इस सरकार में ऐसा ही होता है इसमें कुछ गलत नहीं हुआ है इसके बाद धर्मेन्द्र हिन्द बौखला से गए और उन्होंने प्रमुख सचिव के सामने चिल्लाते हुए यह तक कह डाला कि अगर मेरे खबर पर ऐक्शन नहीं हुआ और मैं हारता हुआ महसूस करूंगा तो  विश्वास करिए मैं हथियार उठा लूंगा और अगर हथियार उठाऊंगा तो ऊपर से नीचे तक किसी को नहीं छोड़ूंगा।’
धर्मेन्द्र हिन्द के हथियार उठाने और ऊपर से नीचे किसी को न छोड़ने का क्या मतलब हो सकता है। क्या किसी विभाग का अधिकारी धर्मेन्द्र हिन्द जैसे ब्लैकमेलर पत्रकारों की बात नहीं सुनेगा तो वह हथियार उठाने की धमकी देंगे, लोगों को मार डालने की धमकी देंगे। क्या यह पत्रकारीय चरित्र है। नहीं, इसको पत्रकारिता नहीं कहते इसको खबर के माध्यम से ब्लैकमेल करने की प्र​क्रिया कहते हैं। ऐसा नहीं है यह सिर्फ पंचायती राज में हुआ है। धर्मेन्द्र हिन्द ने अपनी तथाकथित पत्रकारिता को और सूचना के आदान-प्रदान में सहयोगी सोशल मीडिया को तमाम विभागों को ब्लैकमेल करने का बड़ा जरिया बना रखा है। आजकल धर्मेन्द्र हिन्द फेसबुक पर अनर्गल वीडियो के माध्यम से प्रलाप करते हुए मिल जाएंगे। सोशल मीडिया को इन्होंने ब्लैकमेल करने के लिए अनर्गल प्रलाप का बहुत अच्छा माध्यम बनाया है कारण साफ है सोशल मीडिया पर आप कुछ भी किसी को भी कभी भी कहीं भी बोल सकते हैं। इसके किसी भी सबूत की आवश्यकता नहीं होती। कई लोगों ने जब हमसे यह कहा कि भड़ास4जर्नलिस्ट के माध्यम से ऐसे तथाकथित ब्लैकमेलर पत्रकारों की पोल खुलनी चाहिए फिर मैंने धर्मेन्द्र सिंह उर्फ धर्मेन्द्र हिन्द के क्रियाकलापों पर गौर करना शुरू किया। इनके इतिहास को देखते हुए यह कहने भी कहीं गुरेज नहीं कि पत्रकारिता इनके लिए सिर्फ ब्लैकमेलिंग का जरिया है इससे ज्यादा कुछ नहीं। आने वाले दिनों में इनके और भी बड़े-बड़े कारनामों से अवगत कराने का कार्य किया जाएगा।

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