दिल्ली में महिला पत्रकार से दुर्व्यवहार, मीडिया कर्मियों का कैमरा रखकर प्रदर्शन
घटना के विरोध में दिल्ली के पत्रकारों और मीडिया संगठनों ने कैमरा रखकर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि यदि न्यायपालिका महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को हल्के में लेती रहेगी, तो ऐसे मामलों की संख्या और बढ़ेगी।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के सामने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की महिला रिपोर्टर अनुश्री के साथ एक पुलिसकर्मी द्वारा कथित रूप से दुर्व्यवहार किए जाने के विरोध में मीडिया कर्मियों ने कैमरा रखकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। यह घटना न केवल महिला पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति बढ़ती असंवेदनशीलता को भी उजागर करती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस के एक कर्मी ने महिला पत्रकार के साथ सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत की। जब इसका विरोध किया गया, तो आरोपी पुलिसकर्मी ने सफाई देते हुए कहा कि उसने गलती से उन्हें स्कूली छात्रा समझ लिया था। यह बयान और भी चौंकाने वाला है क्योंकि यह सवाल उठाता है—क्या स्कूली छात्राओं के साथ इस तरह की हरकत अपराध नहीं मानी जानी चाहिए?
घटना के विरोध में दिल्ली के पत्रकारों और मीडिया संगठनों ने कैमरा रखकर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि यदि न्यायपालिका महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को हल्के में लेती रहेगी, तो ऐसे मामलों की संख्या और बढ़ेगी।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब इसे इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक हालिया फैसले से जोड़ा गया, जिसमें न्यायमूर्ति राममनोहर नारायण मिश्रा ने टिप्पणी की थी कि ‘लड़की के स्तन पकड़ना, नाड़ा खोलना और पुलिया के नीचे ले जाना बलात्कार का प्रयास नहीं’ है। इस फैसले की पहले भी कड़ी आलोचना हो चुकी है, और अब इस नई घटना ने इसे फिर से चर्चा में ला दिया है।
इस घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि जब तक महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर कड़े कानून और न्यायिक सख्ती नहीं होगी, तब तक ऐसे मामलों पर लगाम लगाना मुश्किल होगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि महिला पत्रकार इस मामले में भारतीय दंड संहिता की किन धाराओं के तहत केस दर्ज कराती हैं और न्याय व्यवस्था इसे कितनी गंभीरता से लेती है।
महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज को भी इसके लिए जागरूक होना होगा। यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं बढ़ती जाएंगी, और इसका असर पूरे समाज पर पड़ेगा।
