सहारा ने अपने कर्मियों को किया बेसहारा, वेतन और न्याय दिलाने की मांग को लेकर मान्यता समिति का दल मिला मुख्य सचिव (सूचना)से
बकाया वेतन और पीएफ का भुगतान किए बिना कर्मचारियों को बाहर निकालना और इसके साथ ही राष्ट्रीय सहारा अखबार का प्रकाशन बंद कर देना, श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है। इस वजह से सहारा समूह से जुड़े हजारों मीडियाकर्मी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई कर्मचारियों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने और वकील करने तक के संसाधन नहीं बचे हैं।
राष्ट्रीय सहारा प्रिंट और सहारा समय चैनल के मीडियाकर्मियों को वेतन और न्याय दिलाने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति ने बुधवार को अपर मुख्य सचिव (सूचना) संजय प्रसाद से मुलाकात की। समिति की ओर से अध्यक्ष हेमंत तिवारी और सचिव भारत सिंह ने एसीएस को अवगत कराया कि सहारा मीडिया समूह से जुड़े लखनऊ, नोएडा सहित प्रदेश भर के सैकड़ों मीडियाकर्मी गंभीर संकट से गुजर रहे हैं।
समिति अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने बताया कि राष्ट्रीय सहारा अखबार और सहारा समय चैनल में कार्यरत श्रमजीवी पत्रकारों और कर्मचारियों को कई वर्षों से नियमित वेतन नहीं दिया जा रहा था। वर्तमान में स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है, क्योंकि सहारा प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों को बिना किसी नोटिस के नौकरी से निकाला जा रहा है और उन पर जबरन इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बकाया वेतन और पीएफ का भुगतान किए बिना कर्मचारियों को बाहर निकालना और इसके साथ ही राष्ट्रीय सहारा अखबार का प्रकाशन बंद कर देना, श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है। इस वजह से सहारा समूह से जुड़े हजारों मीडियाकर्मी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई कर्मचारियों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने और वकील करने तक के संसाधन नहीं बचे हैं।
समिति ने एसीएस सूचना को यह भी बताया कि वेतन न मिलने, पीएफ अटके होने और नौकरी छिन जाने के तनाव के चलते पूर्व में कुछ सहाराकर्मी आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर हो चुके हैं, जो अत्यंत गंभीर और चिंताजनक स्थिति है।
अंत में समिति की ओर से अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद से अनुरोध किया गया कि वे इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर सहारा प्रबंधन और पीड़ित मीडियाकर्मियों के बीच हस्तक्षेप करें, ताकि कर्मचारियों को उनका बकाया वेतन, पीएफ और न्याय मिल सके।


